13 जुलाई 2026
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रामलला के चढ़ावे का दुरुपयोग: अजय राय ने राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर धर्माचार्यों को सौंपने की मांग की

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रामलला के चढ़ावे का दुरुपयोग: अजय राय ने राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर धर्माचार्यों को सौंपने की मांग की

सारांश

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने राम मंदिर दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ट्रस्ट भंग करने की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि BJP-RSS से जुड़े लोगों ने रामलला के चढ़ावे, चंदे और जमीन में घोटाले किए — और मंदिर का संचालन धर्माचार्यों को सौंपा जाना चाहिए।

मुख्य बातें

अजय राय ने 13 जुलाई 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और RSS से जुड़े लोगों ने रामलला के चढ़ावे, चंदे और भूमि से संबंधित घोटाले किए।
राय ने मांग की कि मंदिर का संचालन चारों शंकराचार्यों , धर्माचार्यों और अयोध्या के परंपरागत पुजारी परिवारों को सौंपा जाए।
राम मंदिर के लिए CEO की नियुक्ति प्रक्रिया को उन्होंने 'मंदिर का व्यापारीकरण' बताया।
कांग्रेस नेता इमरान मसूद के सपा-कांग्रेस गठबंधन संबंधी बयान का राय ने समर्थन किया।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने 13 जुलाई 2026 को लखनऊ में अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग करने और मंदिर का संचालन चारों शंकराचार्यों, धर्माचार्यों तथा अयोध्या के परंपरागत पुजारी परिवारों को सौंपने की मांग की।

मुख्य आरोप: रामलला के चढ़ावे का दुरुपयोग

राय ने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर देशभर से आई आस्था और चढ़ावे का दुरुपयोग किया गया है। उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोगों ने भगवान राम के नाम पर चढ़ावे, चंदे और भूमि से संबंधित घोटाले किए हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम के नाम पर राजनीति कर सत्ता हासिल की, उन्हीं ने रामलला के दरबार को अपवित्र करने का काम किया। राय ने मांग की कि इस पूरे मामले में ट्रस्ट से जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच हो और उन्हें विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय इस पर कठोर निर्णय देगा।

सीईओ नियुक्ति पर आपत्ति: 'मंदिर का व्यापारीकरण'

राम मंदिर के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति हेतु आवेदन आमंत्रित किए जाने पर राय ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इस कदम से यह संदेश जाता है कि मंदिर के संचालन का व्यापारीकरण हो रहा है। उनके अनुसार, भगवान राम का दरबार आस्था का केंद्र है, न कि किसी व्यावसायिक संस्थान की तरह चलाया जाने वाला प्रतिष्ठान। उन्होंने मांग की कि वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर चारों शंकराचार्यों, धर्माचार्यों और उन परिवारों की देखरेख में नया ट्रस्ट गठित किया जाए जो पीढ़ियों से रामलला की सेवा से जुड़े हैं।

इमरान मसूद के बयान पर प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता इमरान मसूद के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस के बिना समाजवादी पार्टी (SP) उत्तर प्रदेश में 37 सीटें नहीं जीत सकती थी, राय ने मसूद को पार्टी का 'मजबूत और संघर्षशील नेता' बताया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि अंतिम निर्णय जनता करती है। गौरतलब है कि मसूद ने यह भी कहा था कि सपा ने कभी मुसलमानों की चिंता नहीं की — इस पर राय ने कोई सीधी टिप्पणी नहीं की।

कांग्रेस की ज़मीनी सक्रियता का दावा

राय ने कहा कि कांग्रेस हर सामाजिक और जनहित के मुद्दे पर सड़क पर उतरकर संघर्ष कर रही है। उन्होंने हाटा मस्जिद प्रकरण, मुगलसराय में मंदिर गिरने की घटना, बलिया की घटनाओं और मेरठ के ललिता गौतम प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी मामलों में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पीड़ितों के साथ खड़े रहे। राय ने दावा किया कि कांग्रेस का संगठन गाँव-गाँव और गली-गली तक मजबूत हो रहा है और कोई भी ताकत पार्टी को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

आगे क्या

सर्वोच्च न्यायालय में राम मंदिर दान चोरी मामले की सुनवाई जारी है और देश की जनता की नज़र इस पर बनी हुई है। राय के बयान से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर आगे उठाती रहेगी। ट्रस्ट के भविष्य और मंदिर प्रशासन के स्वरूप पर अदालत का अगला आदेश निर्णायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे महज राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि एक सुनियोजित कानूनी-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनाता है। राम मंदिर — जो BJP की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाती है — पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाना कांग्रेस के लिए दोधारी तलवार है: यह हिंदू मतदाताओं को संकेत देता है कि पार्टी 'आस्था की रक्षा' के पक्ष में है, लेकिन इसे सांप्रदायिक रंग देने का जोखिम भी है। ट्रस्ट भंग करने और धर्माचार्यों को नियंत्रण सौंपने की मांग व्यावहारिक रूप से जटिल है — सर्वोच्च न्यायालय ने ही इस ट्रस्ट की संरचना को मान्यता दी है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष इस मुद्दे को जवाबदेही की बहस बना पाएगा, या BJP इसे 'राम विरोधी' के रूप में पलट देगी।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजय राय ने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग क्यों की?
अजय राय का आरोप है कि रामलला के चढ़ावे, चंदे और भूमि से संबंधित घोटाले हुए हैं और ट्रस्ट से जुड़े कई लोग इसमें शामिल हैं। उनकी मांग है कि निष्पक्ष जांच के साथ-साथ ट्रस्ट भंग कर मंदिर का संचालन धर्माचार्यों और परंपरागत पुजारी परिवारों को सौंपा जाए।
राम मंदिर दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में हो रही है। इसी सुनवाई के बाद अजय राय ने 13 जुलाई 2026 को लखनऊ में यह बयान दिया और न्यायालय से कठोर फैसले की उम्मीद जताई।
राम मंदिर CEO नियुक्ति विवाद क्या है?
राम मंदिर के संचालन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। अजय राय ने इसे मंदिर का 'व्यापारीकरण' बताते हुए आपत्ति जताई और कहा कि भगवान राम का दरबार आस्था का केंद्र है, व्यावसायिक संस्था नहीं।
इमरान मसूद के बयान पर अजय राय ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा था कि कांग्रेस के बिना सपा यूपी में 37 सीटें नहीं जीत सकती थी। अजय राय ने मसूद को पार्टी का 'मजबूत और संघर्षशील नेता' बताया और कहा कि किसी भी दल को अहंकार नहीं करना चाहिए क्योंकि अंतिम फैसला जनता करती है।
राम मंदिर ट्रस्ट का भविष्य क्या होगा?
फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई जारी है और अदालत का अगला आदेश ट्रस्ट के भविष्य पर निर्णायक होगा। कांग्रेस ने ट्रस्ट भंग करने की मांग की है, लेकिन यह ट्रस्ट सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से ही गठित हुआ था, इसलिए कोई भी बदलाव न्यायिक प्रक्रिया से ही संभव होगा।
राष्ट्र प्रेस
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