राम मंदिर चंदा विवाद: संतों ने चंपत राय और अनिल मिश्रा पर उठाए सवाल, ट्रस्ट से जवाबदेही की मांग
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे और चंदे की कथित अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद ने 14 जुलाई को नया मोड़ लिया, जब संत समाज और हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाए। अयोध्या में हिंदू याचिकाकर्ता धर्म दास और संत देवेशाचार्य ने चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर जवाबदेही तय करने की माँग की, जबकि हरिद्वार में बड़ा उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश ने इस विवाद में विपक्षी दलों की टिप्पणियों को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया।
धर्म दास के आरोप: 'चंदे की चोरी हुई, गद्दारी की गई'
अयोध्या के हिंदू याचिकाकर्ता धर्म दास ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में गंभीर लापरवाही हुई है और इसके लिए कुछ पदाधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चंपत राय चुपचाप बैठे रहे और चंदे की चोरी होती रही, जबकि गोपाल राव और अनिल मिश्रा जैसे लोग पहले से ही इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
धर्म दास ने कहा कि भगवान राम के नाम पर लोगों की आस्था के साथ विश्वासघात हुआ है। उनके अनुसार, 'इन लोगों ने भगवान राम के साथ गद्दारी की है। ऐसे लोगों को भगवान राम, न्यायालय और समाज — तीनों से दंड मिलेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि वकील और भक्त दोनों नाराज हैं और जहाँ भी ये लोग दिखाई देंगे, समाज में उनके प्रति घृणा व्यक्त की जाएगी।
संत देवेशाचार्य की माँग: कोषाध्यक्ष दें इस्तीफा
संत देवेशाचार्य ने भी ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा की लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह बड़ा विवाद सामने आया है। देवेशाचार्य के अनुसार, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी पर मंदिर के कोष और चढ़ावे की निगरानी की जिम्मेदारी होती है।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि स्वयं कोषाध्यक्ष यह कह रहे हैं कि उनके पास केवल नाममात्र का पद है और हस्ताक्षर का अधिकार भी नहीं है, तो उन्हें तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'एक संत के लिए किसी पद से मोह रखना उचित नहीं है। यदि कोई संत केवल पद पर बने रहने के लिए संतत्व के मूल्यों से समझौता करता है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।'
महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश का विपक्ष पर पलटवार
हरिद्वार में बड़ा उदासीन अखाड़े के महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश ने विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग आज राम मंदिर और चढ़ावे को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वे स्वयं कभी मंदिर में दर्शन करने तक नहीं गए। उनके अनुसार, 'यही लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे और उन्हें काल्पनिक बताते रहे।'
रूपेंद्र प्रकाश ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है और इसे राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण का श्रेय भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिलने से रोकने के लिए कुछ लोग राम मंदिर को विवादों में घसीटने का प्रयास कर रहे हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने स्वयं अपनी सीमित भूमिका को लेकर सार्वजनिक बयान दिया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद हुआ था और यह ट्रस्ट अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। चढ़ावे और चंदे की पारदर्शिता पर उठे सवाल अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और संस्थागत जवाबदेही का मुद्दा बन चुके हैं।
आगे क्या होगा
संतों और याचिकाकर्ताओं की माँगों के बाद अब यह देखना होगा कि ट्रस्ट के पदाधिकारी इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या कोई जाँच या आंतरिक समीक्षा की प्रक्रिया शुरू होती है। इस पूरे प्रकरण ने धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक व्यापक बहस छेड़ दी है, जिसका असर आने वाले समय में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।