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राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव: मंत्री झाबर सिंह खर्रा बोले — सरकार पूरी तरह तैयार, हाई कोर्ट के निर्देशों का होगा पालन

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राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव: मंत्री झाबर सिंह खर्रा बोले — सरकार पूरी तरह तैयार, हाई कोर्ट के निर्देशों का होगा पालन

सारांश

राजस्थान हाई कोर्ट की सख्ती के बाद मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने अजमेर में साफ कहा — सरकार पंचायत और निकाय चुनाव कराने को तैयार है। कोर्ट ने 31 जुलाई की समय सीमा दी है और 20 जून तक वार्ड परिसीमन का निर्देश दिया है। ओबीसी रिपोर्ट को देरी का बहाना मानने से इनकार।

मुख्य बातें

मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने 23 मई 2026 को अजमेर में कहा कि राजस्थान सरकार पंचायत व शहरी स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा 31 जुलाई तक निर्धारित की है।
न्यायालय ने राज्य चुनाव आयोग को 20 जून तक वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण पूरा करने का आदेश दिया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के आधार पर चुनाव नहीं टाले जा सकते।
देरी पर अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे — न्यायालय की चेतावनी।
खर्रा ने झलकारी बाई स्मारक के पास 1,400 क्षमता वाले कन्वेंशन सेंटर की आधारशिला भी रखी।

राजस्थान सरकार के मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने शनिवार, 23 मई 2026 को अजमेर दौरे के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य सरकार राजस्थान उच्च न्यायालय के हालिया निर्देशों के अनुरूप पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि राज्य चुनाव आयोग को सरकार की ओर से हर आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।

मंत्री का बयान और आश्वासन

खर्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हाई कोर्ट के फैसले को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य चुनाव आयोग की है और सरकार उसकी हर जरूरत पूरी करने को तत्पर है। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग को हाई कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन करना होगा और उसी के अनुसार आगे बढ़ना होगा। सरकार चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है।' खर्रा ने यह भी आश्वस्त किया कि अजमेर के विकास कार्यों में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

हाई कोर्ट का निर्देश और समय सीमा

यह बयान राजस्थान उच्च न्यायालय के उस फैसले के एक दिन बाद आया जिसमें न्यायालय ने कहा था कि पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं की जा सकती। न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा 31 जुलाई तक बढ़ाई, लेकिन स्पष्ट किया कि केवल ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के कारण चुनावों को नहीं टाला जा सकता।

न्यायालय ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि शहरी स्थानीय निकायों के लिए वार्डों का परिसीमन और मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य 20 जून तक पूरा किया जाए। न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में किसी भी और देरी के लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

अजमेर में कन्वेंशन सेंटर की आधारशिला

इस दौरे के दौरान मंत्री खर्रा ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के साथ मिलकर झलकारी बाई स्मारक क्षेत्र के पास एक आधुनिक कन्वेंशन सेंटर की आधारशिला रखी। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

इस विश्व-स्तरीय सुविधाओं से लैस कन्वेंशन सेंटर में लगभग 1,400 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। परिसर में उच्च-स्तरीय कैफेटेरिया, व्यापक पार्किंग, सुव्यवस्थित आंतरिक सड़कें, आधुनिक जल निकासी प्रणाली, मजबूत चारदीवारी और आकर्षक लैंडस्केपिंग की सुविधाएँ होंगी।

आम जनता और स्थानीय निकायों पर असर

गौरतलब है कि राजस्थान में पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव लंबे समय से लंबित हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधित्व प्रभावित हो रहा है। ओबीसी आरक्षण से जुड़े कानूनी पेचीदगियों के कारण इन चुनावों में बार-बार देरी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायालय की सख्ती के बाद राज्य सरकार पर समयबद्ध चुनाव कराने का दबाव बढ़ गया है।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें राज्य चुनाव आयोग पर होंगी कि वह 20 जून की समय सीमा के भीतर वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य पूरा करता है या नहीं। 31 जुलाई की अंतिम समय सीमा को देखते हुए आने वाले हफ्ते चुनावी तैयारियों की दृष्टि से निर्णायक साबित होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव वर्षों से क्यों लटके हैं — और हर बार न्यायालय को हस्तक्षेप क्यों करना पड़ता है। ओबीसी आरक्षण की आड़ में चुनाव टालने की यह प्रवृत्ति राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में यही पैटर्न देखा गया है। 20 जून की परिसीमन डेडलाइन और 31 जुलाई की चुनाव समय सीमा — दोनों तभी अर्थपूर्ण होंगी जब राज्य चुनाव आयोग को वास्तविक प्रशासनिक सहयोग मिले, न सिर्फ मंच से दिए गए आश्वासन।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान पंचायत और निकाय चुनाव कब तक होंगे?
राजस्थान उच्च न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा 31 जुलाई 2026 तक निर्धारित की है। इससे पहले राज्य चुनाव आयोग को 20 जून तक वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य पूरा करना होगा।
राजस्थान हाई कोर्ट ने चुनाव को लेकर क्या निर्देश दिए हैं?
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के आधार पर चुनाव नहीं टाले जा सकते और देरी के लिए अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने चुनाव को लेकर क्या कहा?
मंत्री खर्रा ने 23 मई 2026 को अजमेर में कहा कि राज्य सरकार हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य चुनाव आयोग द्वारा माँगी गई हर जरूरत सरकार पूरी करेगी।
राजस्थान में निकाय चुनाव इतने समय से क्यों लंबित हैं?
ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कानूनी अड़चनें और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होना इन चुनावों में देरी के प्रमुख कारण रहे हैं। हालाँकि हाई कोर्ट ने अब स्पष्ट कर दिया है कि इस आधार पर चुनाव और नहीं टाले जा सकते।
अजमेर में किस नए कन्वेंशन सेंटर की आधारशिला रखी गई?
मंत्री खर्रा और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने झलकारी बाई स्मारक क्षेत्र के पास एक आधुनिक कन्वेंशन सेंटर की आधारशिला रखी, जिसमें लगभग 1,400 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। इसमें कैफेटेरिया, पार्किंग, आधुनिक जल निकासी और लैंडस्केपिंग जैसी सुविधाएँ होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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