राजस्थान में 31 जुलाई तक पंचायत व नगर निकाय चुनाव असंभव, राज्य निर्वाचन आयोग ने माँगे 90 दिन
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने 7 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य में पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय (ULB) चुनाव 31 जुलाई 2026 की निर्धारित समयसीमा के भीतर कराना संभव नहीं है। आयोग ने पंचायती राज विभाग को भेजे पत्र में कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए उसे आरक्षण अधिसूचना जारी होने के बाद कम से कम 90 दिन की आवश्यकता होगी।
चुनाव में देरी का कारण
आयोग के अनुसार, चुनाव कराने की पूर्वशर्त यह है कि राज्य सरकार पहले अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं के लिए आरक्षण का निर्धारण करे। यह निर्धारण राज्य सरकार स्वयं या OBC आयोग की सिफारिशों के आधार पर कर सकती है। फिलहाल OBC आरक्षण की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है, जो पूरी प्रक्रिया को अवरुद्ध कर रही है।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और आगे की समयरेखा
पंचायती राज विभाग ने निर्वाचन आयोग को सूचित किया है कि OBC आयोग अपनी आरक्षण रिपोर्ट 14 अगस्त 2026 तक सौंप सकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर विभाग 31 अगस्त 2026 तक सभी वर्गों के लिए आरक्षण तय करने की योजना बना रहा है। इसके बाद ही निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारियाँ आरंभ कर सकेगा।
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई 2026 को दिए अपने आदेश में राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई 2026 तक पंचायत और नगर निकाय चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया था। अब आयोग की स्थिति स्पष्ट करती है कि उस समयसीमा का पालन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
चुनाव प्रक्रिया का ब्यौरा
आयोग ने बताया कि पंचायत चुनावों में लगभग 50 दिन लगेंगे और पंचायतों की अधिक संख्या तथा व्यवस्थागत कारणों से इन्हें चार चरणों में आयोजित किया जाएगा। वहीं, शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में करीब 40 दिन लगेंगे और इन्हें दो चरणों में कराने की संभावना है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'भाजपा सरकार को हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, लोकसभा और संविधान की परवाह नहीं रह गई है। सरकार 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' की सोच पर काम कर रही है, इसलिए जानबूझकर चुनावों में देरी की जा रही है। निर्वाचन आयोग बिना आंकड़ों के चुनाव नहीं करा सकता और सरकार जरूरी आंकड़े उपलब्ध नहीं करा रही है।'
आलोचकों का कहना है कि OBC आरक्षण की अनिश्चितता एक दीर्घकालिक प्रशासनिक विफलता की ओर संकेत करती है, जो स्थानीय स्वशासन की प्रक्रिया को बाधित कर रही है।
आगे क्या होगा
यदि OBC आयोग की रिपोर्ट 14 अगस्त और आरक्षण अधिसूचना 31 अगस्त तक जारी होती है, तो निर्वाचन आयोग की 90 दिन की गणना के अनुसार चुनाव नवंबर 2026 के अंत तक ही संभव हो सकेंगे। अब यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष पुनः आने की संभावना है, क्योंकि न्यायालय के आदेश की समयसीमा का उल्लंघन निश्चित प्रतीत हो रहा है।