पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: टीएमसी द्वारा 10 सूत्रीय घोषणापत्र का अनावरण
सारांश
Key Takeaways
- टीएमसी ने 10 सूत्रीय घोषणापत्र जारी किया है।
- महिलाओं के लिए ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का वादा।
- युवाओं को नौकरी तक वित्तीय सहायता।
- कृषि बजट में विशेष पैकेज का प्रस्ताव।
- राज्य के भौगोलिक पुनर्गठन का सुझाव।
कोलकाता, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अपना 10 सूत्रीय चुनावी घोषणापत्र शुक्रवार को जारी किया।
इस घोषणापत्र में पहला वादा महिलाओं के लिए ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना से संबंधित है। पार्टी ने कहा है कि यदि वे सत्ता में लौटती हैं तो सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये और आरक्षित वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये प्रति माह देने का आश्वासन दिया है।
युवाओं के लिए ‘बांग्लार युवा साथी’ योजना के तहत 21 से 40 वर्ष के युवाओं को, जो माध्यमिक परीक्षा पास कर चुके हैं, नौकरी मिलने तक 1,500 रुपये मासिक सहायता देने का वादा किया गया है।
टीएमसी ने हर परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया है। इसके साथ ही 30,000 करोड़ रुपये के कृषि बजट का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें किसानों और भूमिहीन कृषि परिवारों के लिए विशेष पैकेज शामिल होगा।
घोषणापत्र में राज्य के भौगोलिक पुनर्गठन का प्रस्ताव भी है, जिसमें सात नए जिलों का गठन और शहरी निकायों के विस्तार का उल्लेख किया गया है, जिससे नागरिक सुविधाओं में सुधार किया जा सके।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए मौजूदा पेंशन योजनाओं को जारी रखने और उनके दायरे को बढ़ाने का वादा किया गया है। साथ ही, हर घर तक पाइपलाइन के जरिए पीने का पानी पहुंचाने की योजना भी शामिल की गई है।
राज्य को पूर्वी भारत का व्यापारिक केंद्र बनाने के लिए बंदरगाह, सड़क और आधुनिक वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसे बुनियादी ढांचे के विकास का भी आश्वासन दिया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं को ब्लॉक और नगर स्तर तक पहुंचाने के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का भी आश्वासन दिया गया है।
घोषणापत्र जारी करने के बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा चुनाव आयोग का उपयोग कर राज्य में अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति शासन लागू करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि चुनाव के बाद राज्य के कई नागरिकों की नागरिकता छीनने और उन्हें देश से बाहर करने की कोशिश की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मेरी चिंता नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को लेकर चिंता है। इसी कारण मैं केंद्र की इस कथित सत्तावादी नीति के खिलाफ संघर्ष कर रही हूं और लगातार चुनाव आयोग को पत्र लिख रही हूं।”