रवनीत सिंह बिट्टू ने अकाल तख्त की अरदास का किया स्वागत, बोले — 'आतंकवाद के हर निर्दोष पीड़ित को मिले समान सम्मान'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 14 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा पंजाब के आतंकवाद-काल के समस्त पीड़ितों की स्मृति में की गई अरदास का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने इसे मानवता, न्याय और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बताते हुए कहा कि उस दौर में जान गंवाने वाले प्रत्येक निर्दोष व्यक्ति को समान सम्मान और श्रद्धांजलि मिलनी चाहिए।
अरदास का महत्व और बिट्टू की प्रतिक्रिया
बिट्टू ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले भी यह आग्रह किया था कि अरदास केवल किसी एक समुदाय या वर्ग तक सीमित न रहे। उनके अनुसार, इस बार की अरदास में निर्दोष नागरिकों, बस यात्रियों, पुलिसकर्मियों, लोक सेवकों और आतंकवाद के दौरान मारे गए अन्य सभी पीड़ितों को सम्मिलित किया गया — जिसे उन्होंने एक सकारात्मक और सराहनीय कदम बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में आतंकवाद-काल की स्मृतियों और उससे जुड़े सामाजिक उपचार की बहस समय-समय पर सामने आती रही है। गौरतलब है कि सर्वसमावेशी अरदास की माँग लंबे समय से विभिन्न वर्गों की ओर से उठती रही है।
पंजाब के आतंकवाद-काल की पृष्ठभूमि
बिट्टू ने याद दिलाया कि पंजाब ने अपने इतिहास का सबसे कठिन और पीड़ादायक दौर झेला है। उस समय हजारों परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और लंबे समय तक हिंसा का दंश सहा। उनके अनुसार, उस दौर में मारे गए प्रत्येक निर्दोष व्यक्ति के प्रति समान संवेदना व्यक्त करना समाज में विश्वास और मेल-मिलाप को मजबूत करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है।
सिख धर्म और शांति का संदेश
केंद्रीय राज्य मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि सिख धर्म सदैव शांति, न्याय, साहस और मानवता की सेवा का संदेश देता है और किसी भी प्रकार की हिंसा, घृणा या विभाजन का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा, 'सभी पीड़ितों की स्मृति में सामूहिक अरदास करना समाज को एकजुट करने और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने का संदेश देता है।'
न्याय और सामाजिक उपचार की दिशा
बिट्टू ने जोर देकर कहा कि पीड़ितों के दर्द को स्वीकार करना और उन्हें समान सम्मान देना ही सच्चे न्याय और सामाजिक उपचार की पहली शर्त है। उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील की कि वे अतीत की त्रासदियों से सीख लेकर शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ें। आने वाले समय में इस तरह की सर्वसमावेशी पहलें सामाजिक ताने-बाने को और मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।