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राम मंदिर चढ़ावा मामला: एसआईटी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को दी क्लीन चिट, अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी

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राम मंदिर चढ़ावा मामला: एसआईटी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को दी क्लीन चिट, अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी

सारांश

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी ने पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है। दोनों ने 27 जून को इस्तीफा दिया था। अंतिम रिपोर्ट अब ट्रस्ट को सौंप दी गई है, जबकि आठ नामजद आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।

मुख्य बातें

एसआईटी ने चंपत राय (पूर्व महासचिव) और अनिल मिश्रा (पूर्व सदस्य) को राम मंदिर चढ़ावा मामले में क्लीन चिट दी।
उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने 18 अगस्त को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी।
दोनों अधिकारियों ने अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद 27 जून को पद से इस्तीफा दिया था।
25 जून को दर्ज एफआईआर में 8 नामजद आरोपी ; सभी को गिरफ्तार कर बीएनएस और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज।
तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने किया था।

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है। उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने सोमवार, 18 अगस्त को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए ट्रस्ट को सौंप दी।

मामले की पृष्ठभूमि

मंदिर में दान प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों ने 27 जून को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के बाद एसआईटी ने दोनों से दान संग्रह और प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं के संबंध में विस्तृत पूछताछ की।

यह ऐसे समय में आया है जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था — यह पैनल सर्वोच्च न्यायालय के किसी हस्तक्षेप से पूर्व ही बना दिया गया था।

एसआईटी की संरचना और जांच प्रक्रिया

लखनऊ संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत ने जांच दल का नेतृत्व किया। रेंज के पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार पैनल के अन्य सदस्य रहे। एसआईटी ने 23 जून को राज्य सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कई सिफारिशें शामिल थीं।

चंपत राय का पक्ष

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान चंपत राय ने कथित अनियमितताओं में किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया। उन्होंने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि संदिग्ध चोरी के संबंध में शिकायत स्वयं उन्होंने ही दर्ज कराई थी, जिसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।

राय ने यह भी स्पष्ट किया कि चढ़ावा संग्रह में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अनियमितताओं को रोकना उनकी जिम्मेदारी का अभिन्न हिस्सा था, और कथित गड़बड़ी की जानकारी मिलते ही उन्होंने कार्रवाई की।

एफआईआर और गिरफ्तारियाँ

प्रारंभिक जांच के आधार पर ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन ने श्री राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई। 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें आठ नामजद व्यक्तियोंअविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टीनू — तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया।

सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रासंगिक प्रावधानों और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आगे की राह

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास है। ट्रस्ट इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा। गौरतलब है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिलने से ट्रस्ट के प्रशासनिक नेतृत्व पर लगे सवालों की एक परत तो हट गई है, लेकिन दान प्रबंधन में व्यापक सुधार की माँग अभी भी बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि देश के सबसे चर्चित धार्मिक ट्रस्ट में दान प्रबंधन की खामियाँ इतनी गहरी कैसे हो गईं कि आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। क्लीन चिट व्यक्तिगत जिम्मेदारी से मुक्ति दे सकती है, लेकिन यह संस्थागत पारदर्शिता की कमी को नहीं ढकती। ट्रस्ट की प्रशासनिक संरचना और वित्तीय निगरानी तंत्र पर सुधार की माँग अब और तेज होगी — और यह माँग उचित भी है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी ने क्या फैसला सुनाया?
एसआईटी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को चढ़ावा मामले में क्लीन चिट दे दी है। अंतिम रिपोर्ट 18 अगस्त को उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने ट्रस्ट को सौंप दी।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा क्यों दिया था?
मंदिर में दान प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद दोनों ने 27 जून को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद एसआईटी ने दोनों से पूछताछ की।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में किन लोगों को गिरफ्तार किया गया?
25 जून को दर्ज एफआईआर में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टीनू को नामजद किया गया। सभी आठों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
एसआईटी का गठन कब और किसने किया?
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। इसका नेतृत्व लखनऊ संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत ने किया, जबकि पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार अन्य सदस्य रहे।
अब आगे क्या होगा इस मामले में?
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास है और ट्रस्ट इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा। आठ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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