सीबीआई की आरकॉम लोन फ्रॉड में दूसरी चार्जशीट, नेटिजन इंजीनियरिंग और दो निदेशक नामजद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़े ₹19,694.33 करोड़ के बैंक लोन फ्रॉड मामले में 18 जुलाई 2025 को दूसरी चार्जशीट दाखिल की, जिसमें नेटिजन इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड और उसके दो निदेशकों पर आपराधिक साजिश, गबन तथा धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। यह चार्जशीट मुंबई स्थित सीबीआई मामलों की विशेष अदालत में दाखिल की गई है।
मुख्य आरोपी और आरोप
दूसरी चार्जशीट में नेटिजन इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड — जो पूर्व में रिलायंस इन्फोकॉम इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी — और उसके दो निदेशकों अनिल काल्या तथा टुनू साहू को नामजद किया गया है। सीबीआई के अनुसार, इस कंपनी का कथित तौर पर आरकॉम द्वारा एक 'पास-थ्रू एंटिटी' के रूप में इस्तेमाल किया गया — यानी धन को बाहर निकालने के लिए एक माध्यम के रूप में।
फंड डायवर्जन का तरीका
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस माध्यम से जानबूझकर फंड डायवर्ट किए गए, जिससे ऋण देने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अवैध वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया, जबकि आरोपी पक्षों और उनसे संबद्ध संस्थाओं को अनुचित लाभ दिलाया गया। यह मामला मूल रूप से भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।
पहली चार्जशीट और व्यापक मामला
इससे पहले 29 मई को सीबीआई ने इसी मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें 16 आरोपियों को नामजद किया गया था — इनमें आरकॉम, कंपनी के पाँच वरिष्ठ अधिकारी और 10 बैंक अधिकारी शामिल थे। गौरतलब है कि यह मामला व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसके तहत सीबीआई ने अब तक 7 एफआईआर दर्ज की हैं।
ये एफआईआर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के खिलाफ विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से मिली शिकायतों के आधार पर दर्ज हुई हैं।
बैंकों का कुल जोखिम
एफआईआर के अनुसार, इस मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों का कुल एक्सपोजर ₹19,694.33 करोड़ है — जो इसे देश के बड़े कॉर्पोरेट ऋण धोखाधड़ी मामलों में से एक बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग क्षेत्र में एनपीए (गैर-निष्पादित आस्तियों) की वसूली को लेकर नियामकीय दबाव बढ़ा हुआ है।
आगे की जांच
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी रहेगी, ताकि अन्य संदिग्धों की भूमिका और मामले के बाकी पहलुओं की भी पड़ताल की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में और चार्जशीट दाखिल होने की संभावना है।