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असम CM हिमंत बिस्वा सरमा का संकल्प: जंगलों को अतिक्रमण-मुक्त करेंगे, जीरो पोचिंग का लक्ष्य

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असम CM हिमंत बिस्वा सरमा का संकल्प: जंगलों को अतिक्रमण-मुक्त करेंगे, जीरो पोचिंग का लक्ष्य

सारांश

जैव विविधता दिवस पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर संकल्प लिया — काजीरंगा से मानस तक, जंगलों को अतिक्रमण-मुक्त करना और जीरो पोचिंग हासिल करना राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 22 मई 2025 को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर जीरो पोचिंग और वन-संरक्षण का संकल्प दोहराया।
सरमा ने एक्स पर काजीरंगा , देहिंग पटकाई , मानस राष्ट्रीय उद्यान और मागुरी बील को असम की जैव विविधता का प्रतीक बताया।
राज्य सरकार ने आरक्षित वन क्षेत्रों में अतिक्रमण-विरोधी अभियान तेज किए हैं; काजीरंगा में गैंडों के अवैध शिकार में उल्लेखनीय कमी दर्ज।
असम में एक सींग वाले गैंडे , रॉयल बंगाल टाइगर , एशियाई हाथी और हुलॉक गिब्बन सहित कई लुप्तप्राय प्रजातियाँ निवास करती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार जीरो पोचिंग लक्ष्य के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी और दीर्घकालिक वित्त पोषण आवश्यक होगा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 22 मई 2025 को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर राज्य सरकार की वन-संरक्षण और अवैध शिकार-उन्मूलन की प्रतिबद्धता को सार्वजनिक रूप से दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि असम के जंगलों को अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त कराना और जीरो पोचिंग का लक्ष्य हासिल करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "हमारा असम, जो हरे-भरे जंगलों, दुर्लभ वन्यजीवों और अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, वास्तव में प्रकृति का वरदान है। प्रतिष्ठित काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लेकर देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों तक और मानस राष्ट्रीय उद्यान से लेकर मागुरी बील तक, हमारी यह धरती जैव विविधता के एक समृद्ध खजाने से घिरी हुई है।"

उन्होंने आगे लिखा, "अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के इस विशेष अवसर पर हम अपनी जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में और भी अधिक दृढ़ संकल्प के साथ काम करने की प्रतिबद्धता दोहराते हैं। हम अपने जंगलों को अतिक्रमण से मुक्त कराने और एक ऐसे असम के निर्माण के प्रयासों में अडिग हैं, जहाँ अवैध शिकार पूरी तरह समाप्त हो।"

असम की जैव विविधता: एक अमूल्य धरोहर

असम विश्व-मान्यता प्राप्त वन्यजीव आवासों और राष्ट्रीय उद्यानों का घर है। यह राज्य एक सींग वाले गैंडे, रॉयल बंगाल टाइगर, जंगली भैंसे, एशियाई हाथी और हुलॉक गिब्बन सहित अनेक लुप्तप्राय प्रजातियों का प्राकृतिक आश्रय स्थल है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर जैव विविधता पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

अतिक्रमण-विरोधी अभियान और निगरानी

राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में आरक्षित वन क्षेत्रों और वन्यजीव अभयारण्यों में अतिक्रमण हटाने के अभियानों को तेज किया है। सरकार के अनुसार इन उपायों का उद्देश्य पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को अवैध कब्जे से बचाना है। अधिकारियों ने राष्ट्रीय उद्यानों — विशेष रूप से काजीरंगा में — निगरानी और अवैध शिकार-रोधी अभियानों को भी मजबूत किया है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में गैंडों के अवैध शिकार के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का महत्व

प्रतिवर्ष 22 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस दुनिया भर में पारिस्थितिकी तंत्र, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है। गौरतलब है कि यह दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित किया गया है और भारत सहित विश्व के अनेक देश इस अवसर पर संरक्षण संकल्पों को नवीनीकृत करते हैं।

आगे की राह

मुख्यमंत्री सरमा की यह घोषणा असम में वन-नीति के क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक प्रतिबद्धता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीरो पोचिंग के लक्ष्य को टिकाऊ बनाने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी और दीर्घकालिक वित्त पोषण दोनों आवश्यक होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पारिस्थितिकी संरक्षण बनाम आजीविका के जटिल संतुलन को रेखांकित करती हैं। काजीरंगा में पोचिंग में कमी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन जीरो पोचिंग एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है जिसे केवल निगरानी नहीं, बल्कि सामुदायिक साझेदारी और न्यायसंगत पुनर्वास नीति से ही टिकाऊ बनाया जा सकता है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जैव विविधता दिवस पर क्या संकल्प लिया?
मुख्यमंत्री सरमा ने 22 मई 2025 को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर असम के जंगलों को अतिक्रमण-मुक्त करने और जीरो पोचिंग का लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने एक्स पर काजीरंगा, मानस और देहिंग पटकाई जैसे राष्ट्रीय उद्यानों को असम की जैव विविधता का प्रतीक बताया।
असम में किन लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण किया जा रहा है?
असम एक सींग वाले गैंडे, रॉयल बंगाल टाइगर, जंगली भैंसे, एशियाई हाथी और हुलॉक गिब्बन सहित कई लुप्तप्राय प्रजातियों का प्राकृतिक आश्रय स्थल है। ये प्रजातियाँ काजीरंगा, मानस और देहिंग पटकाई जैसे राष्ट्रीय उद्यानों में पाई जाती हैं।
काजीरंगा में अवैध शिकार की स्थिति क्या है?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पिछले कुछ वर्षों में गैंडों के अवैध शिकार के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। राज्य सरकार ने निगरानी और अवैध शिकार-रोधी अभियानों को मजबूत किया है।
असम में वन अतिक्रमण हटाने के अभियान कब से चल रहे हैं?
राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में आरक्षित वन क्षेत्रों और वन्यजीव अभयारण्यों में अतिक्रमण हटाने के अभियान तेज किए हैं। सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को अवैध कब्जे से बचाना है।
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस प्रतिवर्ष 22 मई को मनाया जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित दिवस है, जिसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के महत्व के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस
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