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भारत-कनाडा संबंध नए दोस्ताना दौर में, पीयूष गोयल की यात्रा से पहले उच्चायुक्त पटनायक का बड़ा बयान

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भारत-कनाडा संबंध नए दोस्ताना दौर में, पीयूष गोयल की यात्रा से पहले उच्चायुक्त पटनायक का बड़ा बयान

सारांश

तनाव के दो साल बाद भारत-कनाडा रिश्ते नई करवट ले रहे हैं। उच्चायुक्त पटनायक का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियाँ फिर से संपर्क में हैं, खालिस्तानी तत्व हाशिए पर हैं और पीयूष गोयल की अगुवाई में 100+ कारोबारियों का दल कनाडा पहुँचने वाला है — यह दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल होगा।

मुख्य बातें

कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के.
पटनायक ने कहा कि भारत-कनाडा संबंध 'दुश्मनी से बहुत दोस्ताना' हो गए हैं।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में 100 से अधिक भारतीय कारोबारियों का प्रतिनिधिमंडल कनाडा जाएगा — अब तक का सबसे बड़ा।
द्विपक्षीय व्यापार फिलहाल ~25 अरब अमेरिकी डॉलर ; 2030-31 तक 50 अरब डॉलर का लक्ष्य।
दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत हुई; पुलिस व जाँच एजेंसियाँ आपस में संपर्क में।
पटनायक के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्नी के सहयोग से खालिस्तान समर्थक तत्वों को हाशिए पर धकेला गया।
भविष्य के सहयोग क्षेत्र: ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, AI, क्वांटम रिसर्च, रक्षा और कृषि-खाद्य।

कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने कहा है कि भारत-कनाडा संबंध तनाव के लंबे दौर से उबरकर अब एक नए और 'बेहद दोस्ताना' चरण में प्रवेश कर चुके हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की कनाडा यात्रा से ठीक पहले दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में पटनायक ने कहा कि दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियाँ, राजनीतिक नेतृत्व और कारोबारी समुदाय अब मिलकर काम कर रहे हैं।

संबंधों में बदलाव की तस्वीर

पटनायक ने कहा, "पिछले कुछ महीनों में संबंध सच में दुश्मनी से बहुत दोस्ताना हो गए हैं। अभी सब कुछ ठीक चल रहा है।" उन्होंने इसे द्विपक्षीय रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। गौरतलब है कि 2023 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो द्वारा ब्रिटिश कोलंबिया में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की कथित संलिप्तता का आरोप लगाने के बाद दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। भारत ने उन आरोपों को "बेतुका" करार देते हुए खारिज किया था।

पीयूष गोयल की ऐतिहासिक यात्रा

उच्चायुक्त के अनुसार, पीयूष गोयल के नेतृत्व में 100 से अधिक भारतीय कारोबारियों का प्रतिनिधिमंडल कनाडा पहुँचेगा — जिसे पटनायक ने अब तक का सबसे बड़ा ऐसा प्रतिनिधिमंडल बताया। यह प्रतिनिधिमंडल कनाडाई उद्योग संगठनों, पेंशन फंड, बैंकों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और भारतीय मूल के समुदाय के नेताओं से मुलाकात करेगा। पटनायक ने कहा, "एक साल पहले तक कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि कोई भारतीय मंत्री 100 से ज़्यादा प्रतिनिधियों के साथ कनाडा आएगा।"

व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य

पटनायक ने बताया कि फिलहाल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 32 अरब कनाडाई डॉलर (लगभग 25 अरब अमेरिकी डॉलर) का है। उन्होंने कहा, "हम 2030 या 2031 तक इसे लगभग 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने की उम्मीद कर रहे हैं।" गोयल की यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर बातचीत को आगे बढ़ाना भी है। भविष्य के प्रमुख सहयोग क्षेत्रों में ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक, कृषि-खाद्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम रिसर्च और रक्षा शामिल हैं।

