पीयूष गोयल 150 उद्योगपतियों के साथ 25 मई को कनाडा रवाना, CEPA वार्ता और $70 अरब व्यापार लक्ष्य पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 25 से 27 मई तक कनाडा के दौरे पर जाएंगे, जिसमें उनके साथ लगभग 150 भारतीय उद्योगपतियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल होगा। यह दौरा भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की वार्ता को गति देने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर (करीब ₹4.65 लाख करोड़) तक पहुँचाने के लक्ष्य के साथ हो रहा है।
दौरे का कार्यक्रम और एजेंडा
मंत्री गोयल 25 मई को ओटावा में और 26 से 27 मई को टोरंटो में विभिन्न व्यापारिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इसी दौरान 25 से 29 मई तक ओटावा में CEPA वार्ता का अगला दौर भी निर्धारित है। वार्ता में तकनीक, फूड प्रोसेसिंग, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) में सहयोग पर विशेष ज़ोर रहेगा।
यह यात्रा मार्च 2026 में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा तय किए गए एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए की जा रही है। उसी यात्रा में CEPA के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बाद वार्ता का पहला दौर मार्च में वर्चुअल माध्यम से और दूसरा दौर 8 मई को संपन्न हुआ।
व्यापार और निवेश के आँकड़े
वर्तमान में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025 में 8.5 अरब डॉलर पर है। दोनों देश अगले पाँच वर्षों में इसे 50 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। गोयल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि कनाडाई पेंशन फंड्स और कंपनियाँ भारत में करीब 100 अरब डॉलर का निवेश कर चुकी हैं।
फिलहाल लगभग 600 कनाडाई कंपनियाँ भारत में सक्रिय हैं और दोनों देश इस संख्या को बढ़ाकर 1,000 तक ले जाना चाहते हैं। गोयल के अनुसार, भारत को उम्मीद है कि ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स को शामिल करते हुए एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया जाएगा।
उर्वरक सुरक्षा पर सरकार का रुख
दौरे से पहले गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि उर्वरकों की बढ़ी कीमतों का बोझ किसानों पर नहीं डाला गया है और पूरा खर्च केंद्र सरकार ने उठाया है। सरकार के अनुसार, देश में फिलहाल 199.65 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक मौजूद है, जो मौसमी माँग के 51 प्रतिशत से अधिक को पूरा करता है — सामान्य बफर स्तर 33 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक।
हालिया संकट के बाद घरेलू उत्पादन और आयात को तेज़ी से बढ़ाया गया, जिससे कुल उपलब्धता में लगभग 97 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई। इसमें घरेलू उत्पादन का योगदान 76.78 लाख मीट्रिक टन और बंदरगाहों तक पहुँचे आयात का योगदान 19.94 लाख मीट्रिक टन रहा।
भारत की व्यापार नीति का व्यापक संदर्भ
गोयल ने कहा, 'हर क्षेत्र में भारत ने दुनिया को दिखाया है कि वह आत्मविश्वासी अर्थव्यवस्था है, जो आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही है और दुनिया के साथ समान एवं निष्पक्ष शर्तों पर संबंध बना रही है।' उन्होंने इसे भारत द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार समझौतों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाँच देशों की सफल यात्रा से जोड़ा।
गोयल ने यह भी कहा, 'भारत की मौजूदा स्थिति संयोग नहीं है — यह पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किए गए संरचनात्मक सुधारों, केंद्रित रणनीतियों और परिवर्तनकारी पहलों का परिणाम है।' दोनों देश 2026 के अंत तक CEPA को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।