राजस्थान में ओबीसी सर्वे शुरू: 51,168 गणनाकर्ता करेंगे डिजिटल डेटा संग्रह, 23 जुलाई तक पूरा होगा
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान में आगामी पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) परिवारों का राज्यव्यापी डिजिटल सर्वेक्षण 10 जुलाई 2026 को औपचारिक रूप से शुरू हो गया। राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग द्वारा संचालित यह सर्वे स्थानीय निकायों में आरक्षण का कानूनी रूप से वैध आधार तैयार करने के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।
सर्वे की कार्यप्रणाली और दायरा
यह सर्वेक्षण राजधारा सर्वे मोबाइल ऐप के माध्यम से पूरी तरह डिजिटल तरीके से संचालित किया जा रहा है। कुल 51,168 सरकारी गणनाकर्ता राज्य के हर जिले में घर-घर जाकर ओबीसी परिवारों की सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज करेंगे। सर्वेक्षण की अंतिम तिथि 23 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है और आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस समय सीमा को बढ़ाने की बहुत कम गुंजाइश है।
आयोग के सचिव अशोक कुमार जैन ने बताया कि इस डिजिटल सर्वे का प्राथमिक उद्देश्य स्थानीय निकायों में ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सटीक और अद्यतन आंकड़े जुटाना है। एकत्रित डेटा ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनावों में आरक्षण ढाँचे का मार्गदर्शन करेगा।
प्रशिक्षण और प्रशासनिक तैयारी
सर्वे की तैयारी के तहत 7 जुलाई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 82 जिला स्तरीय नोडल अधिकारियों, 765 ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों और 1,428 मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। प्रत्येक जिले में एक अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) को मुख्य जिला समन्वयक नियुक्त किया गया है, जो कार्यान्वयन की देखरेख, तकनीकी सहायता और परिचालन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदार होंगे।
राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों, शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज विभाग को सर्वे के सुचारू संचालन के लिए आपसी समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया है। पारदर्शिता और डेटा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आयोग राज्य स्तर पर ऑनलाइन माध्यम से पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा।
न्यायिक दबाव और चुनाव में देरी की पृष्ठभूमि
यह सर्वे ऐसे समय में शुरू हुआ है जब राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर लंबे समय से अनिश्चितता बनी हुई है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने 31 जुलाई तक स्थानीय निकाय चुनाव कराने के न्यायालय के पूर्व निर्देश के अनुपालन को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की है।
गौरतलब है कि संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक दिशा-निर्देशों के अनुसार OBC, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिलाओं के लिए आरक्षण निर्धारित करने हेतु अद्यतन और विश्वसनीय आँकड़ों का होना अनिवार्य है। इन्हीं आँकड़ों के अभाव को चुनाव प्रक्रिया में देरी का प्रमुख कारण बताया गया है।
आम जनता से अपील
आयोग ने ओबीसी परिवारों से अपील की है कि वे घर-घर सर्वेक्षण के दौरान गणनाकर्ताओं को सटीक और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करें, क्योंकि यही डेटा आरक्षण रोस्टर के निर्धारण का आधार बनेगा। आलोचकों का कहना है कि सर्वे की समयसीमा और चुनाव की तारीखों के बीच की कड़ी अभी भी स्पष्ट नहीं है, और उच्च न्यायालय की अवमानना याचिका से राज्य सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है।