राम मंदिर ट्रस्ट भंग करने की माँग: अजय राय बोले — शंकराचार्यों और अयोध्या प्रतिनिधियों को मिले जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 6 जुलाई 2026 को राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए माँग की कि मौजूदा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर एक नई प्रबंधन व्यवस्था बनाई जाए। उनके अनुसार, नई व्यवस्था में चारों पीठों के शंकराचार्यों, प्रमुख धर्माचार्यों और अयोध्या के स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। इस बातचीत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता हन्नान मोल्लाह ने भी अग्निवीर योजना और उत्तर प्रदेश की राजनीति पर अपनी राय रखी।
चढ़ावा विवाद और ट्रस्ट पर उठे सवाल
अजय राय ने कहा, 'ट्रस्ट से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद लोगों का विश्वास प्रभावित हुआ है। संबंधित पदाधिकारी का इस्तीफा स्वीकार किया जाना इस बात का संकेत है कि मामले में गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में कई लोग शामिल हैं और इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि यदि मंदिर से जुड़े मामलों में व्यापक स्तर पर जाँच कराई जाए तो कई अनियमितताएँ सामने आ सकती हैं। उनके अनुसार, केवल चढ़ावे ही नहीं, बल्कि भूमि से जुड़े मामलों की भी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
नई व्यवस्था की माँग
राय ने स्पष्ट किया, 'हमारी पार्टी को मौजूदा ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भरोसा नहीं है। हमारी माँग है कि राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर नई व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें चारों पीठों के शंकराचार्यों, प्रमुख धर्माचार्यों और अयोध्या के स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। इससे श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा स्थापित हो सकेगा।' यह माँग ऐसे समय में आई है जब चढ़ावा प्रबंधन को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार और ट्रस्ट पर दबाव बना रहा है।
भाजपा और राम मंदिर पर सीपीआई(एम) का रुख
सीपीआई(एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान अयोध्या न जाने के मुद्दे पर कहा, 'भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। भाजपा ने राम मंदिर के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाया है और अब ऐसे मामलों पर जनता स्वाभाविक रूप से सवाल उठा रही है।'
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भाजपा सरकार बनने के दावों पर मोल्लाह ने कहा कि राजनीतिक दलों के नेता अपने-अपने दावे करते रहते हैं, लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है।
अग्निवीर योजना पर विरोध जारी
अग्निवीर योजना में संभावित बदलाव के संकेतों पर मोल्लाह ने कहा कि उनकी पार्टी ने शुरुआत से ही इस योजना का विरोध किया था। उनके अनुसार, चार वर्ष की सेवा अवधि सैनिकों और सेना, दोनों के हित में नहीं है, क्योंकि पहले सैनिकों को लंबी अवधि तक प्रशिक्षण और सेवा का अवसर मिलता था, जिससे सेना की क्षमता मज़बूत होती थी।
मोल्लाह ने यह भी कहा कि चार साल की सेवा के बाद बड़ी संख्या में युवाओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा होती है। यदि सरकार अब इस योजना में बदलाव कर लंबे समय तक सेवा का प्रावधान करने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने इसे सकारात्मक कदम बताया और कहा कि अनुभव के आधार पर सरकार को इस योजना की समीक्षा करनी चाहिए।
गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट और चढ़ावा प्रबंधन का यह विवाद आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति को और गरमा सकता है, खासकर जब विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं।