सपा-कांग्रेस गठबंधन पर इमरान मसूद का दो टूक: 'बराबरी का होता है गठबंधन, उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 1 मई 2025 को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनज़र समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच संभावित गठबंधन पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि गठबंधन बराबरी का होता है — उसमें कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। उन्होंने जोर दिया कि कांग्रेस को गठबंधन में उचित सीट-हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
गठबंधन पर कांग्रेस का रुख
मसूद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस एक सर्वे भी करवा रही है। जब उनसे पूछा गया कि पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, तो उन्होंने कहा कि यह पार्टी का निर्णय है, लेकिन पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि हमारी पार्टी ज़्यादा से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़े और उचित हिस्सेदारी मिले।'
अखिलेश के 'सीट नहीं, जीत' वाले बयान पर पलटवार
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के 'सीट नहीं, जीत' वाले बयान पर मसूद ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'जब सीट ही नहीं होगी तो जीतकर क्या होगा? जब हमारी सीट ही नहीं होगी तो हम जीतकर क्या करेंगे? फिर तो आप ही जीत जाइए।' उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन में इस तरह की बातें नहीं होतीं और कार्यकर्ताओं की महत्वाकांक्षाओं को अनिश्चितकाल तक दबाकर नहीं रखा जा सकता।
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल
मसूद ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी निशाना साधा और कहा कि प्रदेश में अपराध और रंगदारी बढ़ रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ विपक्षी दलों के बीच जोर पकड़ रही हैं।
पश्चिम बंगाल और कर्नाटक पर टिप्पणी
मसूद ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हालात पर कपिल सिब्बल के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वह देश के बड़े वकील हैं और देश में जो कुछ भी हो रहा है, वह शर्मनाक है। उन्होंने सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी के साथ हुई मारपीट की घटना का भी उल्लेख किया।
कर्नाटक में सत्ता हस्तांतरण और नेताओं के दिल्ली दौरों पर विपक्ष की टिप्पणियों को उन्होंने 'बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना' कहकर खारिज किया और कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है।
आगे क्या
गठबंधन पर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व स्तर पर होना है। सर्वे के नतीजों और केंद्रीय नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श के बाद उत्तर प्रदेश में सीट-बँटवारे की रूपरेखा स्पष्ट होने की उम्मीद है। मसूद के बयान से साफ है कि कांग्रेस इस बार सपा के सामने दबाव की स्थिति में नहीं रहना चाहती।