जदयू विधायक श्याम रजक: 'बिहार में एनडीए पांडवों की तरह एकजुट', मोदी को बताया 'विश्व शांतिदूत'
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने 10 जुलाई 2026 को पटना में बिहार एनडीए की बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पाँच घटक दलों की एकजुटता 'पांडवों' जैसी अटूट है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस सदी का 'विश्व शांतिदूत' करार दिया।
मोदी को 'विश्व शांतिदूत' क्यों बताया
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों पर टिप्पणी करते हुए श्याम रजक ने कहा, 'अगर मौजूदा सदी में किसी को विश्व शांति का दूत कहा जा सकता है, तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। उन्होंने शांति का संदेश फैलाने के लिए दुनिया भर की यात्रा की है। भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहा है और उन्होंने उसी भावना के साथ काम किया है।' रजक ने यह भी जोड़ा कि मोदी भारत के व्यापार और आर्थिक संबंधों को मज़बूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिसके फलस्वरूप भारत आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है।
एनडीए की एकजुटता पर बयान
बिहार एनडीए की बैठक को लेकर श्याम रजक ने कहा, 'बिहार में एनडीए के पाँच दलों का गठबंधन है — पांडवों की तरह इस गठबंधन में एकजुटता है। यह एकता बार-बार दिखाई और महसूस कराई गई है।' उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव के नामांकन सभा का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें एनडीए के तमाम नेताओं ने एकजुटता का संदेश दिया।
बैठक का उद्देश्य और एजेंडा
रजक ने बताया कि इस बैठक का मूल उद्देश्य जिला अध्यक्षों से ज़मीनी फीडबैक लेना और जिला स्तर पर समन्वय को और सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि 'एनडीए को कैसे मज़बूत किया जाए' — इस पर विस्तृत मूल्यांकन होगा। बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा अन्य घटक दलों के नेताओं के उपस्थित रहने की बात कही गई।
अखिलेश यादव की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की 'जो सनातन है, वही समाजवाद है' वाली टिप्पणी पर श्याम रजक ने कहा कि अखिलेश ने कोई गलत बात नहीं कही। उन्होंने तर्क दिया, 'समाजवाद का अर्थ है — सबकी उन्नति और सबके बीच समानता; और सनातन भी यही कहता है कि सब मिलकर चलें — एकता में ही वृद्धि है।' यह बयान उल्लेखनीय है क्योंकि यह एनडीए और विपक्षी खेमे के बीच वैचारिक संवाद की एक असामान्य मिसाल पेश करता है। आने वाले दिनों में बांकीपुर उपचुनाव और बिहार की राजनीतिक सरगर्मियाँ एनडीए की इस एकजुटता की असली परीक्षा लेंगी।