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चिराग शेट्टी का खुलासा: हांग्जो में 'जय हो' सुनना करियर का सबसे भावुक पल

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चिराग शेट्टी का खुलासा: हांग्जो में 'जय हो' सुनना करियर का सबसे भावुक पल

सारांश

बीमारी से जूझते हुए, विदेशी धरती पर 'जय हो' की धुन — चिराग शेट्टी ने बताया कि हांग्जो का वह स्वर्णिम पल सिर्फ पदक नहीं था, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जो शब्दों से परे है। इन्फ्लूएंजा के बावजूद विश्व नंबर एक बनना उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

मुख्य बातें

चिराग शेट्टी ने एक पॉडकास्ट में एशियन गेम्स 2023 के स्वर्ण पदक के बाद हांग्जो एरीना में 'जय हो' सुनने के पल को करियर का सबसे यादगार क्षण बताया।
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग उसी जीत के साथ पुरुष युगल में विश्व नंबर एक बने।
चिराग ने खुलासा किया कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान वह इन्फ्लूएंजा से पीड़ित थे और तेज बुखार में ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे।
फाइनल जीतने के बाद दोनों खिलाड़ी कोर्ट पर नाचे और अपनी टी-शर्ट दर्शकों की ओर उछाली।
चिराग ने युवा खिलाड़ियों को संदेश दिया कि मेहनत, अनुशासन और सीखने की ललक ही सफलता की असली कुंजी है।

भारतीय बैडमिंटन स्टार चिराग शेट्टी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपने करियर के सबसे भावनात्मक क्षण को याद करते हुए कहा कि एशियन गेम्स 2023 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद चीन के हांग्जो एरीना में 'जय हो' गीत की गूंज सुनना उनके जीवन के सबसे अविस्मरणीय अनुभवों में से एक रहा। उसी ऐतिहासिक जीत के साथ चिराग और उनके जोड़ीदार सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी पुरुष युगल में विश्व की नंबर एक जोड़ी बन गए थे।

मुख्य घटनाक्रम

चिराग ने पॉडकास्ट में बताया कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान उनका एकमात्र लक्ष्य एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीतना था। उन्होंने स्वीकार किया कि सेमीफाइनल के बाद जब कोच ने बताया कि वे और सात्विक दुनिया की नंबर एक जोड़ी बन चुके हैं, तब भी उनका पूरा ध्यान फाइनल मैच पर केंद्रित था। चिराग के शब्दों में, "वर्ल्ड नंबर-1 बनने के साथ एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीतना हमारे करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।"

बीमारी के बावजूद ऐतिहासिक प्रदर्शन

27 वर्षीय शटलर ने खुलासा किया कि टूर्नामेंट के दौरान वह इन्फ्लूएंजा से जूझ रहे थे। तेज बुखार के कारण उनकी हालत इतनी खराब थी कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने भीतर की जिजीविषा को बनाए रखा और देश के लिए सर्वोच्च सम्मान हासिल किया। यह उनकी मानसिक दृढ़ता और अदम्य संकल्प का प्रमाण है।

'जय हो' का वह यादगार पल

चिराग ने फाइनल के बाद के जश्न को याद करते हुए बताया कि जीत पक्की होते ही हांग्जो एरीना में 'जय हो' गीत बज उठा। विदेशी धरती पर भारतीय गीत की गूंज सुनकर वे और सात्विक कोर्ट पर ही नाचने लगे और अपनी टी-शर्ट दर्शकों की ओर उछालकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया। उन्होंने कहा कि जब किसी दूसरे देश में आपके सम्मान में आपके देश का गीत बजता है, तो वह अनुभव शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

युवा खिलाड़ियों को संदेश

चिराग ने उभरते खिलाड़ियों को सलाह देते हुए कहा कि केवल अंतिम लक्ष्य के पीछे भागने के बजाय पूरी प्रक्रिया का आनंद लेना चाहिए। उनके अनुसार कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की इच्छाशक्ति ही किसी भी खिलाड़ी को शीर्ष तक पहुँचाती है। सात्विक-चिराग की जोड़ी आज भारतीय बैडमिंटन के सबसे चमकदार अध्याय का प्रतिनिधित्व करती है और उनकी यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारतीय खेल संस्कृति की एक बड़ी खामी को उजागर करती है — जहाँ खिलाड़ियों पर बीमार होने पर भी मैदान में उतरने का अघोषित दबाव रहता है। यह प्रसंग प्रेरणादायक ज़रूर है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाता है कि क्या हमारे खेल प्रबंधन तंत्र में खिलाड़ियों के स्वास्थ्य को प्रदर्शन से ऊपर रखने की व्यवस्था है। सात्विक-चिराग की जोड़ी ने जो मुकाम हासिल किया है, वह दशकों की बैडमिंटन विरासत का विस्तार है — लेकिन उनकी दीर्घकालिक सफलता के लिए पदक से ज़्यादा उनकी शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना ज़रूरी है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिराग शेट्टी ने हांग्जो में 'जय हो' सुनने को इतना खास क्यों बताया?
चिराग के अनुसार विदेशी धरती पर अपने देश का गीत सुनना एक ऐसा अनुभव है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। एशियन गेम्स 2023 का स्वर्ण पदक जीतने के तुरंत बाद हांग्जो एरीना में 'जय हो' बजा, जो उनके लिए गर्व और भावुकता का असाधारण संगम था।
सात्विक-चिराग की जोड़ी विश्व नंबर एक कब बनी?
एशियन गेम्स 2023 के सेमीफाइनल के बाद सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी पुरुष युगल में विश्व की नंबर एक जोड़ी बन गई। हालाँकि उस समय उनका पूरा ध्यान फाइनल जीतने पर था।
क्या चिराग शेट्टी एशियन गेम्स 2023 में बीमार थे?
हाँ, चिराग ने खुलासा किया कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान वह इन्फ्लूएंजा से पीड़ित थे। तेज बुखार के कारण वह ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे, फिर भी उन्होंने खुद को संभालकर देश के लिए स्वर्ण पदक जीता।
चिराग शेट्टी ने युवा खिलाड़ियों को क्या सलाह दी?
चिराग ने कहा कि केवल अंतिम लक्ष्य के पीछे भागने के बजाय पूरी प्रक्रिया का आनंद लेना चाहिए। उनके अनुसार कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की इच्छाशक्ति ही बड़ी सफलता दिलाती है।
एशियन गेम्स 2023 में जीत के बाद चिराग और सात्विक ने कैसे जश्न मनाया?
जीत पक्की होते ही दोनों खिलाड़ी कोर्ट पर ही नाचने लगे और अपनी टी-शर्ट दर्शकों की ओर उछालकर इस ऐतिहासिक सफलता का उत्सव मनाया। स्टेडियम में उस समय 'जय हो' गीत बज रहा था।
राष्ट्र प्रेस
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