18 अगस्त 2026
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अयोध्या चढ़ावा चोरी मामला: गृह विभाग ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपी एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट

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अयोध्या चढ़ावा चोरी मामला: गृह विभाग ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपी एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट

सारांश

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब निर्णायक मोड़ पर है — गृह विभाग ने ट्रस्ट को एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। 8 नामजद आरोपी, एक दर्ज एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट की नज़र — यह मामला देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थल की जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट आवश्यक कार्रवाई के निर्देश सहित सौंपी।
एसआईटी का गठन 13 जून 2026 को हुआ था; मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय दल बना।
25 जून 2026 को अपराध संख्या 90/2026 के तहत पहली एफआईआर दर्ज; 8 नामजद आरोपी।
आरोपियों पर धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) बीएनएस व 13(1)(ए) पीसी एक्ट के तहत मामला।
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने एसआईटी से स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितता प्रकरण में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश सहित विशेष जांच दल (एसआईटी) की फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट उस एसआईटी ने तैयार की थी जिसका गठन 13 जून 2026 को ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने किया था — और यह सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में हस्तक्षेप से पहले की कार्रवाई है।

एसआईटी का गठन और संरचना

लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित इस तीन सदस्यीय एसआईटी में आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। एसआईटी ने 23 जून 2026 को शासन को अपना प्रारंभिक प्रतिवेदन सौंपा था, जिसमें कई कठोर संस्तुतियाँ की गई थीं।

पहली एफआईआर और नामजद आरोपी

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून 2026 को इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज की गई। ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में दर्ज अपराध संख्या 90/2026 में 8 नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया। नामजद आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्रीराम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। आरोपियों के खिलाफ धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) बीएनएस तथा 13(1)(ए) पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका

गौरतलब है कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की माँग करने वाली याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई थी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने जांच कर रही एसआईटी से स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब देश के सर्वाधिक चर्चित धार्मिक स्थलों में से एक की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

आगे क्या होगा

फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्धारित समयसीमा में आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल होने के बाद न्यायालय की अगली सुनवाई में इस मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत विश्वसनीयता का सवाल भी हैं। एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट सौंपना एक प्रक्रियागत कदम है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि ट्रस्ट इस पर क्या ठोस कार्रवाई करता है और वह कार्रवाई सार्वजनिक होती है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट की सक्रिय निगरानी यह संकेत देती है कि न्यायपालिका इस मामले को महज प्रशासनिक विषय नहीं मानती। बिना पारदर्शी जवाबदेही के, करोड़ों श्रद्धालुओं के भरोसे की क्षति की भरपाई संभव नहीं।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट क्या है?
उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को एसआईटी की वह अंतिम रिपोर्ट सौंपी है जो अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बाद तैयार की गई थी। इस रिपोर्ट के साथ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
एसआईटी का गठन कब और क्यों हुआ?
एसआईटी का गठन 13 जून 2026 को ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने किया था। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में बनी इस तीन सदस्यीय टीम में आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार शामिल थे।
इस मामले में कितने लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई और किन धाराओं में?
25 जून 2026 को श्रीराम जन्मभूमि थाने में अपराध संख्या 90/2026 के तहत 8 नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आरोपियों पर धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) बीएनएस और 13(1)(ए) पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज है।
सुप्रीम कोर्ट की इस मामले में क्या भूमिका है?
सर्वोच्च न्यायालय में चढ़ावे की स्वतंत्र जांच की माँग वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एसआईटी से स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
अब आगे क्या होगा इस मामले में?
फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद ट्रस्ट को निर्धारित समयसीमा में आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल होने के बाद इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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