क्या भारत-यूएई के बीच हुए समझौतों से द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि होगी?
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नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की डेढ़ घंटे की आधिकारिक यात्रा को विदेश मंत्रालय ने अत्यंत महत्वपूर्ण करार दिया है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं का संयुक्त बयान भी जारी किया गया।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "यूएई के राष्ट्रपति ने नई दिल्ली की अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी की है। यह एक छोटी, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा थी। एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनका स्वागत किया, जो दोनों नेताओं के बीच की दोस्ती को दर्शाता है। इसके बाद, वे एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री आवास तक साथ गए, जहाँ सीमित और फिर बड़े फॉर्मेट में बातचीत हुई। इस दौरान कई डॉक्यूमेंट्स का आदान-प्रदान किया गया।
विदेश सचिव ने कहा, "व्यापार के मोर्चे पर, 2022 में दोनों देशों के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होने के बाद से, द्विपक्षीय व्यापार 100 बिलियन डॉलर को पार कर गया है। इसे देखते हुए, दोनों नेताओं ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही, एमएसएमई उद्योगों के निर्यात को पश्चिम एशियाई, अफ्रीकी और यूरेशियन क्षेत्रों में सुगम बनाने का निर्णय लिया गया है।
रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर काम करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, अंतरिक्ष क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। भारतीय संस्था इन-स्पेस और यूएई स्पेस एजेंसी के बीच एक समझौता हुआ है, जिसका उद्देश्य स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास और उसका व्यावसायिक उपयोग करना है।
बयान के अनुसार, सबसे बड़ा निवेश समझौता गुजरात के धोलेरा के संबंध में हुआ है, जहाँ यूएई 'स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन' के विकास में भागीदार बनेगा। इसके तहत धोलेरा में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, विमानों की मरम्मत के लिए एमआरओ सेंटर, नया बंदरगाह और स्मार्ट टाउनशिप जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
दोनों पक्षों ने एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में सहयोग पर विचार करने का निर्णय लिया है, जिसमें बड़े न्यूक्लियर रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर का विकास शामिल है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सहयोग के लिए प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताया गया है।
यूएई की साझेदारी से भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने पर सहयोग करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, यूएई भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश पर भी विचार करेगा।
मंत्रालय के अनुसार, यह एक अपेक्षाकृत नई अवधारणा है, लेकिन यह देखने के लिए काम किया जाएगा कि इन्हें आपसी मान्यता प्राप्त संप्रभुता समझौतों के तहत कैसे स्थापित किया जा सकता है।