15 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रवनीत सिंह बिट्टू ने अकाल तख्त की अरदास का किया स्वागत, बोले — 'आतंकवाद के हर निर्दोष पीड़ित को मिले समान सम्मान'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रवनीत सिंह बिट्टू ने अकाल तख्त की अरदास का किया स्वागत, बोले — 'आतंकवाद के हर निर्दोष पीड़ित को मिले समान सम्मान'

सारांश

अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की सर्वसमावेशी अरदास को केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब के आतंकवाद-काल में मारे गए हर निर्दोष — चाहे नागरिक हो, पुलिसकर्मी हो या लोक सेवक — को समान श्रद्धांजलि मिलनी चाहिए।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 14 जुलाई को चंडीगढ़ में अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की अरदास का स्वागत किया।
अरदास में निर्दोष नागरिकों, बस यात्रियों, पुलिसकर्मियों और लोक सेवकों सहित आतंकवाद-काल के सभी पीड़ितों को शामिल किया गया।
बिट्टू ने कहा कि उन्होंने पहले भी आग्रह किया था कि अरदास किसी एक वर्ग तक सीमित न रहे।
उन्होंने सिख धर्म को शांति, न्याय और मानवता का प्रतीक बताते हुए हिंसा व विभाजन को अस्वीकार किया।
पंजाब के लोगों से अपील — अतीत की त्रासदियों से सीख लेकर शांति और विकास के पथ पर आगे बढ़ें।

केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 14 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा पंजाब के आतंकवाद-काल के समस्त पीड़ितों की स्मृति में की गई अरदास का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने इसे मानवता, न्याय और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बताते हुए कहा कि उस दौर में जान गंवाने वाले प्रत्येक निर्दोष व्यक्ति को समान सम्मान और श्रद्धांजलि मिलनी चाहिए।

अरदास का महत्व और बिट्टू की प्रतिक्रिया

बिट्टू ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले भी यह आग्रह किया था कि अरदास केवल किसी एक समुदाय या वर्ग तक सीमित न रहे। उनके अनुसार, इस बार की अरदास में निर्दोष नागरिकों, बस यात्रियों, पुलिसकर्मियों, लोक सेवकों और आतंकवाद के दौरान मारे गए अन्य सभी पीड़ितों को सम्मिलित किया गया — जिसे उन्होंने एक सकारात्मक और सराहनीय कदम बताया।

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में आतंकवाद-काल की स्मृतियों और उससे जुड़े सामाजिक उपचार की बहस समय-समय पर सामने आती रही है। गौरतलब है कि सर्वसमावेशी अरदास की माँग लंबे समय से विभिन्न वर्गों की ओर से उठती रही है।

पंजाब के आतंकवाद-काल की पृष्ठभूमि

बिट्टू ने याद दिलाया कि पंजाब ने अपने इतिहास का सबसे कठिन और पीड़ादायक दौर झेला है। उस समय हजारों परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और लंबे समय तक हिंसा का दंश सहा। उनके अनुसार, उस दौर में मारे गए प्रत्येक निर्दोष व्यक्ति के प्रति समान संवेदना व्यक्त करना समाज में विश्वास और मेल-मिलाप को मजबूत करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है।

सिख धर्म और शांति का संदेश

केंद्रीय राज्य मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि सिख धर्म सदैव शांति, न्याय, साहस और मानवता की सेवा का संदेश देता है और किसी भी प्रकार की हिंसा, घृणा या विभाजन का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा, 'सभी पीड़ितों की स्मृति में सामूहिक अरदास करना समाज को एकजुट करने और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने का संदेश देता है।'

न्याय और सामाजिक उपचार की दिशा

बिट्टू ने जोर देकर कहा कि पीड़ितों के दर्द को स्वीकार करना और उन्हें समान सम्मान देना ही सच्चे न्याय और सामाजिक उपचार की पहली शर्त है। उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील की कि वे अतीत की त्रासदियों से सीख लेकर शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ें। आने वाले समय में इस तरह की सर्वसमावेशी पहलें सामाजिक ताने-बाने को और मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसे पाटने की दिशा में यह पहल मायने रखती है। बिट्टू का स्वागत राजनीतिक रूप से भी सार्थक है, क्योंकि यह संदेश देता है कि पीड़ितों की पहचान किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होनी चाहिए। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि प्रतीकात्मक अरदास और वास्तविक न्याय के बीच की खाई तब तक नहीं पटेगी जब तक पीड़ित परिवारों के पुनर्वास और जवाबदेही के ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रवनीत सिंह बिट्टू ने किस अरदास का स्वागत किया?
बिट्टू ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा पंजाब के आतंकवाद-काल के सभी पीड़ितों की स्मृति में की गई सर्वसमावेशी अरदास का स्वागत किया। इस अरदास में निर्दोष नागरिकों, बस यात्रियों, पुलिसकर्मियों और लोक सेवकों को समान रूप से याद किया गया।
बिट्टू ने इस अरदास को महत्वपूर्ण क्यों बताया?
बिट्टू के अनुसार, यह अरदास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें आतंकवाद-काल के सभी पीड़ितों को बिना किसी भेद के समान सम्मान दिया गया। उन्होंने इसे समाज में विश्वास, मेल-मिलाप और भाईचारे को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक पहल बताया।
पंजाब के आतंकवाद-काल में कौन-कौन से वर्ग प्रभावित हुए थे?
बिट्टू के बयान के अनुसार, उस दौर में निर्दोष नागरिक, बस यात्री, पुलिसकर्मी और लोक सेवक सहित हजारों परिवार प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि हजारों परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और लंबे समय तक हिंसा का दर्द झेला।
बिट्टू ने सिख धर्म के बारे में क्या कहा?
बिट्टू ने कहा कि सिख धर्म सदैव शांति, न्याय, साहस और मानवता की सेवा का संदेश देता है और किसी भी प्रकार की हिंसा, घृणा या विभाजन का समर्थन नहीं करता। इसीलिए सामूहिक अरदास समाज को एकजुट करने का माध्यम है।
इस अरदास से पंजाब के समाज को क्या संदेश मिलता है?
बिट्टू के अनुसार, यह अरदास पंजाब के लोगों को अतीत की त्रासदियों से सीख लेकर शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश देती है। पीड़ितों के दर्द को स्वीकार करना और उन्हें समान सम्मान देना ही सामाजिक उपचार और न्याय की पहली शर्त है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले