क्या कनाडा में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक होंगे?

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क्या कनाडा में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक होंगे?

Key Takeaways

  • दिनेश के. पटनायक को कनाडा में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है।
  • यह नियुक्ति पिछले तनावों के बाद हुई है।
  • भारत और कनाडा के संबंधों को बहाल करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • पटनायक का कार्यभार जल्द ही संभालने की उम्मीद है।
  • उच्चायुक्तों को जल्द बहाल करने पर सहमति बनी है।

नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। स्पेन में भारत के राजदूत दिनेश के. पटनायक को कनाडा में अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस नियुक्ति की घोषणा की।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1990 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के वरिष्ठ अधिकारी दिनेश के. पटनायक (जो वर्तमान में स्पेन में भारत के राजदूत हैं) को कनाडा में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पटनायक के जल्द ही अपने नए पद का कार्यभार संभालने की उम्मीद है।

यह नियुक्ति नई दिल्ली द्वारा पिछले उच्चायुक्त को ओटावा से वापस बुलाए जाने के 10 महीने बाद हुई है, जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की भारत के प्रति 'लगातार शत्रुता' के कारण राजनयिक तनाव बढ़ गया था।

ट्रूडो के कार्यकाल में कनाडा में चरमपंथ और हिंसा के माहौल का हवाला देते हुए भारत ने अपने उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा को वापस बुला लिया था।

भारत और कनाडा के रिश्ते तब और बिगड़ गए, जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में दावा किया कि उनके पास खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता के 'पुख्ता आरोप' हैं।

इसके बाद एक बड़ा राजनयिक विवाद खड़ा हो गया, जब कनाडा ने भारत के उच्चायुक्त और कुछ अन्य भारतीय राजनयिकों को निज्जर की मौत की जांच में 'संदिग्ध' बताया।

भारत ने इन आरोपों को 'बेतुका' तथा 'राजनीति से प्रेरित' बताया और कनाडा पर आरोप लगाया कि वह अपने देश में भारत विरोधी और कट्टरपंथी ताकतों को जगह दे रहा है।

विदेश मंत्रालय ने 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में कनाडाई चार्ज डी'अफेयर्स को तलब करने के बाद बयान जारी कर कहा था, "हमें वर्तमान कनाडाई सरकार की उनके (राजनयिकों) सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता पर कोई भरोसा नहीं है। इसलिए, भारत सरकार ने उच्चायुक्त और अन्य लक्षित राजनयिकों तथा अधिकारियों को वापस बुलाने का फैसला किया है। यह भी बताया गया कि भारत ट्रूडो सरकार के भारत के खिलाफ चरमपंथ, हिंसा और अलगाववाद के समर्थन के जवाब में आगे कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।"

कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा हिंदुओं और उनके पूजा स्थलों को खुले तौर पर निशाना बनाए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्रूडो सरकार की इन समूहों के प्रति नरमी और कनाडाई पीएम के समर्थन भरे बयानों पर चुप्पी तोड़ी, जो ऐसे गुटों को बढ़ावा दे रहे थे।

हालांकि, मार्क कार्नी के कनाडाई प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत-कनाडा संबंधों को बहाल करने के लिए कुछ सुनियोजित कदम उठाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप पटनायक की नियुक्ति हुई है।

कार्नी ने जून में पीएम मोदी को कनानास्किस में जी7 आउटरीच शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया और दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्जनन देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक की थी।

18 जून की इस बैठक को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 'बेहद सकारात्मक और रचनात्मक' बताया था। प्रारंभिक कदम के रूप में दोनों नेताओं ने जल्द से जल्द उच्चायुक्तों को बहाल करने पर सहमति जताई थी।

मिस्री ने कहा, "प्रधानमंत्रियों ने इस बहुत महत्वपूर्ण रिश्ते में स्थिरता बहाल करने के लिए सुनियोजित कदम उठाने पर सहमति जताई और पहला कदम यह था कि जल्द से जल्द एक-दूसरे की राजधानियों में उच्चायुक्तों को बहाल किया जाए। अन्य राजनयिक कदम उचित समय पर उठाए जाएंगे।"

Point of View

जो दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। यह कदम भारत के विदेश नीति के दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

दिनेश के. पटनायक को कब नियुक्त किया गया?
उन्हें 28 अगस्त को कनाडा में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया।
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त का क्या महत्व है?
यह नियुक्ति भारत और कनाडा के बीच राजनयिक संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
पटनायक की नियुक्ति क्यों हुई?
यह नियुक्ति पिछले उच्चायुक्त को वापस बुलाए जाने के 10 महीने बाद हुई है।
भारत और कनाडा के बीच तनाव का कारण क्या है?
कनाडा के प्रधानमंत्री ने भारत पर खालिस्तानी आतंकी की हत्या में संलिप्तता के आरोप लगाए थे।
क्या यह नियुक्ति भारत-कनाडा के रिश्तों को बेहतर कर सकती है?
हां, यह नियुक्ति दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में सहायक हो सकती है।