भारत-फिनलैंड का नया सहयोग: व्यापार, तकनीक, और निवेश पर जोर
सारांश
Key Takeaways
- भारत-फिनलैंड सहयोग को नया आयाम मिलेगा।
- व्यापार और तकनीक पर नए अवसर उत्पन्न होंगे।
- उपलब्धियों को दोगुना करने की दिशा में प्रयास।
- वर्जिन फाइबर प्रोजेक्ट पर बातचीत जारी है।
- दुनिया के 24 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार जुड़ेगा।
मुंबई, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत-फिनलैंड प्रतिनिधिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को देश की आर्थिक राजधानी में संपन्न हुई। इस बैठक के दौरान महाराष्ट्र के उद्योग, ऊर्जा और श्रम विभाग के सचिव डॉ. अनबलगन पी. ने बताया कि यह चर्चा दोनों राष्ट्रों के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का आरंभ है। उन्होंने आगे कहा कि भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है और देश की वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर लगभग 6.5-7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
डॉ. अनबलगन ने यह जानकारी दी कि भारत की कुल सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में उद्योग क्षेत्र का योगदान लगभग 20 प्रतिशत है, जबकि सेवा क्षेत्र का हिस्सा 53 प्रतिशत है। महाराष्ट्र में सेवा क्षेत्र का योगदान 63 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य के पास मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर होने के साथ-साथ सेवाओं के क्षेत्र में भी बड़ी ताकत है।
उन्होंने आगे बताया कि हाल ही में हुई मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा और फिनलैंड की सक्रिय भूमिका से दोनों देशों के बीच सहयोग और व्यापार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। वर्तमान में भारत से फिनलैंड को लगभग 413 मिलियन डॉलर का निर्यात होता है, जबकि आयात करीब 800 मिलियन डॉलर है।
डॉ. अनबलगन ने कहा कि नए दृष्टिकोण के तहत इन आंकड़ों को कम से कम दोगुना करने की आवश्यकता है। महाराष्ट्र जैसे राज्य, जहां कुल निर्यात करीब 70 अरब डॉलर है, वहां फिनलैंड के साथ व्यापार के आंकड़े अभी भी सीमित हैं, लेकिन इसमें काफी संभावनाएं हैं।
बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई, जिनमें डिजिटाइजेशन, क्वांटम टेक्नोलॉजी, 5जी और 6जी नेटवर्क, सतत विकास और सर्कुलर इकोनॉमी शामिल हैं।
डॉ. अनबलगन ने बताया कि एक बड़ी फिनिश कंपनी के साथ वर्जिन फाइबर प्रोजेक्ट पर बातचीत चल रही है। इस परियोजना के तहत पुराने कपड़ों या कपड़ा कचरे से नया फाइबर तैयार किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के पूर्वी हिस्से में लगभग 1.5 अरब डॉलर के निवेश के साथ स्थापित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में फिक्की इकोनॉमिस्ट फोरम के सह-अध्यक्ष सच्चिदानंद शुक्ला ने कहा कि जनवरी में भारत और यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते की दिशा में प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चल रही बातचीत अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है।
उन्होंने बताया कि इस समझौते से लगभग 2 अरब लोगों का बाजार, वैश्विक जीडीपी का करीब 25 प्रतिशत और लगभग 24 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार जुड़ेगा।
फिनलैंड के रोजगार मंत्री मटियास मार्टिनेन ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति बहुत प्रभावशाली रही है और फिनलैंड सरकार इस उपलब्धि की सराहना करती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और फिनलैंड के बीच साझेदारी भविष्य में और मजबूत होगी।
मार्टिनेन ने यह भी बताया कि हाल ही में दोनों देशों के बीच मोबिलिटी से जुड़ा एक समझौता (एमओयू) भी साइन किया गया है, जो दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू करेगा।
उन्होंने कहा कि कौशल, उद्योग, रोजगार, व्यापार और तकनीक जैसे क्षेत्रों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। इन सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से ही भारत और फिनलैंड के रिश्ते भविष्य में और मजबूत होंगे।
मार्टिनेन ने कहा कि भारत और फिनलैंड लंबे समय से अच्छे मित्र रहे हैं और उनकी इस यात्रा के दौरान हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों से आने वाले वर्षों में तकनीकी, व्यापार, कौशल विकास और उद्योग के क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होने की उम्मीद है।