गुवाहाटी घोषणा पत्र: ब्रिक्स देशों ने नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ साझा मोर्चा खोला
सारांश
मुख्य बातें
असम की राजधानी गुवाहाटी में 7 जुलाई 2026 को ब्रिक्स देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई, जिसके समापन पर सदस्य देशों ने 'गुवाहाटी घोषणा पत्र' को अपनाया। इस घोषणा पत्र में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों के विरुद्ध आपसी सहयोग को नई ऊँचाई देने की सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। बैठक में ब्राजील, चीन, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
घोषणा पत्र में क्या है
गुवाहाटी घोषणा पत्र में राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप समयबद्ध सूचना, खुफिया जानकारी और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही नशीले पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध कानून प्रवर्तन को सशक्त बनाने हेतु नवीन तकनीकों, डिजिटल उपकरणों और डेटा-आधारित तरीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी।
सदस्य देशों ने विशेष रूप से सिंथेटिक ड्रग्स और नई मनो-सक्रिय पदार्थों (एनपीएस) के बढ़ते प्रसार, रसायनों के दुरुपयोग, डार्कनेट और वर्चुअल संपत्तियों के जरिए संचालित होने वाले आपराधिक नेटवर्कों तथा समुद्री मार्गों व डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की।
भारत की भूमिका और प्रस्ताव
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत ने नशे के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है। इसके तहत 2026 से 2029 तक के लिए एक तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया गया है, जो नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है।
गर्ग ने ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ नियंत्रण एजेंसियों से रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने, आपसी विश्वास और तेज कार्रवाई पर आधारित साझेदारी विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने ब्रिक्स वर्चुअल वर्किंग ग्रुप की स्थापना और सीमा-पार प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने का प्रस्ताव भी रखा।
बदलते खतरों पर चिंता
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि 21वीं सदी में मादक पदार्थों की तस्करी अत्यधिक जुड़ी हुई और सीमाओं से परे संचालित होने वाली चुनौती बन चुकी है। डार्कनेट के जरिए होने वाली तस्करी, एनपीएस के बढ़ते खतरे और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सिंथेटिक ड्रग्स से होने वाली मौतें तेजी से बढ़ रही हैं और पारंपरिक तस्करी मार्ग डिजिटल नेटवर्कों से जुड़ते जा रहे हैं।
युवाओं और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा
घोषणा पत्र में नशीले पदार्थों की माँग कम करने के लिए साक्ष्य-आधारित, व्यापक और जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया। सदस्य देशों ने बच्चों और युवाओं सहित संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और उपचार, नशामुक्ति तथा पुनर्वास उपायों को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर सामूहिक प्रतिबद्धता जताई।
ब्रिक्स अध्यक्षता और आगे की राह
गौरतलब है कि वर्ष 2026 में भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, जिसका विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण' है। गुवाहाटी बैठक इसी अध्यक्षता के अंतर्गत आयोजित की गई। एनसीबी प्रमुख ने सभी सदस्य देशों से घोषणा पत्र की भावना को आगे बढ़ाते हुए नशा-मुक्त विश्व और सुरक्षित वैश्विक समाज के साझा लक्ष्यों के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। आने वाले महीनों में वर्चुअल वर्किंग ग्रुप की संरचना और सीमा-पार प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा तय होने की उम्मीद है।