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पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर PM मोदी का नमन, अंत्योदय विचारधारा को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार

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पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर PM मोदी का नमन, अंत्योदय विचारधारा को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार

सारांश

दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर PM मोदी ने एक्स पर उन्हें नमन किया और अंत्योदय की विचारधारा को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। साथ में योगवासिष्ठ का पुरुषार्थ-केंद्रित श्लोक साझा कर 'सुभाषितम्' शृंखला को आगे बढ़ाया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2026 को पं.
दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर एक्स पोस्ट के ज़रिए श्रद्धांजलि अर्पित की।
मोदी ने अंत्योदय की विचारधारा को जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण का मूल आधार बताया।
प्रधानमंत्री ने योगवासिष्ठ के द्वितीय प्रकरण से पुरुषार्थ पर आधारित संस्कृत श्लोक साझा किया।
यह पोस्ट मोदी की नियमित सुभाषितम् शृंखला का हिस्सा है, जिसमें प्राचीन भारतीय ग्रंथों से श्लोक साझा किए जाते हैं।
एक दिन पहले गुरुवार को मोदी ने सत्य और हितकारी वाणी पर केंद्रित एक अन्य संस्कृत श्लोक साझा किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2026 को भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें सादर नमन किया। एक्स पर साझा की गई अपनी पोस्ट में मोदी ने अंत्योदय की विचारधारा को जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण का मूल आधार बताया।

मोदी का श्रद्धांजलि संदेश

प्रधानमंत्री ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'राष्ट्रसेवा के सच्चे साधक पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का आधार माना और अंत्योदय की एक ऐसी विचारधारा दी, जिससे आज भी जनकल्याण की अद्भुत प्रेरणा मिलती है। आइए, इस विशेष अवसर पर उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने का संकल्प दोहराएं।'

योगवासिष्ठ का संस्कृत श्लोक

अपनी पोस्ट के साथ प्रधानमंत्री ने योगवासिष्ठ ग्रंथ से एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया — 'यथा यथा प्रयत्नः स्याद्भवेदाशु फलं तथा। इति पौरुषमेवास्ति दैवमस्तु तदेव च॥' इस श्लोक का भाव यह है कि मनुष्य जितना अधिक पुरुषार्थ और प्रयास करता है, उतनी ही शीघ्र सफलता मिलती है। अर्थात् केवल भाग्य नहीं, बल्कि कर्म, साहस और नए विचारों को साकार करने का पुरुषार्थ ही सफलता और नवाचार का मार्ग प्रशस्त करता है।

यह श्लोक योगवासिष्ठ के द्वितीय प्रकरण (मुमुक्षुव्यवहारप्रकरणम्) के छठे सर्ग का दूसरा श्लोक है। यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य में अद्वैत वेदान्त का विशाल ग्रंथ माना जाता है। परंपरा के अनुसार इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि माने जाते हैं, किंतु वास्तविक सिद्धांत वशिष्ठ का है और वाल्मीकि इसके संकलनकर्ता हैं।

पं. दीनदयाल उपाध्याय और अंत्योदय

पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपनी 'एकात्म मानववाद' की विचारधारा में समाज के सबसे निर्बल व्यक्ति के उत्थान को विकास का पैमाना माना था। उनकी 'अंत्योदय' की अवधारणा आज भी केंद्र सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं की नींव के रूप में उद्धृत की जाती है। गौरतलब है कि हर वर्ष 25 सितंबर को उनकी जयंती पर केंद्र और राज्य स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

सुभाषितम् शृंखला में पिछला श्लोक

इससे एक दिन पूर्व, गुरुवार को, प्रधानमंत्री ने अपनी 'सुभाषितम्' शृंखला में एक और संस्कृत श्लोक साझा किया था — 'अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्। स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते॥' इसका भाव है कि मनुष्य को सदैव ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो सत्य, प्रिय और हितकारी हो तथा किसी के मन में अशांति न उत्पन्न करे। सद्ग्रंथों का निरंतर स्वाध्याय और चिंतन ही वाणी को वास्तविक सार्थकता प्रदान करता है।

आगे क्या

प्रधानमंत्री मोदी की यह 'सुभाषितम्' शृंखला नियमित रूप से जारी है, जिसमें वे प्राचीन भारतीय ग्रंथों से प्रेरक श्लोक साझा करते हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर इस श्लोक का चयन उनकी कर्मशीलता की विचारधारा से सीधे जुड़ता है, और संकेत देता है कि सरकार अंत्योदय की भावना को नीति-निर्माण के केंद्र में बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें BJP अपनी वैचारिक विरासत को नियमित रूप से जन-संवाद में बनाए रखती है। अंत्योदय का नारा आकर्षक है, लेकिन सवाल यह है कि योजनाओं के लाभार्थी डेटा में 'अंतिम पंक्ति का व्यक्ति' वास्तव में कितना प्रतिनिधित्व पाता है। योगवासिष्ठ के श्लोक का चयन कर्म-प्रधान संदेश देता है, जो सरकारी जवाबदेही की बजाय व्यक्तिगत पुरुषार्थ पर ज़ोर देता है — यह विभाजन मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पं. दीनदयाल उपाध्याय कौन थे और उनकी अंत्योदय विचारधारा क्या है?
पं. दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य और 'एकात्म मानववाद' के प्रणेता थे। उनकी अंत्योदय विचारधारा के अनुसार समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े सबसे निर्बल व्यक्ति का उत्थान ही वास्तविक राष्ट्र निर्माण का पैमाना है।
PM मोदी ने दीनदयाल जयंती पर कौन-सा श्लोक साझा किया?
PM मोदी ने योगवासिष्ठ के द्वितीय प्रकरण के छठे सर्ग से श्लोक 'यथा यथा प्रयत्नः स्याद्भवेदाशु फलं तथा...' साझा किया। इसका भाव है कि पुरुषार्थ और कर्म से ही सफलता मिलती है, केवल भाग्य पर निर्भर रहने से नहीं।
योगवासिष्ठ ग्रंथ क्या है?
योगवासिष्ठ संस्कृत साहित्य का एक विशाल अद्वैत वेदान्त ग्रंथ है। परंपरानुसार इसके संकलनकर्ता महर्षि वाल्मीकि माने जाते हैं, जबकि इसका मूल सिद्धांत महर्षि वशिष्ठ से जुड़ा है। इसमें जगत् की असत्ता और परमात्मसत्ता का विभिन्न दृष्टांतों द्वारा प्रतिपादन है।
मोदी की 'सुभाषितम्' शृंखला क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी की 'सुभाषितम्' शृंखला उनकी नियमित एक्स पोस्ट का हिस्सा है, जिसमें वे प्राचीन भारतीय ग्रंथों से प्रेरक संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित साझा करते हैं। इसी शृंखला में 24 सितंबर को सत्य और हितकारी वाणी पर आधारित श्लोक साझा किया गया था।
दीनदयाल उपाध्याय जयंती कब मनाई जाती है?
पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती प्रतिवर्ष 25 सितंबर को मनाई जाती है। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करती हैं और BJP सहित उनसे जुड़े संगठन उनकी विचारधारा को स्मरण करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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