वैश्विक खिलौना बाज़ार में 25% हिस्सेदारी का लक्ष्य रखे भारत: निर्मला सीतारमण, 2032 तक बाज़ार होगा $179 अरब
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 17वें टॉय बिज़ इंटरनेशनल बी2बी एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए भारतीय खिलौना उद्योग को महत्वाकांक्षी वैश्विक लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को 2032 तक 179 अरब डॉलर के अनुमानित वैश्विक खिलौना बाज़ार में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का संकल्प लेना चाहिए — एक लक्ष्य जो घरेलू बाज़ार की सीमाओं से कहीं परे है।
वैश्विक बनाम घरेलू: महत्वाकांक्षा की ज़रूरत
वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि भारत का घरेलू खिलौना बाज़ार 2034 तक 5 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, लेकिन यह आँकड़ा वैश्विक संभावनाओं के सामने बेहद छोटा है। उन्होंने कहा, "वैश्विक बाज़ार 2032 तक 179 अरब डॉलर का होने जा रहा है। ऐसे में हमें कहीं अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने चाहिए।" टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इस एक्सपो में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित थे।
गुणवत्ता मानकों और नियामकीय सुधारों की भूमिका
सीतारमण ने बताया कि सरकार द्वारा लागू किए गए कड़े गुणवत्ता मानकों ने उद्योग को नई दिशा दी है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने अपनी निगरानी और प्रवर्तन क्षमता को मज़बूत किया है ताकि केवल सुरक्षित और प्रमाणित खिलौने ही देश के बाज़ारों और हवाई अड्डों तक पहुँच सकें। उन्होंने कहा, "असुरक्षित खिलौनों को हवाई अड्डों और बाज़ारों तक पहुँचने की अनुमति नहीं दी गई।" यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब चीन से सस्ते और गुणवत्ताहीन खिलौनों का आयात भारतीय बाज़ार में लंबे समय तक एक चुनौती रहा है।
राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना: मेड इन इंडिया की नई इबारत
वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना का विस्तार से उल्लेख किया। इस योजना के अंतर्गत विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जाएँगे, कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा और एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाएगा जहाँ उच्च गुणवत्ता वाले, नवाचार-आधारित, टिकाऊ और भारतीय संस्कृति पर आधारित खिलौनों का निर्माण 'मेड इन इंडिया' ब्रांड के तहत हो। सीतारमण ने स्पष्ट किया, "हम केवल अधिक खिलौने बनाने की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि सभी विभाग मिलकर ऐसा ढाँचा तैयार कर रहे हैं जिससे खिलौना निर्माण के हर पहलू को प्रोत्साहन मिल सके।"
निर्यात में ऐतिहासिक उछाल: आँकड़े बोलते हैं
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत का खिलौना निर्यात 2017-18 के 152.7 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 384.7 मिलियन डॉलर पहुँच गया — यानी 151.9 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि। गौरतलब है कि यह वृद्धि उस दौर में हुई जब सरकार ने आयात पर सख्ती और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन की नीति अपनाई।
HSN 9503 श्रेणी के इलेक्ट्रॉनिक और गैर-इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों का निर्यात 77.35 मिलियन डॉलर से बढ़कर 200.89 मिलियन डॉलर हो गया — लगभग 160 प्रतिशत की वृद्धि। इस श्रेणी में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार रहा, जहाँ निर्यात चार गुना बढ़कर लगभग 111.9 मिलियन डॉलर पहुँचा। ब्रिटेन, पोलैंड, नीदरलैंड और जर्मनी भी प्रमुख बाज़ार रहे। वीडियो गेम कंसोल (HSN 9504) का निर्यात लगभग तीन गुना बढ़कर 46.75 मिलियन डॉलर और त्योहारी उत्पादों (HSN 9505) का निर्यात लगभग 130 प्रतिशत बढ़कर 137.03 मिलियन डॉलर पहुँचा।
आम जनता और उद्योग पर असर
सरकार के अनुसार, खिलौना उद्योग अब विनिर्माण, रोज़गार और उद्यमिता का महत्वपूर्ण स्रोत बनता जा रहा है। यह क्षेत्र देश भर के कारीगरों, निर्माताओं, व्यापारियों और छोटे व्यवसायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा कर रहा है। मज़बूत घरेलू माँग, सरकारी नीतियों का समर्थन, पारंपरिक शिल्प कौशल और वैश्विक स्तर पर भारतीय खिलौनों की बढ़ती स्वीकार्यता इस प्रगति के प्रमुख कारण बताए गए हैं। यदि 25% वैश्विक हिस्सेदारी का लक्ष्य हासिल होता है, तो यह भारतीय खिलौना उद्योग के लिए एक रूपांतरकारी पड़ाव होगा।