11 अगस्त 2026
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अजय राय का BJP पर हमला: 'राम मंदिर चढ़ावा चोरी में SIT सिर्फ क्लीन चिट देने का जरिया'

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अजय राय का BJP पर हमला: 'राम मंदिर चढ़ावा चोरी में SIT सिर्फ क्लीन चिट देने का जरिया'

सारांश

UP कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी की SIT जाँच को बिना FIR के महज 'क्लीन चिट देने का जरिया' बताया। साथ ही NEET पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग करते हुए कहा कि ₹3.5 लाख करोड़ खर्च के बावजूद यह तंत्र 1,000 में से सिर्फ 12 को नौकरी दे पाता है।

मुख्य बातें

अजय राय ने 20 जून 2026 को लखनऊ में प्रेस वार्ता कर अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की SIT की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
राय के अनुसार बिना एफआईआर दर्ज हुए SIT की जाँच का कोई कानूनी आधार नहीं है।
SIT सदस्य विजय विश्वास पंत पर आरोप — जो प्रयागराज भगदड़ के समय वहाँ के कमिश्नर थे — को जाँच दल में शामिल करने पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई।
NEET री-एग्जाम में भुवनेश्वर की छात्रा को देहरादून और नागपुर के छात्र को अबू धाबी भेजे जाने की व्यवस्था पर राय ने सवाल उठाए।
NEET पेपर लीक से जुड़े मानसिक तनाव के कारण देशभर में 12 छात्रों की मौत का हवाला देते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर अभिभावक सालाना ₹3.5 लाख करोड़ खर्च करते हैं, फिर भी तंत्र 1,000 में से 12 को ही नौकरी दे पाता है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने 20 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में अयोध्या के श्रीराम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जाँच कर रही विशेष जाँच दल (SIT) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस मामले में अब तक एफआईआर ही दर्ज नहीं हुई, तो SIT की जाँच का वास्तविक उद्देश्य क्या है।

चढ़ावा चोरी मामले में SIT पर सवाल

अजय राय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता पहले भगवान राम के नाम पर चंदा बटोरते थे और अब अयोध्या में जमीन हड़पने के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस पार्टी दान करती है, इनकी तरह चढ़ावा चोरी नहीं करती।' उनके अनुसार SIT का गठन संदिग्ध अधिकारियों को क्लीन चिट देने के लिए किया गया है।

राय ने विशेष रूप से SIT सदस्य विजय विश्वास पंत का उल्लेख किया, जो प्रयागराज में कमिश्नर के पद पर तैनात थे जब वहाँ भगदड़ की घटना हुई थी। उनका सवाल था कि जिस अधिकारी के खिलाफ स्वयं जाँच चल रही है, उसे SIT में शामिल करना किस तर्क से उचित है।

योगी सरकार पर निशाना

अजय राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बाद मंदिर पहुँचे। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई और जाँच की बातें महज दिखावा हैं और इनका मकसद जनता को भ्रमित करना है। उनके अनुसार, बिना एफआईआर के SIT की जाँच कानूनी रूप से खोखली है।

NEET री-एग्जाम पर कांग्रेस की आपत्ति

प्रेस वार्ता में अजय राय ने NEET री-एग्जाम की व्यवस्था पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर की एक छात्रा को परीक्षा के लिए देहरादून और नागपुर के एक छात्र को अबू धाबी भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि परीक्षा संचालन के लिए सेना की मदद लेनी पड़ रही है, जो व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है।

राय ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि 2018 से 2026 के बीच NEET सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की घटनाएँ लगातार हुई हैं, फिर भी मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी नहीं ली। उन्होंने बताया कि हालिया NEET पेपर लीक से उपजे मानसिक तनाव के कारण देशभर में 12 छात्रों की जान जा चुकी है।

