ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी: अकाल तख्त जत्थेदार ने एंटी-सैक्रिलेज कानून से आपत्तिजनक धाराएं हटाने की दी कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने 6 जून 2026 को अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी पर पंजाब सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि राज्य के धार्मिक अपमान-विरोधी कानून से आपत्तिजनक धाराएं तत्काल हटाई जाएं। यह चेतावनी उस समय दी गई जब स्वर्ण मंदिर परिसर में खालिस्तान-समर्थक नारों और जरनैल सिंह भिंडरावाले के पोस्टरों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कट्टरपंथी समर्थक जुटे थे।
जत्थेदार की चेतावनी और काला कानून विवाद
अकाल तख्त के मंच से संबोधित करते हुए जत्थेदार गरगज ने 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026' का नाम लिए बिना इसे 'काला कानून' बताया और कहा कि राज्य सरकार इसे फिर से लाई है, जिसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने पंजाब सरकार से उनके पूर्व निर्देशों को नज़रअंदाज़ न करने की अपील दोहराई।
जत्थेदार ने केंद्र सरकार के उन कानूनों का भी उल्लेख किया जिन्हें बाद में वापस लिया गया था। उनका इशारा 2020 के तीन कृषि कानूनों की ओर था, जिन्हें 29 नवंबर 2021 को संसद में मतदान के बाद रद्द किया गया था।
बरसी का माहौल और सुरक्षा इंतज़ाम
भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच आयोजित यह बरसी कट्टरपंथियों और समर्थकों की बड़ी भीड़ के साथ मनाई गई। श्रद्धालु भोर से पहले ही स्वर्ण मंदिर परिसर में जुटने लगे थे। कार्यक्रम के दौरान भिंडरावाले के पोस्टर प्रदर्शित किए गए और खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए गए, हालांकि सभा का आयोजन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा।
बरसी से पूर्व कट्टरपंथी संगठन दल खालसा ने अमृतसर में बंद और 'घल्लूघारा मार्च' का ऐलान किया था, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी चौकसी पहले से बढ़ा दी थी।
धार्मिक कार्यक्रम और प्रदर्शनी
इस दिन की शुरुआत अकाल तख्त पर अखंड पाठ के भोग से हुई, जिसके बाद स्मृति में गुरबानी कीर्तन का आयोजन किया गया। परिसर में एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें ऑपरेशन ब्लू स्टार और स्वर्ण मंदिर को हुए नुकसान की तस्वीरें प्रदर्शित की गईं।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को सैन्य कार्रवाई के बारे में जानकारी देना था।
ऑपरेशन ब्लू स्टार: पृष्ठभूमि
ऑपरेशन ब्लू स्टार एक सैन्य कार्रवाई थी, जिसका आदेश तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था। इसका उद्देश्य स्वर्ण मंदिर परिसर में भारी मात्रा में हथियारों के साथ छिपे जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके नेतृत्व वाले उग्रवादियों को बाहर निकालना था। यह अभियान 1 से 8 जून 1984 के बीच चलाया गया था, जिसमें दोनों पक्षों के अनेक लोगों की जान गई और पवित्र स्थल को नुकसान पहुँचा।
जत्थेदार की सिख समुदाय से अपील
जत्थेदार गरगज ने कहा कि पंजाब सिखों का वतन है और उन्होंने सिख समुदाय से अपनी जड़ों से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि वे अपनी आने वाली पीढ़ियों को श्री हरमंदिर साहिब लाएं और चाहे कहीं भी बसें, पंजाब में अपनी ज़मीन न बेचें। यह टिप्पणी ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब राज्य में कृषि भूमि के बाहरी खरीदारों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।