7 जुलाई 2026
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वैश्विक खिलौना बाज़ार में 25% हिस्सेदारी का लक्ष्य रखे भारत: निर्मला सीतारमण, 2032 तक बाज़ार होगा $179 अरब

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वैश्विक खिलौना बाज़ार में 25% हिस्सेदारी का लक्ष्य रखे भारत: निर्मला सीतारमण, 2032 तक बाज़ार होगा $179 अरब

सारांश

निर्मला सीतारमण का संदेश साफ़ है — भारत के खिलौना उद्योग को 5 अरब डॉलर के घरेलू सपने से आगे बढ़कर 179 अरब डॉलर के वैश्विक बाज़ार में 25% हिस्सेदारी का दावा ठोकना होगा। निर्यात में 151.9% की छलाँग इस महत्वाकांक्षा की नींव है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 7 जुलाई 2026 को भारत के लिए 2032 तक $179 अरब के वैश्विक खिलौना बाज़ार में 25% हिस्सेदारी का लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया।
भारत का खिलौना निर्यात 2017-18 के $152.7 मिलियन से बढ़कर 2025-26 में $384.7 मिलियन पहुँचा — 151.9% से अधिक वृद्धि।
HSN 9503 श्रेणी में अमेरिका सबसे बड़ा बाज़ार; निर्यात चार गुना बढ़कर $111.9 मिलियन पहुँचा।
राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना (बजट 2025-26) के तहत विनिर्माण क्लस्टर, कौशल विकास और 'मेड इन इंडिया' ब्रांडिंग पर ज़ोर।
BIS ने निगरानी कड़ी की — केवल सुरक्षित और प्रमाणित खिलौनों को बाज़ार और हवाई अड्डों तक पहुँचने की अनुमति।
घरेलू खिलौना बाज़ार 2034 तक $5 अरब तक पहुँचने का अनुमान, लेकिन वित्त मंत्री ने इसे अपर्याप्त बताया।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 17वें टॉय बिज़ इंटरनेशनल बी2बी एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए भारतीय खिलौना उद्योग को महत्वाकांक्षी वैश्विक लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को 2032 तक 179 अरब डॉलर के अनुमानित वैश्विक खिलौना बाज़ार में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का संकल्प लेना चाहिए — एक लक्ष्य जो घरेलू बाज़ार की सीमाओं से कहीं परे है।

वैश्विक बनाम घरेलू: महत्वाकांक्षा की ज़रूरत

वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि भारत का घरेलू खिलौना बाज़ार 2034 तक 5 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, लेकिन यह आँकड़ा वैश्विक संभावनाओं के सामने बेहद छोटा है। उन्होंने कहा, "वैश्विक बाज़ार 2032 तक 179 अरब डॉलर का होने जा रहा है। ऐसे में हमें कहीं अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने चाहिए।" टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इस एक्सपो में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित थे।

गुणवत्ता मानकों और नियामकीय सुधारों की भूमिका

सीतारमण ने बताया कि सरकार द्वारा लागू किए गए कड़े गुणवत्ता मानकों ने उद्योग को नई दिशा दी है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने अपनी निगरानी और प्रवर्तन क्षमता को मज़बूत किया है ताकि केवल सुरक्षित और प्रमाणित खिलौने ही देश के बाज़ारों और हवाई अड्डों तक पहुँच सकें। उन्होंने कहा, "असुरक्षित खिलौनों को हवाई अड्डों और बाज़ारों तक पहुँचने की अनुमति नहीं दी गई।" यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब चीन से सस्ते और गुणवत्ताहीन खिलौनों का आयात भारतीय बाज़ार में लंबे समय तक एक चुनौती रहा है।

राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना: मेड इन इंडिया की नई इबारत

वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना का विस्तार से उल्लेख किया। इस योजना के अंतर्गत विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जाएँगे, कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा और एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाएगा जहाँ उच्च गुणवत्ता वाले, नवाचार-आधारित, टिकाऊ और भारतीय संस्कृति पर आधारित खिलौनों का निर्माण 'मेड इन इंडिया' ब्रांड के तहत हो। सीतारमण ने स्पष्ट किया, "हम केवल अधिक खिलौने बनाने की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि सभी विभाग मिलकर ऐसा ढाँचा तैयार कर रहे हैं जिससे खिलौना निर्माण के हर पहलू को प्रोत्साहन मिल सके।"

निर्यात में ऐतिहासिक उछाल: आँकड़े बोलते हैं

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत का खिलौना निर्यात 2017-18 के 152.7 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 384.7 मिलियन डॉलर पहुँच गया — यानी 151.9 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि। गौरतलब है कि यह वृद्धि उस दौर में हुई जब सरकार ने आयात पर सख्ती और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन की नीति अपनाई।

