राम मंदिर चढ़ावा विवाद: अजय राय ने PM को लिखा पत्र, फोरेंसिक जांच और वित्तीय ऑडिट की मांग
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 8 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र फोरेंसिक जांच एवं वित्तीय ऑडिट की मांग की है। राय का तर्क है कि जिस केंद्र सरकार ने मंदिर निर्माण, उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा को अपनी उपलब्धि बताया, उसे वित्तीय प्रबंधन पर उठ रहे सवालों का भी पारदर्शी जवाब देना चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
पूर्व मंत्री एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने अपने पत्र में कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में उपलब्धियों का श्रेय और संस्थागत जवाबदेही साथ-साथ चलते हैं — इसलिए मंदिर के चढ़ावे तथा प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवालों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
राय ने बताया कि इससे पहले वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी इसी विषय पर पत्र भेज चुके हैं, किंतु कथित तौर पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि सरकार के प्रतिनिधि मूल सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्ष पर राजनीतिक आरोप लगाने में लगे हैं, जिससे जनमानस में संदेह और गहरा हो रहा है।
जांच और जवाबदेही की मांग
अजय राय ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — स्वतंत्र फोरेंसिक जांच, वित्तीय ऑडिट और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही। उन्होंने कहा कि यदि लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं, तो स्वतंत्र जांच से यह स्वतः स्पष्ट हो जाएगा। वहीं, यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर से जुड़े ट्रस्ट पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि किसी अनियमितता की जानकारी सरकार को नहीं दी गई, तो यह दायित्व का उल्लंघन है, और यदि दी गई थी तो उस पर की गई कार्रवाई का सार्वजनिक जवाब आना चाहिए।
राष्ट्रीय धरोहर का तर्क
राय ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर किसी राजनीतिक दल या संगठन की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की धरोहर है। उनके अनुसार, मंदिर के प्रबंधन और पारदर्शिता पर सवाल उठाना दलीय विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय धरोहर की गरिमा की रक्षा का प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्न पूछने वालों को अपमानित करना लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप नहीं है।
प्रधानमंत्री से आग्रह
अजय राय ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि भगवान श्रीराम सत्य, न्याय और उत्तरदायित्व के प्रतीक हैं, इसलिए मंदिर से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच से ही संभव है। उन्होंने प्रधानमंत्री से स्वतंत्र फोरेंसिक एवं वित्तीय जांच के आदेश देने, दोषियों की जवाबदेही तय करने और मंदिर की पवित्रता को सर्वोपरि रखने का अनुरोध किया है। यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर और तेज़ होने की संभावना है।