टीएमसी ने राष्ट्रपति के बयान पर गंभीर आपत्ति जताई, लक्ष्मीर भंडार और अन्य योजनाओं का उल्लेख किया

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टीएमसी ने राष्ट्रपति के बयान पर गंभीर आपत्ति जताई, लक्ष्मीर भंडार और अन्य योजनाओं का उल्लेख किया

सारांश

कोलकाता में टीएमसी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बयान पर आपत्ति जताते हुए आदिवासी समुदायों के लिए किए गए विकास कार्यों की जानकारी दी। यह जानकारी लक्ष्मीर भंडार, सिखश्री और जय जोहार योजनाओं के माध्यम से साझा की गई।

मुख्य बातें

टीएमसी ने राष्ट्रपति के बयान पर गंभीर आपत्ति जताई।
लक्ष्मीर भंडार योजना के तहत एसटी महिलाओं की सहायता बढ़ाई गई।
जय जोहार योजना से आदिवासी परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिली।
टीएमसी ने कई विकास योजनाओं का विवरण दिया।
आदिवासी विकास के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं।

कोलकाता, 7 मार्च (राष्ट्रीय प्रेस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया बयान पर गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि पश्चिम बंगाल में आदिवासी (एसटी) समुदायों के लिए सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण और मापने योग्य विकास कार्य किए हैं।

टीएमसी ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर एक विस्तृत पोस्ट में राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए लिखा कि यह दुखद है कि राष्ट्रपति को यह भ्रांति है कि बंगाल में आदिवासी समुदायों के लिए कोई विकास नहीं हुआ। पार्टी ने कई योजनाओं और आंकड़ों के माध्यम से अपनी उपलब्धियां साझा कीं।

पोस्ट में उल्लेख किया गया कि 'लक्ष्मीर भंडार योजना' के तहत एसटी महिलाओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता को 500 रुपए बढ़ाकर 1,700 रुपए प्रति माह (वार्षिक 20,400 रुपए) कर दिया गया है। 2025-26 में सिखश्री स्कॉलरशिप के अंतर्गत 1,09,272 एसटी छात्रों को पढ़ाई के लिए सहायता प्रदान की गई। जय जोहार योजना के तहत 2,98,315 लाभार्थियों को मासिक 1,000 रुपए की पेंशन मिल रही है, जिससे आदिवासी परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है।

टीएमसी ने 'सिद्धू कानू मेमोरियल (संथाली माध्यम) अबासिक स्कूल' की स्थापना का भी उल्लेख किया, जिससे एसटी बच्चे अपनी मातृभाषा संथाली में शिक्षा प्राप्त कर सकें। जंगलमहल जिलों में 35,845 एसटी व्यक्तियों को पश्चिम बंगाल केंदू लीव्स कलेक्टर्स सोशल सिक्योरिटी स्कीम का लाभ मिला है। लैंपस की महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए चालू वित्तीय वर्ष में प्रत्येक एसएचजी को 30,000 रुपए की सहायता दी गई, जिसके तहत अब तक 7,932 एसएचजी को 23.80 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं।

जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए अंतिम मील कनेक्टिविटी, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें सड़कें, पुलिया, पुलों का निर्माण, हैंड पंप और सोलर-आधारित ट्यूबवेल की स्थापना, एसटी हॉस्टल की मरम्मत, कम्युनिटी हॉल, आईसीडीएस सेंटर, जाहेर थान और माझी थान का निर्माण तथा सोलर स्ट्रीट लाइट लगाना शामिल है। इन कार्यों के लिए अब तक कुल 78.94 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं।

टीएमसी ने जोर दिया कि ये सभी योजनाएं और परियोजनाएं जमीनी स्तर पर मापी जा सकती हैं और इनका उद्देश्य बंगाल में आदिवासी समुदायों के लिए सम्मान, अवसर और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। पार्टी ने राष्ट्रपति से अपील की कि वे इन प्रयासों को ध्यान में रखें और बंगाल सरकार की प्रतिबद्धता को समझें।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां आदिवासी समुदायों के विकास के लिए उठाए गए कदमों पर राष्ट्रपति का बयान टीएमसी के लिए चुनौती बन गया है। टीएमसी का यह प्रयास अपने कार्यों को सही साबित करने का है, जो आदिवासी कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी ने राष्ट्रपति के बयान पर क्यों आपत्ति जताई?
टीएमसी का कहना है कि राष्ट्रपति ने गलतफहमी में कहा कि बंगाल में आदिवासी समुदायों के लिए कोई विकास नहीं हुआ।
लक्ष्मीर भंडार योजना क्या है?
यह योजना एसटी महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जो वर्तमान में 1,700 रुपए है।
जय जोहार योजना का लाभ किसे मिलता है?
इस योजना के तहत आदिवासी समुदाय के लोगों को मासिक पेंशन दी जाती है।
टीएमसी ने किस स्कूल की स्थापना की है?
टीएमसी ने 'सिद्धू कानू मेमोरियल (संथाली माध्यम) अबासिक स्कूल' की स्थापना की है।
पश्चिम बंगाल में आदिवासी विकास के लिए क्या योजनाएं चलाई जा रही हैं?
टीएमसी ने सड़कें, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कई योजनाओं का उल्लेख किया है।
राष्ट्र प्रेस
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