भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौता: साल के अंत तक FTA पूरा करने का लक्ष्य, गोयल-कार्नी की बैठक में बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच ओटावा में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद दोनों देशों ने भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को 2025 के अंत तक या उससे पहले अंतिम रूप देने का संकल्प जताया है। दोनों पक्षों ने ऊर्जा, कृषि-खाद्य, प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर तलाशने पर भी सहमति जताई।
बैठक में क्या हुआ
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "हम भारत के साथ एक फ्री ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं। यह कनाडा के कामगारों और बिजनेस के लिए गेम चेंजर होगा, जिससे एक बहुत बड़ा नया बाजार खुलेगा।" कार्नी ने इस समझौते को 'कनाडाई कामगारों और व्यवसायों के लिए गेम चेंजर' बताया।
मंत्री गोयल ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कनाडा के प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं दीं और कार्नी की हाल की भारत यात्रा को सकारात्मक मोड़ के रूप में याद किया। गोयल ने कहा, "यह रिश्ते में पूरी तरह बदलाव की दिशा में एक नई शुरुआत है, जिसमें नए लक्ष्य और नई योजनाएं 'मिशन मोड' में तय की जा रही हैं।"
व्यापार विस्तार की रूपरेखा
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने ओटावा में एक संयुक्त प्रेस वार्ता में बताया कि बातचीत के दो दौर पहले ही पूरे हो चुके हैं और दोनों देश इस समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमने कनाडा के लोगों से वादा किया था कि हम तेजी से काम करेंगे।"
सिद्धू ने यह भी बताया कि कनाडा अपने व्यापारिक साझेदारों को विविध बनाना चाहता है और लगभग $300 अरब के अतिरिक्त गैर-अमेरिकी निर्यात के अवसर खोलना चाहता है। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए कहा कि नई दिल्ली के साथ संबंध मजबूत करना कनाडा के आर्थिक लक्ष्यों के लिए अनिवार्य है।
प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग
अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद, कृषि मंत्री हीथ मैकडोनाल्ड और व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू से अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में व्यापार, खाद्य सुरक्षा, एग्री-टेक, स्थिरता, तकनीक और निवेश सहयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
विदेश मंत्री अनीता आनंद ने कहा कि उन्होंने "व्यापार संबंधों को मजबूत और विस्तार देने" पर बातचीत की, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों, कामगारों और निवेशकों के लिए नए अवसर बन सकें। गौरतलब है कि गोयल कनाडा में अब तक के सबसे बड़े भारतीय बिजनेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, जो इस द्विपक्षीय पहल की गंभीरता को रेखांकित करता है।
2030 का व्यापार लक्ष्य और आगे की राह
मंत्री गोयल ने बताया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने वार्ताकारों को निर्देश दिया है कि 2025 के अंत तक या उससे पहले व्यापक दृष्टिकोण के साथ मुक्त व्यापार समझौता पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रख रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और कनाडा के संबंध पिछले कुछ वर्षों में राजनयिक तनाव के कारण प्रभावित हुए थे। कार्नी की हाल की भारत यात्रा और अब गोयल की ओटावा यात्रा को इस रिश्ते की 'रीसेट' की दिशा में ठोस कदम के रूप में देखा जा रहा है। गोयल के शब्दों में, दोनों देश "तेजी से आगे बढ़कर ऐसे नतीजे देने में पूरी तरह सक्षम" हैं जो सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के लिए फायदेमंद हों।