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पीयूष गोयल का खिलौना उद्योग को आह्वान: 4 साल में निर्यात 10 गुना बढ़ाएं, QCO रहेगा बरकरार

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पीयूष गोयल का खिलौना उद्योग को आह्वान: 4 साल में निर्यात 10 गुना बढ़ाएं, QCO रहेगा बरकरार

सारांश

वैश्विक खिलौना बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी अभी मात्र 0.2–0.3% है, लेकिन पिछले 4 साल में 239% निर्यात वृद्धि के बाद वाणिज्य मंत्री गोयल ने अगले 4 साल में 10 गुना छलाँग का लक्ष्य रखा है — QCO को अटल रखते हुए और 9 FTA के ज़रिए 38 देशों के बाज़ार खोलने की रणनीति के साथ।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल ने 5 जुलाई 2026 को खिलौना उद्योग से अगले 4 वर्षों में निर्यात 10 गुना बढ़ाने का आह्वान किया।
वैश्विक खिलौना बाज़ार 120 अरब डॉलर का, भारत की हिस्सेदारी मात्र 0.2–0.3% ।
पिछले 4 वर्षों में भारत के खिलौना निर्यात में 239% की वृद्धि दर्ज हुई।
सरकार ने QCO वापस न लेने और डंपिंग-रोधी सुरक्षा जारी रखने का स्पष्ट आश्वासन दिया।
साढ़े तीन वर्षों में भारत ने 9 FTA किए; 38 देशों के बाज़ारों तक पहुँच सुलभ।
PPP मॉडल पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का सुझाव; न्यूज़ीलैंड FTA इसी वर्ष लागू होने की उम्मीद।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 5 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में भारतीय खिलौना उद्योग से अगले चार वर्षों में निर्यात को मौजूदा स्तर से 10 गुना बढ़ाने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने उद्योग को आश्वस्त किया कि अनिवार्य क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) को किसी भी स्थिति में वापस नहीं लिया जाएगा और सस्ते विदेशी आयात यानी डंपिंग से घरेलू उद्योग की पूरी सुरक्षा की जाएगी।

वैश्विक बाज़ार में भारत की सीमित हिस्सेदारी

17वें टॉय बिज़ इंटरनेशनल B2B एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि वैश्विक खिलौना बाज़ार करीब 120 अरब डॉलर का है, जबकि इसमें भारत की हिस्सेदारी मात्र 0.2 से 0.3 प्रतिशत के बीच है। उन्होंने इसे भारत के लिए एक विशाल अवसर बताया और कहा कि देश को वैश्विक बाज़ार में कहीं अधिक उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए।

गोयल ने रेखांकित किया कि पिछले चार वर्षों में भारत के खिलौना निर्यात में 239 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। हालाँकि, उनका कहना था कि उद्योग को इस उपलब्धि पर संतुष्ट नहीं रहना चाहिए — अगला लक्ष्य अगले चार वर्षों में मौजूदा निर्यात स्तर को 10 गुना तक ले जाना होना चाहिए।

मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने की अपील

गोयल ने उद्योग से भारत द्वारा हाल के वर्षों में किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत 9 FTA संपन्न कर चुका है, जिससे विकसित देशों के बाज़ारों तक पहुँच सुलभ हुई है।

उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योग को इन समझौतों के दायरे में आने वाले 38 देशों में प्रतिनिधिमंडल भेजने चाहिए और वहाँ के स्थानीय उद्योगों, सुपरमार्केट श्रृंखलाओं तथा ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ साझेदारी विकसित करनी चाहिए। इसके अलावा, न्यूज़ीलैंड के साथ प्रस्तावित FTA इसी वर्ष लागू होने की उम्मीद है, जबकि कनाडा, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC), मेक्सिको और ब्राज़ील के साथ भी व्यापार वार्ता तेज़ी से आगे बढ़ रही है।

