रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस बैंक धोखाधड़ी: सीबीआई ने दाखिल की पहली चार्जशीट, ₹4,097 करोड़ के घोटाले में 7 आरोपी नामजद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 7 जुलाई 2026 को रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) से जुड़े बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले में विशेष सीबीआई अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की। इसमें दो रिलायंस समूह की कंपनियों सहित कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है, जिन पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ₹4,097 करोड़ का नुकसान पहुँचाने का आरोप है। सीबीआई के आधिकारिक बयान के अनुसार यह रिलायंस एडीए समूह से जुड़े मामलों में दूसरी चार्जशीट है।
चार्जशीट में नामजद आरोपी
चार्जशीट में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) — दोनों कंपनियाँ — तथा आरसीएफएल के पाँच पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इनमें तत्कालीन निदेशक एवं सीईओ देवांग प्रवीण मोदी, निदेशक रविंद्र सोमयाजुला राव, धनंजय भगवानप्रसाद तिवारी, एग्जीक्यूटिव रिस्क ऑफिसर राजेश कृष्णमूर्ति और चीफ रिस्क ऑफिसर लव चतुर्वेदी के नाम दर्ज हैं।
सीबीआई ने इन सभी पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भारी वित्तीय नुकसान पहुँचाने के आरोप लगाए हैं।
मुख्य आरोप: शेल कंपनियों के ज़रिए धन का हस्तांतरण
जाँच में सामने आया है कि आरसीएफएल द्वारा बैंकों से लिए गए ऋण की राशि को निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करते हुए मध्यस्थ और शेल कंपनियों के माध्यम से रिलायंस एडीए समूह की अन्य कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। एजेंसी के अनुसार, इस प्रक्रिया से ऋण देने वाले बैंकों को भारी नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों और उनसे जुड़ी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुँचा।
यह मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र सहित अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शिकायतों पर दर्ज किया गया था। जाँच एजेंसी के अनुसार बैंकिंग कंसोर्टियम के 13 सरकारी बैंकों को कुल ₹4,097 करोड़ का नुकसान हुआ है।
गिरफ्तारियाँ और हिरासत की स्थिति
इस मामले में सीबीआई अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व उपाध्यक्ष अमिताभ झुनझुनवाला, आरसीएफएल के पूर्व सीईओ देवांग मोदी और रिलायंस कैपिटल के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) अमित बापना शामिल हैं।
वर्तमान में अमिताभ झुनझुनवाला और देवांग मोदी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि अमित बापना सीबीआई की हिरासत में हैं।
व्यापक जाँच का दायरा और पृष्ठभूमि
सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस होम फाइनेंस (आरएचएफएल), आरसीएफएल और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के खिलाफ विभिन्न सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की शिकायतों पर कुल सात एफआईआर दर्ज की हैं। गौरतलब है कि इससे पहले 29 मई को रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में 16 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
एजेंसी के अनुसार अन्य निदेशकों, कंपनियों और सार्वजनिक अधिकारियों की भूमिका की जाँच अभी जारी है और आगे पूरक चार्जशीट (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) भी दाखिल की जाएंगी। इन सभी मामलों की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है।
आगे क्या होगा
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह मामलों की निष्पक्ष, व्यापक और त्वरित जाँच के लिए प्रतिबद्ध है। यह मामला ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब देश में बड़े कॉर्पोरेट समूहों से जुड़ी बैंक धोखाधड़ी के मामलों में जवाबदेही को लेकर बहस तेज़ है। विशेष सीबीआई अदालत में अगली सुनवाई में आरोपियों की जमानत याचिकाओं और पूरक चार्जशीट की समयसीमा पर स्पष्टता आने की संभावना है।