यूपी गठबंधन में दरार: सपा नेता हाजी फजलुर्रहमान का इमरान मसूद पर बड़ा हमला
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता हाजी फजलुर्रहमान ने 13 जुलाई को सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद पर तीखा पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि मसूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सुर में सुर मिला रहे हैं और विपक्षी गठबंधन को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं। यह विवाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन की आंतरिक तनातनी को सतह पर ले आया है।
इमरान मसूद ने क्या कहा था
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हाल ही में सपा-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि सपा बार-बार गठबंधन की बात करती है, जबकि कांग्रेस की अपनी स्वतंत्र पहचान है। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के समर्थन से सपा ने 37 सीटें जीती थीं और कांग्रेस को किसी 'बैसाखी' की ज़रूरत नहीं है। मसूद ने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी 'बोलता हुआ मुसलमान' बर्दाश्त नहीं करती।
सपा का पलटवार
हाजी फजलुर्रहमान ने इमरान मसूद के बयान को 'बेबुनियाद' करार देते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि इमरान मसूद की नस BJP के हाथ में है। इसीलिए वे मनमानी बातें करते हैं और गठबंधन तोड़ने की कोशिश करते हैं।' उन्होंने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जब कांग्रेस सपा से अलग होकर लड़ी, तो उसे मात्र 2 सीटें और 3 प्रतिशत वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी ने 34 प्रतिशत वोट हासिल किए।
गठबंधन और BJP पर सपा का रुख
फजलुर्रहमान ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व यूपी में गठबंधन का समर्थन करता है, लेकिन इमरान मसूद जैसे नेता इसके विरुद्ध काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि BJP हिंदू-मुस्लिम आधारित राजनीति करती है, जबकि समाजवादी पार्टी सर्वसमावेशी राजनीति में विश्वास रखती है और किसी भी आधार पर समाज को बाँटने के खिलाफ है।
यूपी कांग्रेस का बचाव
इस पूरे विवाद पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इमरान मसूद का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मसूद निस्संदेह पार्टी के मज़बूत सांसदों में से एक हैं और पूरे संकल्प के साथ लड़ने वाले नेता हैं। राय ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरे देश में अपने संगठन को मज़बूत कर रही है और कार्यकर्ताओं को सशक्त बना रही है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी दो वर्ष से अधिक समय बाकी है, लेकिन गठबंधन की यह आंतरिक खींचतान विपक्षी एकता के लिए शुरुआती चुनौती बन सकती है। आलोचकों का कहना है कि यदि सपा और कांग्रेस सीट-बँटवारे पर सहमति नहीं बना पाए, तो इसका सीधा फायदा BJP को मिलेगा। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया और आगामी बातचीत यह तय करेगी कि यह विवाद महज़ बयानबाज़ी है या गठबंधन में वास्तविक दरार की शुरुआत।