राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को दी क्लीन चिट, संत समाज ने जताई खुशी
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच रिपोर्ट 18 अगस्त को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी। रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दी गई है। इस निष्कर्ष पर अयोध्या के साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों ने संतोष व्यक्त किया है।
संत समाज की प्रतिक्रिया
राम वल्लभ कुंज के उत्तराधिकारी और राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य महंत राजकुमार दास ने कहा, 'चंपत राय निर्दोष हैं। संत समाज ने सामूहिक रूप से यह बात पहले ही कही थी। दोषी कर्मचारी हैं। वे लोग जेल में हैं और अपने किए की सजा भुगत रहे हैं।'
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच संपन्न हुई है। उन्होंने कहा, 'हम सभी साधु-संत, अयोध्यावासी, राम मंदिर के प्रति निष्ठा रखने वाले सभी लोग इससे बहुत संतुष्ट हैं। आशा करते हैं कि दोबारा कभी भी राम मंदिर की मर्यादा के खिलाफ इस तरह की कोई भी घटना नहीं होगी।'
परमहंस आचार्य ने चंपत राय के बारे में विशेष रूप से कहा, 'चंपत राय सच्चे सनातनी हैं, जिनके नेतृत्व में इतना भव्य राम मंदिर बना। चंपत राय तो योग ऋषि हैं। इसलिए हम लोग बहुत खुश हैं कि उनको क्लीन चिट मिला।'
मेयर ने बताई पूरी प्रक्रिया
अयोध्या के मेयर गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि यह रिपोर्ट राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अनुरोध पर दर्ज एफआईआर और उन्हीं के अनुरोध पर गठित SIT की जांच का परिणाम है। उन्होंने कहा, 'हमें पूरा विश्वास है कि इस रिपोर्ट के माध्यम से पूरे समाज में जो भी संशय है वह दूर होगा और दूध का दूध और पानी का पानी होगा।'
मेयर ने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने SIT को तीन सप्ताह का समय दिया है, जिसमें उसे अपनी अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल करनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस मामले में कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का यह मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने स्वयं एफआईआर दर्ज कराई थी और SIT गठन का अनुरोध किया था। कुछ कर्मचारियों को इस संबंध में गिरफ्तार किया जा चुका है और वे न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला ऐसे समय में चर्चा में आया जब राम मंदिर के उद्घाटन के बाद वहाँ श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे की मात्रा में भारी वृद्धि हुई है।
आगे क्या होगा
SIT को सर्वोच्च न्यायालय में तीन सप्ताह के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। ट्रस्ट और संत समाज को उम्मीद है कि इस रिपोर्ट से मामले पर पूर्णविराम लगेगा और राम मंदिर की प्रतिष्ठा और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों मज़बूत होंगी।