HSN 9503 श्रेणी के इलेक्ट्रॉनिक और गैर-इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों का निर्यात 77.35 मिलियन डॉलर से बढ़कर 200.89 मिलियन डॉलर हो गया — लगभग 160 प्रतिशत की वृद्धि। इस श्रेणी में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार रहा, जहाँ निर्यात चार गुना बढ़कर लगभग 111.9 मिलियन डॉलर पहुँचा। ब्रिटेन, पोलैंड, नीदरलैंड और जर्मनी भी प्रमुख बाज़ार रहे। वीडियो गेम कंसोल (HSN 9504) का निर्यात लगभग तीन गुना बढ़कर 46.75 मिलियन डॉलर और त्योहारी उत्पादों (HSN 9505) का निर्यात लगभग 130 प्रतिशत बढ़कर 137.03 मिलियन डॉलर पहुँचा।

आम जनता और उद्योग पर असर

सरकार के अनुसार, खिलौना उद्योग अब विनिर्माण, रोज़गार और उद्यमिता का महत्वपूर्ण स्रोत बनता जा रहा है। यह क्षेत्र देश भर के कारीगरों, निर्माताओं, व्यापारियों और छोटे व्यवसायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा कर रहा है। मज़बूत घरेलू माँग, सरकारी नीतियों का समर्थन, पारंपरिक शिल्प कौशल और वैश्विक स्तर पर भारतीय खिलौनों की बढ़ती स्वीकार्यता इस प्रगति के प्रमुख कारण बताए गए हैं। यदि 25% वैश्विक हिस्सेदारी का लक्ष्य हासिल होता है, तो यह भारतीय खिलौना उद्योग के लिए एक रूपांतरकारी पड़ाव होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना में रोज़गार और निर्यात को मापने का कोई सत्यापन-योग्य ढाँचा है। $384.7 मिलियन का निर्यात प्रभावशाली है, पर $179 अरब के 25% यानी लगभग $44.75 अरब तक पहुँचने के लिए यह अभी भी एक लंबी छलाँग है। चीन की वैश्विक खिलौना बाज़ार में दशकों पुरानी पकड़ को तोड़ने के लिए केवल BIS प्रवर्तन और क्लस्टर विकास पर्याप्त नहीं होंगे — डिज़ाइन नवाचार और बौद्धिक संपदा में निवेश की ज़रूरत है, जिसका इस भाषण में उल्लेख नहीं था।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्मला सीतारमण ने खिलौना उद्योग के लिए क्या लक्ष्य निर्धारित किया?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 7 जुलाई 2026 को कहा कि भारत को 2032 तक $179 अरब के वैश्विक खिलौना बाज़ार में 25% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। यह लक्ष्य भारत के $5 अरब के अनुमानित घरेलू बाज़ार से कहीं अधिक महत्वाकांक्षी है।
भारत का खिलौना निर्यात कितना बढ़ा है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत का खिलौना निर्यात 2017-18 के $152.7 मिलियन से बढ़कर 2025-26 में $384.7 मिलियन पहुँच गया, जो 151.9% से अधिक की वृद्धि है। इस वृद्धि में अमेरिका सबसे बड़ा बाज़ार रहा, जहाँ निर्यात चार गुना बढ़कर $111.9 मिलियन पहुँचा।
राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना क्या है और इसमें क्या शामिल है?
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना का उद्देश्य भारत को वैश्विक खिलौना निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसके तहत विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जाएँगे, कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा और 'मेड इन इंडिया' ब्रांड के तहत उच्च गुणवत्ता, नवाचार-आधारित और भारतीय संस्कृति पर आधारित खिलौनों का निर्माण किया जाएगा।
BIS ने खिलौना उद्योग में क्या भूमिका निभाई है?
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने अपनी निगरानी और प्रवर्तन क्षमता को मज़बूत किया है ताकि केवल सुरक्षित और प्रमाणित खिलौने ही देश के बाज़ारों और हवाई अड्डों तक पहुँच सकें। वित्त मंत्री के अनुसार, असुरक्षित और गैर-प्रमाणित आयातित खिलौनों पर इस सख्ती से घरेलू उद्योग को नई दिशा मिली है।
भारत के खिलौना निर्यात में कौन-से प्रमुख बाज़ार हैं?
HSN 9503 श्रेणी में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार रहा, जहाँ निर्यात चार गुना बढ़कर $111.9 मिलियन पहुँचा। इसके अलावा ब्रिटेन, पोलैंड, नीदरलैंड और जर्मनी भी प्रमुख बाज़ार रहे।
राष्ट्र प्रेस
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