अजय राय का BJP पर हमला: 'राम मंदिर चढ़ावा चोरी में SIT सिर्फ क्लीन चिट देने का जरिया'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने 20 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में अयोध्या के श्रीराम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जाँच कर रही विशेष जाँच दल (SIT) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस मामले में अब तक एफआईआर ही दर्ज नहीं हुई, तो SIT की जाँच का वास्तविक उद्देश्य क्या है।
चढ़ावा चोरी मामले में SIT पर सवाल
अजय राय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता पहले भगवान राम के नाम पर चंदा बटोरते थे और अब अयोध्या में जमीन हड़पने के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस पार्टी दान करती है, इनकी तरह चढ़ावा चोरी नहीं करती।' उनके अनुसार SIT का गठन संदिग्ध अधिकारियों को क्लीन चिट देने के लिए किया गया है।
राय ने विशेष रूप से SIT सदस्य विजय विश्वास पंत का उल्लेख किया, जो प्रयागराज में कमिश्नर के पद पर तैनात थे जब वहाँ भगदड़ की घटना हुई थी। उनका सवाल था कि जिस अधिकारी के खिलाफ स्वयं जाँच चल रही है, उसे SIT में शामिल करना किस तर्क से उचित है।
योगी सरकार पर निशाना
अजय राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बाद मंदिर पहुँचे। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई और जाँच की बातें महज दिखावा हैं और इनका मकसद जनता को भ्रमित करना है। उनके अनुसार, बिना एफआईआर के SIT की जाँच कानूनी रूप से खोखली है।
NEET री-एग्जाम पर कांग्रेस की आपत्ति
प्रेस वार्ता में अजय राय ने NEET री-एग्जाम की व्यवस्था पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर की एक छात्रा को परीक्षा के लिए देहरादून और नागपुर के एक छात्र को अबू धाबी भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि परीक्षा संचालन के लिए सेना की मदद लेनी पड़ रही है, जो व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है।
राय ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि 2018 से 2026 के बीच NEET सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की घटनाएँ लगातार हुई हैं, फिर भी मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी नहीं ली। उन्होंने बताया कि हालिया NEET पेपर लीक से उपजे मानसिक तनाव के कारण देशभर में 12 छात्रों की जान जा चुकी है।
शिक्षा तंत्र और परीक्षा बजट
अजय राय ने आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश के पाँच प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अभिभावक प्रतिवर्ष ₹3.5 लाख करोड़ खर्च करते हैं — जो देश के पाँच प्रमुख मंत्रालयों के संयुक्त बजट के बराबर है। इसके बावजूद मौजूदा शिक्षा तंत्र एक हजार में से केवल 12 छात्रों को सरकारी नौकरी दे पाता है।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों और अभिभावकों की इस पीड़ा को आवाज देने के लिए 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया है, जो संसद से सड़क तक चलाया जाएगा।
आगे क्या
अयोध्या चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज होगी या नहीं, यह अभी अनिश्चित है। कांग्रेस के इस दबाव के बाद सरकार की प्रतिक्रिया और SIT की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हैं। NEET री-एग्जाम की तारीखें और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था को लेकर विवाद जारी रहने की संभावना है।