शिक्षा तंत्र और परीक्षा बजट

अजय राय ने आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश के पाँच प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अभिभावक प्रतिवर्ष ₹3.5 लाख करोड़ खर्च करते हैं — जो देश के पाँच प्रमुख मंत्रालयों के संयुक्त बजट के बराबर है। इसके बावजूद मौजूदा शिक्षा तंत्र एक हजार में से केवल 12 छात्रों को सरकारी नौकरी दे पाता है।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों और अभिभावकों की इस पीड़ा को आवाज देने के लिए 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया है, जो संसद से सड़क तक चलाया जाएगा।

आगे क्या

अयोध्या चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज होगी या नहीं, यह अभी अनिश्चित है। कांग्रेस के इस दबाव के बाद सरकार की प्रतिक्रिया और SIT की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हैं। NEET री-एग्जाम की तारीखें और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था को लेकर विवाद जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनकी असली धार कानूनी प्रक्रिया के सवाल में है — बिना एफआईआर के SIT का गठन वाकई असामान्य है और इस पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब अभी तक नहीं आया है। विजय विश्वास पंत का SIT में शामिल होना एक ऐसा तथ्य है जिसे सरकार को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए। NEET मामले में ₹3.5 लाख करोड़ के खर्च का आँकड़ा चौंकाने वाला है, पर इसका स्रोत अज्ञात है — मीडिया को इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना चाहिए। कुल मिलाकर, यह प्रेस वार्ता दो असंबंधित मुद्दों को एक साथ उठाने की कोशिश है, जो कांग्रेस की रणनीतिक मंशा तो दर्शाती है, पर दोनों मुद्दों पर गहरी जवाबदेही की माँग को कमजोर भी कर सकती है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT पर क्या विवाद है?
कांग्रेस का आरोप है कि इस मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, इसलिए SIT की जाँच का कोई कानूनी आधार नहीं है। UP कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने यह भी कहा कि SIT में शामिल अधिकारी विजय विश्वास पंत खुद जाँच के दायरे में होने चाहिए, क्योंकि वे प्रयागराज भगदड़ के समय वहाँ के कमिश्नर थे।
अजय राय ने NEET री-एग्जाम की व्यवस्था पर क्या आपत्ति जताई?
अजय राय ने कहा कि भुवनेश्वर की एक छात्रा को देहरादून और नागपुर के एक छात्र को अबू धाबी में परीक्षा देने भेजा जा रहा है, जो व्यवस्था की गंभीर खामी दर्शाता है। उन्होंने परीक्षा संचालन में सेना की मदद लिए जाने को भी सरकारी विफलता का प्रतीक बताया।
कांग्रेस धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों माँग रही है?
कांग्रेस का कहना है कि 2018 से 2026 के बीच NEET सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लगातार लीक हुए हैं और इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं दिया। पेपर लीक से उपजे तनाव के कारण 12 छात्रों की मौत का हवाला देते हुए कांग्रेस यह माँग कर रही है।
'छात्रों की गूंज' अभियान क्या है?
यह कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा शुरू किया गया अभियान है, जिसका उद्देश्य NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक से पीड़ित छात्रों और अभिभावकों की आवाज को संसद से सड़क तक उठाना है। अजय राय के अनुसार यह अभियान उस व्यापक संकट की ओर ध्यान दिलाता है जिसमें ₹3.5 लाख करोड़ के खर्च के बावजूद 1,000 में से केवल 12 छात्रों को सरकारी नौकरी मिल पाती है।
विजय विश्वास पंत कौन हैं और उनका SIT से जुड़ाव क्यों विवादास्पद है?
विजय विश्वास पंत एक वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं जो प्रयागराज भगदड़ के समय वहाँ के मंडलायुक्त (कमिश्नर) थे। अजय राय का आरोप है कि उस घटना के बाद उनके खिलाफ जाँच चल रही है, फिर भी उन्हें राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की SIT में शामिल किया गया है, जो SIT की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
राष्ट्र प्रेस
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