10 जुलाई 2026
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खालिस्तान नेटवर्क पर कनाडा की कार्रवाई, भारतीय उच्चायुक्त पटनायक बोले — सुरक्षा सहयोग में बड़ा सुधार

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खालिस्तान नेटवर्क पर कनाडा की कार्रवाई, भारतीय उच्चायुक्त पटनायक बोले — सुरक्षा सहयोग में बड़ा सुधार

सारांश

निज्जर विवाद के बाद तनाव की चरम सीमा तक पहुँचे भारत-कनाडा संबंध अब नई राह पर हैं। उच्चायुक्त पटनायक का कहना है कि दोनों देशों की एजेंसियाँ संयुक्त अभियान चला रही हैं और खालिस्तान समर्थक नेटवर्क अब विचारधारा नहीं, बल्कि संगठित अपराध के आधार पर चल रहे हैं।

मुख्य बातें

भारतीय उच्चायुक्त दिनेश के.
पटनायक ने 25 मई 2026 को कहा कि कनाडा भारत की सुरक्षा चिंताओं पर गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है।
दोनों देशों की पुलिस, जाँच और खुफिया एजेंसियाँ अब नियमित सूचना साझाकरण और संयुक्त ऑपरेशन चला रही हैं।
पटनायक के अनुसार खालिस्तान समर्थक नेटवर्क अब विचारधारा से अधिक संगठित अपराध — ड्रग तस्करी, जबरन वसूली, मानव तस्करी — पर आधारित हो गए हैं।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सक्रिय भूमिका से पिछले छह-सात महीनों में उग्रवादी तत्वों को हाशिये पर धकेला गया है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 25-27 मई को कनाडा के दौरे पर हैं, साथ में अब तक का सबसे बड़ा भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल।

कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने 25 मई 2026 को कहा कि कनाडा अब भारत की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से ले रहा है और खालिस्तान समर्थक चरमपंथी तथा आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निज्जर विवाद के बाद बिगड़े द्विपक्षीय संबंधों में पिछले छह-सात महीनों में उल्लेखनीय सुधार आया है।

सुरक्षा सहयोग में नई शुरुआत

पटनायक ने बताया कि दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच अब नियमित संवाद स्थापित हो चुका है। उन्होंने कहा, 'पहले हम एक-दूसरे से बात करने से मना कर रहे थे। अभी हमारी रेगुलर बातचीत हो रही है।' राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर भी आदान-प्रदान हो चुका है और पुलिस बल, जाँच एजेंसियाँ तथा खुफिया संस्थाएँ सूचनाएँ साझा कर संयुक्त अभियान चला रही हैं।

उच्चायुक्त ने कहा, 'हर कोई एक-दूसरे से बात कर रहा है, जानकारी साझा कर रहा है, और साथ में संयुक्त ऑपरेशन कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए सुरक्षित हैं।'

खालिस्तान समर्थक नेटवर्क की बदलती प्रकृति

पटनायक ने माना कि कनाडा में अभी भी उग्रवादी समूह सक्रिय हैं, लेकिन उनकी प्रकृति बदल गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेटवर्क अब विचारधारा से अधिक संगठित अपराध के आधार पर संचालित हो रहे हैं। उनके अनुसार, 'यह एक ऐसी चीज बन गई है, जो विचारधारा से ज्यादा आर्थिक गतिविधि है।'

उन्होंने इन समूहों पर बंदूक चलाने, ड्रग तस्करी, मानव तस्करी, जबरन वसूली तथा भारत में आतंकवादी अभियान चलाने के आरोप लगाए। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में कनाडाई सरकार की सक्रिय मदद से इन तत्वों को हाशिये पर धकेलने में सफलता मिली है।

भारत की समझ और कनाडा की कानूनी सीमाएँ

पटनायक ने स्वीकार किया कि भारत को अब कनाडा की संवैधानिक बाधाओं — विशेष रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता — की बेहतर समझ हो गई है। उन्होंने कहा, 'भारतीय पक्ष को यह समझ है कि कनेडियाई असल में संस्थागत रूप से खालिस्तानी आंदोलन का समर्थन नहीं कर रहे थे। वे इसे रोक नहीं पा रहे हैं क्योंकि उनकी अभिव्यक्ति की आज़ादी और सूचना की स्वतंत्रता बहुत मजबूत हैं।'

