झारखंड हाई कोर्ट का आदेश: जगन्नाथपुर मंदिर प्रबंधन पर 22 जुलाई तक दाखिल हो मसौदा योजना
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाई कोर्ट ने 7 जुलाई 2026 को झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड को रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के समग्र प्रबंधन के लिए दो सप्ताह के भीतर मसौदा योजना न्यायालय में दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने साथ ही राज्य सरकार को आगामी रथयात्रा मेला के शांतिपूर्ण और सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने का स्पष्ट आदेश दिया।
सुनवाई में क्या हुआ
न्यायमूर्ति आनंद सेन की पीठ ने मंदिर प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि मंदिर के समग्र प्रबंधन के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है और इसके लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। न्यायालय ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई निर्धारित की।
सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने अदालत को बताया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में मंदिर परिसर में सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। इस पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि रथयात्रा मेले के आयोजन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए और सभी आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि जगन्नाथपुर मंदिर के प्रबंधन को लेकर विभिन्न पक्षों के बीच लंबे समय से गंभीर विवाद चल रहा है। एक पक्ष स्वयं को वैध न्यासी बता रहा है, जबकि झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 29 के तहत अधिसूचना जारी कर पूर्व प्रबंधन समिति को भंग कर दिया है। 23 जून की सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट कहा था कि इस विवाद का सबसे अधिक नुकसान भगवान जगन्नाथ और मंदिर को हो रहा है।
सुरक्षा संकट की शुरुआत कब हुई
मंदिर की सुरक्षा का मुद्दा 17 जून की सुनवाई में तब उठा जब अदालत को बताया गया कि मंदिर के एक सुरक्षा कर्मी की हत्या की जाँच के बाद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था अपर्याप्त पाई गई। इस पर हाई कोर्ट ने रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक को 24 घंटे पर्याप्त पुलिस बल तैनात रखने का निर्देश दिया था। बाद में केवल निहत्थे पुलिसकर्मियों की तैनाती पर असंतोष जताते हुए अदालत ने कम-से-कम दो सशस्त्र पुलिसकर्मियों की अनिवार्य तैनाती का आदेश दिया था।
आगे क्या होगा
अब सभी पक्षों की निगाहें 22 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब धार्मिक न्यास बोर्ड को मंदिर प्रबंधन की विस्तृत मसौदा योजना न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। यह मामला इस बात की भी परीक्षा है कि क्या राज्य का धार्मिक प्रशासनिक तंत्र विवादित मंदिरों के प्रबंधन में एक व्यावहारिक और पारदर्शी ढाँचा खड़ा कर सकता है।