पीयूष गोयल का टोरंटो में कनाडाई कारोबारियों को न्योता, CEPA से ₹4 लाख करोड़ व्यापार का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 27 मई 2026 को टोरंटो में 'राजनीतिक पुनर्संतुलन से वाणिज्यिक परिणाम तक' शीर्षक वाले उद्घाटन मंत्री स्तरीय पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कनाडा के व्यापारिक और औद्योगिक नेतृत्व को भारत की विकास गाथा में सक्रिय भागीदार बनने का आमंत्रण दिया। इस सत्र में कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू भी उपस्थित रहे।
मुख्य घटनाक्रम
गोयल ने इस अवसर पर भारत में कारोबार सुगमता और निवेशक-अनुकूल वातावरण बनाने की दिशा में की जा रही निरंतर कोशिशों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को मज़बूत करने में एक अहम उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खोलेगा।
मंत्री ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी का अगला अध्याय आपसी विश्वास की नींव पर आगे बढ़ेगा और दोनों देशों की समृद्धि में योगदान देगा।
अब तक का सबसे बड़ा भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, गोयल कनाडा में अब तक के सबसे बड़े भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें 100 से अधिक कंपनियों के औद्योगिक प्रमुख शामिल हैं। ओटावा में उच्च स्तरीय व्यापार वार्ता के बाद, टोरंटो में उद्योग गोलमेज बैठकों और बी2बी मीटिंग के व्यापक कार्यक्रम का उद्देश्य मंत्री स्तरीय प्रतिबद्धताओं को ठोस व्यावसायिक साझेदारियों में बदलना है।
द्विपक्षीय व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
फिलहाल भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग $8.5 अरब डॉलर (करीब ₹70,000 करोड़) है। दोनों सरकारों ने इसे 2030 तक $50 अरब डॉलर (लगभग ₹4 लाख करोड़) तक पहुँचाने का साझा लक्ष्य तय किया है — यानी मौजूदा स्तर से लगभग छह गुना वृद्धि। यह लक्ष्य तभी संभव होगा जब CEPA वार्ता समयबद्ध तरीके से पूरी हो।
मोदी-कार्नी शिखर वार्ता की अगली कड़ी
यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच मार्च 2026 में नई दिल्ली में हुई शिखर वार्ता में तय एजेंडे को आगे बढ़ाता है। गौरतलब है कि यह 2025 के मध्य से दोनों देशों के बीच जारी उच्च स्तरीय कूटनीतिक और व्यापारिक संवाद की निरंतरता भी है, जो पिछले कुछ वर्षों में कूटनीतिक तनाव के बाद संबंधों के पुनर्निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
आगे क्या
तीन दिवसीय कनाडा दौरे का केंद्रीय लक्ष्य CEPA वार्ता को गति देना है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के लिए एक दीर्घकालिक संरचनात्मक ढाँचा तैयार करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते के लागू होने पर फार्मास्युटिकल, आईटी, कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खुल सकते हैं।