भारत ने कनाडा से लगातार शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक उग्रवाद के बीच स्पष्ट अंतर करने की अपील की है। उच्चायुक्त के अनुसार, 'हमें विरोध की उतनी चिंता नहीं है जितनी उनके द्वारा की जा रही हिंसा, सड़कों पर लाई जा रही नफरत और प्रोपेगेंडा की है।'

व्यापारिक संबंधों की नई शुरुआत

यह बयान केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के 25 से 27 मई तक के कनाडा दौरे से ठीक पहले आया है। इस दौरे में अब तक का सबसे बड़ा भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई गति देने का संकेत है। पटनायक ने कहा, 'सरकारों के बीच पहले की दिक्कतें अब नहीं रहीं।'

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-कनाडा संबंध 2023 में निज्जर हत्याकांड के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। गौरतलब है कि यह सुधार कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, छात्र आदान-प्रदान और प्रवासी भारतीय समुदाय के हित सीधे तौर पर जुड़े हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'संयुक्त ऑपरेशन' और 'नियमित संवाद' के दावों की सार्वजनिक पुष्टि अभी नहीं हुई है — और यही असली कसौटी है। निज्जर मामले में कनाडा की जाँच अभी भी जारी है, और भारत आधिकारिक तौर पर किसी भी संलिप्तता से इनकार करता है; इस विरोधाभास को नज़रअंदाज़ करके 'संबंध सामान्य हो गए' कहना जल्दबाज़ी होगी। पीयूष गोयल के दौरे का समय बताता है कि दोनों सरकारें आर्थिक एजेंडे को सुरक्षा तनाव से अलग रखना चाहती हैं — यह व्यावहारिक कूटनीति है, लेकिन इसे स्थायी सुलह नहीं माना जाना चाहिए।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-कनाडा सुरक्षा सहयोग में हाल में क्या बदलाव आया है?
उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक के अनुसार, दोनों देशों की पुलिस, जाँच और खुफिया एजेंसियाँ अब नियमित सूचना साझाकरण और संयुक्त अभियान चला रही हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर भी बैठकें हो चुकी हैं, जो निज्जर विवाद के बाद पूरी तरह ठप हो गई थीं।
कनाडा में खालिस्तान समर्थक नेटवर्क की प्रकृति कैसे बदली है?
पटनायक के अनुसार ये नेटवर्क अब विचारधारा से अधिक संगठित अपराध — ड्रग तस्करी, बंदूक चलाना, मानव तस्करी और जबरन वसूली — पर आधारित हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह 'आर्थिक गतिविधि' बन गई है।
कनाडा खालिस्तानी गतिविधियों को पूरी तरह क्यों नहीं रोक पाता?
पटनायक ने स्पष्ट किया कि कनाडा की मजबूत अभिव्यक्ति और सूचना की स्वतंत्रता के कारण सरकार के लिए कानूनी रूप से इन गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत को अब इन संवैधानिक सीमाओं की बेहतर समझ हो गई है।
पीयूष गोयल का कनाडा दौरा कब है और इसका क्या महत्व है?
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 25 से 27 मई तक कनाडा के दौरे पर हैं। उनके साथ अब तक का सबसे बड़ा भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी है, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने का संकेत है।
निज्जर विवाद के बाद भारत-कनाडा संबंध अभी किस स्थिति में हैं?
पटनायक के अनुसार सरकारों के बीच पहले की दिक्कतें अब नहीं रहीं और संबंध 'अच्छी जगह' पर हैं। हालाँकि निज्जर मामले की जाँच अभी भी जारी है और कुछ उग्रवादी तत्व अभी भी सक्रिय हैं, लेकिन कूटनीतिक और सुरक्षा स्तर पर संवाद बहाल हो चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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