खालिस्तान नेटवर्क पर कनाडा की कार्रवाई, भारतीय उच्चायुक्त पटनायक बोले — सुरक्षा सहयोग में बड़ा सुधार
सारांश
मुख्य बातें
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने 25 मई 2026 को कहा कि कनाडा अब भारत की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से ले रहा है और खालिस्तान समर्थक चरमपंथी तथा आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निज्जर विवाद के बाद बिगड़े द्विपक्षीय संबंधों में पिछले छह-सात महीनों में उल्लेखनीय सुधार आया है।
सुरक्षा सहयोग में नई शुरुआत
पटनायक ने बताया कि दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच अब नियमित संवाद स्थापित हो चुका है। उन्होंने कहा, 'पहले हम एक-दूसरे से बात करने से मना कर रहे थे। अभी हमारी रेगुलर बातचीत हो रही है।' राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर भी आदान-प्रदान हो चुका है और पुलिस बल, जाँच एजेंसियाँ तथा खुफिया संस्थाएँ सूचनाएँ साझा कर संयुक्त अभियान चला रही हैं।
उच्चायुक्त ने कहा, 'हर कोई एक-दूसरे से बात कर रहा है, जानकारी साझा कर रहा है, और साथ में संयुक्त ऑपरेशन कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए सुरक्षित हैं।'
खालिस्तान समर्थक नेटवर्क की बदलती प्रकृति
पटनायक ने माना कि कनाडा में अभी भी उग्रवादी समूह सक्रिय हैं, लेकिन उनकी प्रकृति बदल गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेटवर्क अब विचारधारा से अधिक संगठित अपराध के आधार पर संचालित हो रहे हैं। उनके अनुसार, 'यह एक ऐसी चीज बन गई है, जो विचारधारा से ज्यादा आर्थिक गतिविधि है।'
उन्होंने इन समूहों पर बंदूक चलाने, ड्रग तस्करी, मानव तस्करी, जबरन वसूली तथा भारत में आतंकवादी अभियान चलाने के आरोप लगाए। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में कनाडाई सरकार की सक्रिय मदद से इन तत्वों को हाशिये पर धकेलने में सफलता मिली है।
भारत की समझ और कनाडा की कानूनी सीमाएँ
पटनायक ने स्वीकार किया कि भारत को अब कनाडा की संवैधानिक बाधाओं — विशेष रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता — की बेहतर समझ हो गई है। उन्होंने कहा, 'भारतीय पक्ष को यह समझ है कि कनेडियाई असल में संस्थागत रूप से खालिस्तानी आंदोलन का समर्थन नहीं कर रहे थे। वे इसे रोक नहीं पा रहे हैं क्योंकि उनकी अभिव्यक्ति की आज़ादी और सूचना की स्वतंत्रता बहुत मजबूत हैं।'
भारत ने कनाडा से लगातार शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक उग्रवाद के बीच स्पष्ट अंतर करने की अपील की है। उच्चायुक्त के अनुसार, 'हमें विरोध की उतनी चिंता नहीं है जितनी उनके द्वारा की जा रही हिंसा, सड़कों पर लाई जा रही नफरत और प्रोपेगेंडा की है।'
व्यापारिक संबंधों की नई शुरुआत
यह बयान केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के 25 से 27 मई तक के कनाडा दौरे से ठीक पहले आया है। इस दौरे में अब तक का सबसे बड़ा भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई गति देने का संकेत है। पटनायक ने कहा, 'सरकारों के बीच पहले की दिक्कतें अब नहीं रहीं।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-कनाडा संबंध 2023 में निज्जर हत्याकांड के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। गौरतलब है कि यह सुधार कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, छात्र आदान-प्रदान और प्रवासी भारतीय समुदाय के हित सीधे तौर पर जुड़े हैं।