बाब अल-मंडेब के पास हूती ठिकानों पर हवाई हमले, 90 लोगों की मौत; यमन संघर्ष फिर भड़का
सारांश
मुख्य बातें
यमन सरकार के लड़ाकू विमानों ने 5 सितंबर 2026 को रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के निकट होदेइदाह और ताइज प्रांतों में हूती-नियंत्रित इलाकों पर हवाई हमले किए। अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार सुबह शुरू हुई इस ताज़ा लड़ाई में अब तक कम से कम 90 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 40 सरकारी सैनिक और कम से कम 50 हूती लड़ाके शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
नाम न बताने की शर्त पर एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि हवाई हमले उस समय किए गए जब दोनों प्रांतों में कई मोर्चों पर भीषण लड़ाई जारी थी। हूती लड़ाकों ने पिछले 24 घंटों में तेज़ी से आगे बढ़ते हुए ज़मीनी बढ़त हासिल की थी। लड़ाकू विमानों ने उन्हीं इलाकों में हूती ठिकानों और उनकी सक्रिय गतिविधियों को निशाना बनाया जहाँ ज़मीनी मुठभेड़ चल रही थी।
हूती सेना के एक सूत्र ने हमलों की पुष्टि की, हालाँकि उसने दावा किया कि ये हमले सऊदी आक्रामक लड़ाकू विमानों द्वारा किए गए थे। सऊदी अरब ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
बाब अल-मंडेब का सामरिक महत्व
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिससे वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुज़रता है। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने शुक्रवार को संकल्प लिया कि सरकारी सेनाएँ हूती लड़ाकों को इस जलडमरूमध्य की ओर बढ़ने से रोकेंगी। यह जलमार्ग पर नियंत्रण किसी भी पक्ष के लिए सामरिक रूप से निर्णायक माना जाता है।
सैन्य स्थिति और दोनों पक्षों की तैयारी
सैन्य सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को दोनों पक्षों ने इन दो मोर्चों पर अतिरिक्त सैनिक, बख्तरबंद गाड़ियाँ और सैन्य उपकरण भेजे। यह ताज़ा संघर्ष हाल के वर्षों में पश्चिमी यमन में हुई सबसे भीषण ज़मीनी लड़ाइयों में से एक बताई जा रही है। गौरतलब है कि देश के कई मोर्चों पर बरसों की अपेक्षाकृत शांति के बाद इस पैमाने पर लड़ाई का फिर से शुरू होना चिंताजनक संकेत है।
यमन संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन 2014 के अंत से ही गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था। 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था। यह संघर्ष एक दशक से अधिक समय से जारी है और इसे दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक माना जाता है।
आगे क्या होगा
हमलों या हताहतों के बारे में तत्काल कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। दोनों पक्षों द्वारा मोर्चों पर सुदृढ़ीकरण जारी रहने से निकट भविष्य में संघर्ष के और तेज़ होने की आशंका बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें बाब अल-मंडेब की स्थिति पर टिकी हैं, क्योंकि इस जलमार्ग पर किसी भी व्यवधान का वैश्विक समुद्री व्यापार पर सीधा असर पड़ सकता है।