सना हवाई अड्डे पर सऊदी हवाई हमले का दावा, ईरानी विमान की वापसी पर तनाव चरम पर
सारांश
मुख्य बातें
हूती समूह के मीडिया चैनल अल-मसीरा टीवी ने सोमवार, 13 जुलाई को दावा किया कि सऊदी अरब ने हूती-नियंत्रित यमन की राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर कई हवाई हमले किए। यह हमले उस समय हुए जब तेहरान से एक हूती प्रतिनिधिमंडल को लेकर आ रहा एक ईरानी यात्री विमान सना की ओर बढ़ रहा था। यमन की सशस्त्र सेनाओं ने तत्काल हवाई अड्डा खाली करने की अपील जारी की।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब की ओर से इन हमलों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और नुकसान का भी कोई सत्यापित आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। इससे पहले सोमवार को ही यमन के रक्षा मंत्री ताहिर अल-अकीली ने टेलीविज़न पर स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि कोई शत्रु विमान यमन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो सशस्त्र बल उसके विरुद्ध कार्रवाई करेंगे।
ईरानी विमान विवाद की पृष्ठभूमि
यह वही ईरानी यात्री विमान है जो 4 जुलाई को सना हवाई अड्डे पर उतरा था और उसमें तेहरान से 200 से अधिक यमनी मरीज़ एवं अन्य यात्री सवार थे। बाद में यही विमान एक वरिष्ठ हूती प्रतिनिधिमंडल को तेहरान ले गया था, जहाँ वे ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रमों में सम्मिलित हुए।
गौरतलब है कि 3 जुलाई को हूती समूह ने दावा किया था कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सऊदी लड़ाकू विमानों को रोक दिया था। हूती का आरोप था कि ये विमान उक्त ईरानी नागरिक विमान को सना हवाई अड्डे पर उतरने से रोकने के इरादे से यमन के हवाई क्षेत्र में घुसे थे।
हूती का रुख और यमन सरकार का प्रस्ताव
हूती प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया है कि वह उसी ईरानी विमान से वापस लौटेगा। उसने यमन सरकार के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसमें किसी अन्य, गैर-ईरानी विमान से सरकारी निगरानी में उनकी वापसी कराने की बात कही गई थी। इससे एक दिन पहले रविवार को हूती समूह ने सऊदी अरब और यमन सरकार दोनों को खुली चेतावनी दी थी कि वे इस उड़ान को रोकने का प्रयास न करें।
ज़मीनी हालात और व्यापक संघर्ष
पिछले कुछ दिनों में हूती समूह ने अपने नियंत्रण वाले इलाकों में गतिविधियाँ तेज़ कर दी हैं — आदिवासी सभाएँ, हथियारों के साथ रैलियाँ और सार्वजनिक प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। साथ ही समूह ने एक बार फिर उस चीज़ को समाप्त करने की माँग की है जिसे वह सऊदी नेतृत्व वाली नाकेबंदी बताता है।
यह ऐसे समय में आया है जब यमन वर्ष 2014 के अंत से चले आ रहे गृह संघर्ष की चपेट में है। उस समय हूती समूह ने राजधानी सना पर कब्ज़ा कर लिया था, और 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था।
आगे क्या
सना हवाई अड्डे पर हमले के इन दावों के बाद क्षेत्र में तनाव और गहरा होने की आशंका है। ईरानी विमान की वापसी को लेकर हूती समूह और यमन-सऊदी गठबंधन के बीच गतिरोध जारी रहने से कूटनीतिक रास्ता और संकरा होता दिख रहा है।