19 जुलाई 2026
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UP पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से मांगी संभावित तिथि; OBC रिपोर्ट 10 जुलाई तक तलब

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UP पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, निर्वाचन आयोग से मांगी संभावित तिथि; OBC रिपोर्ट 10 जुलाई तक तलब

सारांश

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों की देरी अब अदालत की दहलीज़ पर है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव की संभावित तिथि और OBC आयोग की रिपोर्ट 10 जुलाई तक तलब की है, और निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाने की व्यवस्था पर सरकार से जवाब मांगा है।

मुख्य बातें

हाईकोर्ट लखनऊ पीठ ने UP पंचायत चुनाव की संभावित तिथि राज्य निर्वाचन आयोग से तलब की।
न्यायमूर्ति शेखर बी.
सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने आदेश पारित किया।
राज्य सरकार को OBC आयोग की रिपोर्ट 10 जुलाई तक अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश।
याचिका ओमप्रकाश प्रजापति द्वारा दायर; ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने को चुनौती।
सरकार ने OBC आयोग को छह माह का समय दिए जाने की दलील दी, जिस पर अदालत असंतुष्ट रही।
अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में लंबित ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव आख़िर कब कराए जाएंगे। अदालत ने आयोग को अगली सुनवाई पर चुनाव कार्यक्रम अथवा संभावित तिथि की जानकारी देने का निर्देश दिया है, साथ ही राज्य सरकार से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट 10 जुलाई तक प्रस्तुत करने को कहा है।

किस पीठ ने सुनाया आदेश

यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने ओमप्रकाश प्रजापति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। मामला ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार द्वारा उन्हें ही संबंधित ग्राम पंचायतों में अस्थायी प्रशासक नियुक्त किए जाने से जुड़ा है। याचिका में इस व्यवस्था को संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों की भावना के विपरीत बताते हुए चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता का तर्क

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ ने दलील दी कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद समयबद्ध तरीके से चुनाव कराना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। उनका कहना था कि निवर्तमान निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही प्रशासक के रूप में नियुक्त करना कानून की मंशा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

सरकार का पक्ष और अदालत की असहमति

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पंचायत चुनावों में आरक्षण निर्धारण और अन्य प्रक्रियाओं के लिए OBC आयोग गठित किया गया है, जिसे रिपोर्ट देने हेतु छह माह का समय दिया गया है, और रिपोर्ट मिलने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। हालांकि, खंडपीठ ने इस दलील पर संतोष नहीं जताया और स्पष्ट किया कि मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।

आम जनता और प्रधानों पर असर

प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ है, जिसके बाद सरकार ने प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए उन्हीं प्रधानों को अस्थायी प्रशासक नियुक्त किया था। आलोचकों का कहना है कि यह व्यवस्था जवाबदेही के बिना सत्ता का विस्तार है, क्योंकि निर्वाचित कार्यकाल खत्म होने के बावजूद वही चेहरे ग्राम स्तर पर निर्णायक भूमिका में बने हुए हैं। गौरतलब है कि संविधान के 73वें संशोधन के तहत पंचायतों के पाँच-वर्षीय चुनाव समयबद्ध कराना अनिवार्य है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी, जिसमें राज्य निर्वाचन आयोग को चुनावी तैयारियों की वर्तमान स्थिति और संभावित समय-सीमा से अदालत को अवगत कराना होगा। साथ ही OBC आयोग की प्रगति अथवा अंतिम रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष रखी जानी है, जिससे आरक्षण प्रक्रिया और चुनाव कार्यक्रम को लेकर तस्वीर साफ़ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लोकतांत्रिक विलंब की संस्कृति का है। पाँच साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हीं प्रधानों को 'प्रशासक' बना देना तकनीकी रूप से प्रशासनिक उपाय है, लेकिन व्यवहार में यह बिना चुनाव के सत्ता-विस्तार जैसा दिखता है। OBC आरक्षण के नाम पर पंचायत चुनाव टालना उत्तर प्रदेश में नया नहीं — 2021 में भी यही पैटर्न दोहराया गया था। असली परीक्षा 10 जुलाई को होगी, जब आयोग के पास ठोस तिथि होगी या एक और स्थगन की दलील।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UP पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग से उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव कराने की संभावित तिथि और कार्यक्रम की जानकारी अगली सुनवाई पर देने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य सरकार से OBC आयोग की रिपोर्ट 10 जुलाई तक प्रस्तुत करने को कहा गया है।
यह याचिका किसने और क्यों दायर की है?
जनहित याचिका ओमप्रकाश प्रजापति ने दायर की है, जिसमें ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ही अस्थायी प्रशासक नियुक्त करने की राज्य सरकार की व्यवस्था को चुनौती दी गई है। याचिका में इसे संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों की भावना के विपरीत बताया गया है।
राज्य सरकार ने चुनाव में देरी पर क्या तर्क दिया?
सरकार ने अदालत को बताया कि पंचायत चुनावों में आरक्षण निर्धारण के लिए OBC आयोग गठित किया गया है, जिसे रिपोर्ट सौंपने हेतु छह माह का समय दिया गया है। सरकार के अनुसार रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।
मामले की अगली सुनवाई कब है?
मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित है। उसी दिन OBC आयोग की प्रगति अथवा अंतिम रिपोर्ट और राज्य निर्वाचन आयोग की चुनावी तैयारियों की स्थिति अदालत के समक्ष रखी जानी है।
ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर विवाद क्यों है?
आलोचकों का कहना है कि निर्वाचित कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हीं प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करना बिना चुनाव के सत्ता का विस्तार है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना के अनुरूप नहीं है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि समयबद्ध चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है।
राष्ट्र प्रेस
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