12 साल बाद आंध्र प्रदेश को मिले वक्फ रिकॉर्ड: तेलंगाना ने सौंपी 3,503 फाइलें और 4,050 सर्वे रिपोर्टें
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड को 17 जुलाई 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि मिली — 2014 में राज्य विभाजन के बाद से लंबित वक्फ संपत्तियों के अभिलेखों का हस्तांतरण अंततः पूरा हो गया। तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड ने आधिकारिक रूप से 3,503 फाइलें, 4,050 सर्वे आयुक्त रिपोर्टें, दो सरकारी गजट खंड और अनेक ऐतिहासिक दस्तावेज आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड को सुपुर्द किए। यह विवाद करीब 12 वर्षों से अनसुलझा था।
मुख्य घटनाक्रम
आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अब्दुल अजीज ने शुक्रवार को बताया कि यह महज रिकॉर्ड का हस्तांतरण नहीं, बल्कि वक्फ संपत्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक निर्णायक कदम है। 2014 में संयुक्त आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश से संबंधित वक्फ फाइलें, सर्वे दस्तावेज, जिलावार गजट और बोर्ड प्रस्तावों की प्रतियाँ तेलंगाना वक्फ बोर्ड के पास ही रह गई थीं।
वक्फ अधिनियम, 1995 और केंद्र सरकार के विभाजन दिशा-निर्देशों के अनुसार ये सभी अभिलेख आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित किए जाने थे, परंतु यह प्रक्रिया वर्षों तक लंबित रही। गौरतलब है कि इस देरी के कारण संपत्तियों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और अदालतों में लंबित मामलों की पैरवी दोनों प्रभावित हो रही थीं।
रिकॉर्ड न मिलने से क्या-क्या प्रभावित हुआ
अब्दुल अजीज के अनुसार, अभिलेखों की अनुपलब्धता के चलते वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व का निर्धारण, अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही, और न्यायालयों में दायर मामलों की प्रभावी पैरवी — ये सभी कार्य वर्षों से अवरुद्ध थे। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर कानूनी और प्रशासनिक बहस तेज़ है।
समाधान की प्रक्रिया
अध्यक्ष पद संभालने के बाद अब्दुल अजीज ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी। तेलंगाना वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकों के बाद यह ऐतिहासिक हस्तांतरण संभव हो सका। उन्होंने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, मंत्री नारा लोकेश और एन.एम.डी. फारूक के सहयोग की सराहना की, साथ ही तेलंगाना सरकार और तेलंगाना वक्फ बोर्ड के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
वित्तीय बकाया और आगे की राह
अभिलेखों के हस्तांतरण के अलावा, अब्दुल अजीज ने यह भी बताया कि तेलंगाना वक्फ बोर्ड पर आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड के ₹55 करोड़ बकाया हैं, जिन्हें भी शीघ्र जारी किए जाने की उम्मीद है। रिकॉर्ड मिलने से वक्फ संपत्तियों की कानूनी मान्यता मजबूत होगी, न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे में सहायता मिलेगी और भविष्य में प्रशासनिक कार्यों को गति मिलेगी।