राम मंदिर चढ़ावा विवाद: एसआईटी ने गृह विभाग को सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट, जांच अभी जारी
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित हेरफेरी और गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने 23 जून 2025 को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी। यह रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद को प्रस्तुत की गई है। हालांकि, जांच अभी पूरी नहीं हुई है और अंतिम रिपोर्ट बाद में शासन को सौंपी जाएगी।
एसआईटी का गठन और जांच का दायरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग के बाद इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था। इस टीम में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत (अध्यक्ष), लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नीलरतन को शामिल किया गया।
एसआईटी ने अयोध्या में छह दिनों तक रहकर मामले की गहन पड़ताल की। टीम ने मंदिर प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मियों, ट्रस्ट से संबद्ध लोगों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों सहित पाँच दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की।
जांच के प्रमुख बिंदु
एसआईटी ने चढ़ावे की गणना-प्रक्रिया, उसके रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था और कथित अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। टीम ने यह जानने का प्रयास किया कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धनराशि की गिनती, भंडारण और प्रबंधन में कहाँ-कहाँ चूक हुई। गौरतलब है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मंदिर में हेरफेरी के आरोप सामने आने के बाद यह मामला राज्य और देश भर में चर्चा का विषय बन गया था।
एसआईटी अध्यक्ष का बयान
विजय विश्वास पंत ने बताया कि एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक गोपनीय जांच है और फिलहाल केवल प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। जांच से जुड़े तथ्यों और निष्कर्षों को रिपोर्ट में शामिल कर शासन को अवगत कराया गया है।
पंत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच की कार्यवाही अभी जारी है और कई बिंदुओं पर पड़ताल की जा रही है। अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसे शासन को सौंपा जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्रतिष्ठा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित है। जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे की राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे प्रबंधन और निगरानी की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। कथित अनियमितताओं के आरोपों ने ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
आगे क्या होगा
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार आवश्यक कार्रवाई का निर्णय लेगी। जांच दल को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सामने लाने और उचित कार्रवाई के संबंध में शासन को सिफारिशें देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस मामले में आगे की कार्रवाई अंतिम रिपोर्ट के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।