सुरक्षा सहयोग और चरमपंथ पर कार्रवाई

पटनायक ने बताया कि दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत हो चुकी है और पुलिस बल व जाँच एजेंसियाँ आपस में संपर्क में हैं। खालिस्तान समर्थक चरमपंथी और आपराधिक नेटवर्क का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कनाडा अब इसे अपना घरेलू मुद्दा मानने लगा है। उनके अनुसार, कुछ चरमपंथी समूह अब विचारधारा से ज़्यादा हथियारों की तस्करी, ड्रग्स, मानव तस्करी, वसूली और संगठित अपराध जैसी "आर्थिक गतिविधियों" के ज़रिए सक्रिय हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री कार्नी के सहयोग से पिछले छह-सात महीनों में हम इन तत्वों को फिर से हाशिए पर धकेलने में सफल हुए हैं।"

आव्रजन और भारतीय समुदाय

आव्रजन नीति पर पटनायक ने स्वीकार किया कि कनाडा की हालिया नीतियों का असर कई भारतीयों पर पड़ा है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके पीछे भारत के प्रति कोई नकारात्मक भावना नहीं है। उन्होंने कहा, "उन्होंने आव्रजन प्रणाली को ऐसे लोगों के हाथों में जाने दिया, जो उसका दुरुपयोग कर सकते थे। अब वे ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें अच्छे प्रवासियों का लाभ मिले और गलत तत्वों को रोका जा सके।" उन्होंने भारतीयों को आश्वस्त किया कि कनाडा में उनकी छवि सकारात्मक बनी हुई है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच एक नई शुरुआत की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि निज्जर हत्याकांड की जाँच अभी भी जारी है — और उसका कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है। व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तभी व्यावहारिक होगा जब CEPA वार्ता ठोस समयसीमा में आगे बढ़े, जो वर्षों से अटकी है। 100 कारोबारियों का प्रतिनिधिमंडल प्रतीकात्मक रूप से शक्तिशाली है, परंतु असली परीक्षा यह होगी कि इस दौरे से कितने बाध्यकारी समझौते निकलते हैं — और खालिस्तानी नेटवर्क पर कनाडा की कार्रवाई कितनी टिकाऊ साबित होती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-कनाडा संबंध क्यों खराब हुए थे और अब कैसे सुधरे?
2023 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने ब्रिटिश कोलंबिया में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की कथित संलिप्तता का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज किया। उच्चायुक्त पटनायक के अनुसार, नई कनाडाई सरकार के सहयोगात्मक रुख और सुरक्षा एजेंसियों के बीच फिर से संवाद शुरू होने से संबंध अब 'बेहद दोस्ताना' चरण में पहुँच गए हैं।
पीयूष गोयल की कनाडा यात्रा का उद्देश्य क्या है?
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 100 से अधिक भारतीय कारोबारियों के साथ कनाडा जा रहे हैं। यात्रा का मुख्य उद्देश्य आर्थिक सहयोग को गति देना और प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर बातचीत को आगे बढ़ाना है।
भारत-कनाडा व्यापार का मौजूदा स्तर क्या है और लक्ष्य क्या है?
उच्चायुक्त पटनायक के अनुसार, दोनों देशों के बीच अभी द्विपक्षीय व्यापार करीब 32 अरब कनाडाई डॉलर (लगभग 25 अरब अमेरिकी डॉलर) है। इसे 2030-31 तक लगभग 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथ के मुद्दे पर क्या प्रगति हुई है?
उच्चायुक्त पटनायक ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्नी के सहयोग से पिछले छह-सात महीनों में खालिस्तान समर्थक तत्वों को हाशिए पर धकेलने में सफलता मिली है। कनाडा अब इस समस्या को अपना घरेलू मुद्दा मानने लगा है और दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियाँ आपस में संपर्क में हैं।
कनाडा की आव्रजन नीति का भारतीयों पर क्या असर है?
पटनायक ने माना कि कनाडा की हालिया आव्रजन नीतियों का असर कई भारतीयों पर पड़ा है, लेकिन इसके पीछे भारत के प्रति कोई नकारात्मक भावना नहीं है। उन्होंने कहा कि कनाडा अब एक ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है जिसमें योग्य प्रवासियों को लाभ मिले और प्रणाली के दुरुपयोग को रोका जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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