असम में 1,250 वर्ग किमी अतिक्रमित भूमि वापस लेगी सरकार: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का संकल्प

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असम में 1,250 वर्ग किमी अतिक्रमित भूमि वापस लेगी सरकार: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का संकल्प

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 1,250 वर्ग किमी से अधिक अतिक्रमित भूमि वापस लेने का संकल्प दोहराया है — जेसीबी पहले ही मैदान में उतर चुकी हैं। यह एनडीए 3.0 के नए कार्यकाल का पहला बड़ा ज़मीनी संदेश है, जिसमें 'जाति, माटी, भेती' की राजनीति केंद्र में है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 17 मई 2026 को घोषणा की कि एनडीए 3.0 सरकार 1,250 वर्ग किलोमीटर से अधिक अतिक्रमित भूमि वापस लेगी।
सरकार पहले ही 1.5 लाख बीघा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करा चुकी है; नए कार्यकाल में 5 लाख और बीघा मुक्त कराने का लक्ष्य।
सीएम सरमा ने एक्स पर वीडियो साझा किया जिसमें जेसीबी मशीनें ग्रामीण पहाड़ी इलाके में ढाँचे ध्वस्त करती दिखीं।
'जाति, माटी, भेती' — समुदाय, भूमि और मातृभूमि — का नारा BJP के राजनीतिक एजेंडे का केंद्र बना हुआ है।
सरमा ने असम में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 17 मई 2026 को घोषणा की कि एनडीए 3.0 सरकार राज्यभर में 1,250 वर्ग किलोमीटर से अधिक अतिक्रमित भूमि को पुनः प्राप्त करने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वादे को अमल में लाने के लिए ज़मीनी स्तर पर कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'एनडीए 3.0 असम में 1,250 वर्ग किलोमीटर से अधिक अतिक्रमित भूमि को पुनः प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस वादे को पूरा करने के लिए हमारी टीम पहले से ही जमीन पर काम कर रही है।' उन्होंने इस पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें पीले रंग की जेसीबी मशीनें ढाँचों को ध्वस्त करती और लकड़ी व टिन-शेड के मलबे को हटाती नज़र आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई किसी ग्रामीण पहाड़ी इलाके में चल रही थी।

पिछले अभियान की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब सरमा सरकार पहले ही 1.5 लाख बीघा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करा चुकी है। 11 मई को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से एक दिन पहले सरमा ने घोषणा की थी कि नए कार्यकाल में 5 लाख और बीघा जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा। उन्होंने तब कहा था, 'असम की जमीन, पहचान और भविष्य पर कोई समझौता नहीं होगा।'

गौरतलब है कि 'जाति, माटी, भेती' — यानी समुदाय, भूमि और मातृभूमि — का नारा असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रहा है, खासकर भूमि अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर।

समान नागरिक संहिता पर प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री सरमा ने असम में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, 'यूसीसी हमारे चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा है। इसलिए सिर्फ यूसीसी ही नहीं, बल्कि घोषणा पत्र में किए गए हर वादे को हम 100 प्रतिशत लागू करने की कोशिश करेंगे।' प्रस्तावित UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानूनी ढाँचा लागू करना है।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

सरमा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब BJP शासित राज्यों में UCC लागू किए जाने को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान का असर विशेष समुदायों पर असमान रूप से पड़ता है, जबकि सरकार का तर्क है कि यह कार्रवाई धर्म-निरपेक्ष और कानून-सम्मत है।

आगे क्या होगा

सरकार के अनुसार अतिक्रमण विरोधी अभियान आने वाले महीनों में और तेज किया जाएगा। 5 लाख बीघा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का लक्ष्य एनडीए 3.0 के नए कार्यकाल की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बताया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

माटी, भेती' का नारा असम की पहचान-राजनीति में गहरी पैठ रखता है। लेकिन सवाल यह है कि 1,250 वर्ग किमी की वापसी का लक्ष्य किस समयसीमा में और किस कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरा होगा — इसका कोई स्पष्ट खाका अभी तक सामने नहीं आया है। पिछले कार्यकाल में अतिक्रमण हटाओ अभियान पर अदालतों में भी सवाल उठे थे और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की स्थिति अस्पष्ट रही। UCC की प्रतिबद्धता दोहराना एक साथ दो बड़े विवादास्पद मुद्दों को उठाना है — जो चुनावी वादे के रूप में प्रभावी हैं, लेकिन क्रियान्वयन में जटिल।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम सरकार का 1,250 वर्ग किमी भूमि वापसी अभियान क्या है?
यह एनडीए 3.0 सरकार का वह संकल्प है जिसके तहत असम में अवैध रूप से कब्जाई गई 1,250 वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि को चरणबद्ध तरीके से मुक्त कराया जाएगा। मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार जमीनी स्तर पर कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है।
असम में अब तक कितनी भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई जा चुकी है?
सरकार के अनुसार पिछले कार्यकाल में 1.5 लाख बीघा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। नए कार्यकाल में 5 लाख और बीघा मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया है।
'जाति, माटी, भेती' नारे का क्या अर्थ है?
'जाति, माटी, भेती' का अर्थ है — समुदाय, भूमि और मातृभूमि। यह नारा असम में BJP सरकार के राजनीतिक संदेश का प्रमुख हिस्सा है, खासकर भूमि अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर।
असम में समान नागरिक संहिता (UCC) कब लागू होगी?
मुख्यमंत्री सरमा ने UCC लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई है और इसे चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा बताया है। हालाँकि कोई निश्चित समयसीमा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
अतिक्रमण हटाओ अभियान से कौन प्रभावित होता है?
यह अभियान उन लोगों को प्रभावित करता है जिन्होंने सरकारी या वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किया है। आलोचकों का कहना है कि इसका असर विशेष समुदायों पर असमान रूप से पड़ता है, जबकि सरकार इसे धर्म-निरपेक्ष और कानून-सम्मत बताती है।
राष्ट्र प्रेस
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