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यूपी के 57,694 ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर संगठन का समर्थन, 2027 में 'रिटर्न गिफ्ट' का ऐलान

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यूपी के 57,694 ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर संगठन का समर्थन, 2027 में 'रिटर्न गिफ्ट' का ऐलान

सारांश

उत्तर प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में प्रधानों को प्रशासक बनाने का योगी सरकार का फैसला राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन ने 'ऐतिहासिक और क्रांतिकारी' बताया। संगठन ने 2027 विधानसभा चुनाव में 'रिटर्न गिफ्ट' देने का ऐलान किया — यह ग्रामीण राजनीति में भाजपा के लिए बड़ा समर्थन संकेत है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन ने योगी सरकार के ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले को 'ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम' बताया।
उत्तर प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में प्रधानों को प्रशासकीय अधिकार दिए जाने की मांग स्वीकार की गई।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने कहा कि प्रधान इसे 'उपहार' मानते हैं और 2027 चुनाव में 'रिटर्न गिफ्ट' देंगे।
2 अप्रैल से 25 मई 2025 के बीच संगठन ने शासन और भाजपा नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकें कीं।
राजस्थान (जनवरी 2025) और उत्तराखंड (दिसंबर 2024) के उदाहरण यूपी सरकार के समक्ष रखे गए थे।

उत्तर प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के योगी सरकार के फैसले का राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन ने खुलकर स्वागत किया है। संगठन ने इसे पंचायत व्यवस्था को सुदृढ़ करने वाला 'ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम' करार देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया है। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के प्रधान इस निर्णय को 'उपहार' मानते हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका 'रिटर्न गिफ्ट' देंगे।

संगठन की प्रतिक्रिया और आभार

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने बुधवार, 27 मई को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2021 में ग्राम उत्कर्ष समारोह के दौरान ट्रिपल इंजन सरकार चलाने का जो वादा किया था, उसे अब पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से गांवों में विकास कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित होगी और प्रधानों की प्रशासनिक साख भी मजबूत होगी।

संगठन ने घोषणा की कि वह राज्य, मंडल, जनपद और ब्लॉक स्तर पर आभार समारोह आयोजित करेगा। साथ ही पंचायतों से जुड़ी समस्याओं और विकास कार्यों पर सरकार के साथ संवाद जारी रखा जाएगा।

लंबे संवाद के बाद मिली मंजूरी

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने बताया कि 2 अप्रैल से 25 मई के बीच संगठन ने लगातार शासन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इस दौरान पंचायतीराज विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा संगठन के समक्ष अन्य राज्यों के उदाहरण भी रखे गए।

2 अप्रैल को संगठन ने पंचायतीराज निदेशक अमित सिंह और प्रमुख सचिव अनिल कुमार (तृतीय) से मुलाकात कर यह मांग रखी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री के सचिव सुरेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर, अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद तथा भाजपा प्रदेश नेतृत्व के साथ भी विभिन्न स्तरों पर बैठकें हुईं।

अन्य राज्यों के उदाहरण का दिया गया हवाला

संगठन के अनुसार, राजस्थान सरकार द्वारा जनवरी 2025 और उत्तराखंड सरकार द्वारा दिसंबर 2024 में ग्राम प्रधानों को प्रशासकीय अधिकार दिए जाने के उदाहरण उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। इन्हीं नजीरों के आधार पर प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में प्रधानों को प्रशासक बनाने की मांग को अंततः स्वीकार किया गया।

किन नेताओं के प्रति जताया आभार

प्रधान संगठन के नेताओं ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर के प्रति आभार व्यक्त किया। संगठन ने प्रदेश भर के समस्त ग्राम प्रधानों को भी इस उपलब्धि पर बधाई दी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ राजनीतिक दलों ने शुरू कर दी हैं। ग्राम प्रधानों का यह समर्थन भाजपा के लिए ग्रामीण मतदाताओं तक पहुँच के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि भाजपा शासित राज्यों में पंचायत-स्तरीय राजनीति का एक साझा खाका उभर रहा है। असली कसौटी यह होगी कि प्रशासकीय अधिकार मिलने के बाद विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होती है — अन्यथा यह फैसला चुनावी लाभ तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला क्या है?
योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों को प्रशासकीय अधिकार देने का निर्णय लिया है। इससे प्रधान सीधे प्रशासनिक कार्यों की देखरेख कर सकेंगे और गांवों में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी।
राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन ने इस फैसले पर क्या कहा?
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने इसे 'ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम' बताया। उन्होंने कहा कि प्रधान इस फैसले को 'उपहार' मानते हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका 'रिटर्न गिफ्ट' देंगे।
यह मांग कब से और कैसे उठाई जा रही थी?
संगठन ने 2 अप्रैल से 25 मई 2025 के बीच पंचायतीराज विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकें कीं। 2 अप्रैल को पंचायतीराज निदेशक अमित सिंह और प्रमुख सचिव अनिल कुमार (तृतीय) से मुलाकात कर औपचारिक मांग रखी गई थी।
क्या अन्य राज्यों में भी ऐसा फैसला लिया गया है?
हाँ, राजस्थान सरकार ने जनवरी 2025 में और उत्तराखंड सरकार ने दिसंबर 2024 में ग्राम प्रधानों को प्रशासकीय अधिकार दिए थे। इन्हीं उदाहरणों को उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष रखा गया था।
इस फैसले का 2027 विधानसभा चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?
संगठन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के ग्राम प्रधान 2027 के चुनाव में इस फैसले का 'रिटर्न गिफ्ट' देंगे। राज्य, मंडल, जनपद और ब्लॉक स्तर पर आभार समारोह आयोजित कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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