QCO पर सरकार का कड़ा रुख

क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर को हटाने की कुछ उद्योग संगठनों की माँग को सीधे खारिज करते हुए गोयल ने कहा, "जब तक मैं हूँ, कोई भी QCO को नहीं हटाएगा। QCO लागू रहेगा और सरकार किसी भी देश से होने वाली अनुचित डंपिंग से भारतीय उद्योग की रक्षा करेगी।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल ही में लागू ट्रांजिशन फैसिलिटेशन (क्वालिटी कंट्रोल) ऑर्डर, 2026 केवल उद्योग को सीमित अवधि के लिए उत्पादन और निवेश बढ़ाने में सहूलियत देने के उद्देश्य से लाया गया है — इसका मतलब गुणवत्ता मानकों में किसी प्रकार की ढील नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि टॉयज़ (क्वालिटी कंट्रोल) ऑर्डर, 2020 के तहत देश में निर्मित और आयातित सभी खिलौनों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के सुरक्षा मानकों का पालन और ISI मार्क अनिवार्य है।

गुणवत्ता और नवाचार पर ज़ोर

गोयल ने उद्योग को सलाह दी कि अत्याधुनिक मशीनरी अपनाई जाए और उत्पाद गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का सुझाव दिया, जहाँ उत्पाद परीक्षण, डिज़ाइन विकास और नवाचार की सुविधाएँ एक छत के नीचे उपलब्ध हों। उनका तर्क था कि विदेशी कंपनियों की सफलता का आधार उनकी गुणवत्ता है, न कि कोई विशेष उत्पाद-लाभ — और भारतीय उद्योग को भी इसी मार्ग पर चलना होगा।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन के विकल्प के रूप में अपनी स्थिति मज़बूत कर रहा है। गोयल का यह संदेश स्पष्ट है: गुणवत्ता से समझौता किए बिना, FTA नेटवर्क का लाभ उठाते हुए, भारतीय खिलौना उद्योग को अगले चार वर्षों में वैश्विक बाज़ार में निर्णायक उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक निम्न आधार से आई है — वैश्विक बाज़ार में 0.2% हिस्सेदारी बताती है कि भारत अभी भी खिलौना निर्यात में एक छोटा खिलाड़ी है। 10 गुना वृद्धि का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, पर इसके लिए केवल नीतिगत आश्वासन नहीं, बल्कि डिज़ाइन क्षमता, आपूर्ति श्रृंखला विकास और ब्रांड-निर्माण में ठोस निवेश चाहिए। QCO पर कड़ा रुख सही दिशा में है — गुणवत्ता के बिना वैश्विक बाज़ार में टिकना असंभव है — लेकिन असली परीक्षा PPP सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी संस्थाओं को ज़मीन पर उतारने में होगी, जो अभी तक केवल घोषणाओं तक सीमित रही हैं।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने खिलौना उद्योग के लिए क्या लक्ष्य रखा है?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने खिलौना उद्योग से अगले 4 वर्षों में निर्यात को मौजूदा स्तर से 10 गुना बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने यह बात 5 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में 17वें टॉय बिज़ इंटरनेशनल B2B एक्सपो 2026 में कही।
क्या सरकार खिलौनों पर QCO हटाएगी?
नहीं। गोयल ने स्पष्ट कहा कि क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) बरकरार रहेगा और इसे वापस नहीं लिया जाएगा। हाल ही में लागू ट्रांजिशन फैसिलिटेशन ऑर्डर 2026 केवल उद्योग को उत्पादन बढ़ाने में अस्थायी सुविधा देने के लिए है, न कि गुणवत्ता मानकों में ढील देने के लिए।
भारत के खिलौना निर्यात की मौजूदा स्थिति क्या है?
पिछले 4 वर्षों में भारत के खिलौना निर्यात में 239% की वृद्धि हुई है। हालाँकि, 120 अरब डॉलर के वैश्विक खिलौना बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी अभी भी केवल 0.2 से 0.3 प्रतिशत के बीच है।
भारतीय खिलौना उद्योग FTA का लाभ कैसे उठा सकता है?
भारत ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में 9 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, जिनसे 38 देशों के बाज़ारों तक पहुँच आसान हुई है। गोयल ने उद्योग से इन देशों में प्रतिनिधिमंडल भेजने और स्थानीय सुपरमार्केट श्रृंखलाओं व ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ साझेदारी बनाने की अपील की।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का प्रस्ताव क्या है?
गोयल ने PPP मॉडल पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का सुझाव दिया, जहाँ उत्पाद परीक्षण, डिज़ाइन विकास और नवाचार की सुविधाएँ एक साथ उपलब्ध हों। इसका उद्देश्य भारतीय खिलौना निर्माताओं को वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने में सक्षम बनाना है।
राष्ट्र प्रेस
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