अयोध्या चढ़ावा चोरी मामला: गृह विभाग ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपी एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितता प्रकरण में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश सहित विशेष जांच दल (एसआईटी) की फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट उस एसआईटी ने तैयार की थी जिसका गठन 13 जून 2026 को ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने किया था — और यह सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में हस्तक्षेप से पहले की कार्रवाई है।
एसआईटी का गठन और संरचना
लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित इस तीन सदस्यीय एसआईटी में आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। एसआईटी ने 23 जून 2026 को शासन को अपना प्रारंभिक प्रतिवेदन सौंपा था, जिसमें कई कठोर संस्तुतियाँ की गई थीं।
पहली एफआईआर और नामजद आरोपी
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून 2026 को इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज की गई। ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में दर्ज अपराध संख्या 90/2026 में 8 नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया। नामजद आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्रीराम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। आरोपियों के खिलाफ धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) बीएनएस तथा 13(1)(ए) पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
गौरतलब है कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की माँग करने वाली याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई थी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने जांच कर रही एसआईटी से स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब देश के सर्वाधिक चर्चित धार्मिक स्थलों में से एक की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या होगा
फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्धारित समयसीमा में आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल होने के बाद न्यायालय की अगली सुनवाई में इस मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।