चमोली में भूस्खलन: नंदप्रयाग-नंदानगर मार्ग बंद, स्कूली बच्चों समेत यात्री फंसे
सारांश
मुख्य बातें
चमोली जिले के नंदप्रयाग-नंदानगर मोटर मार्ग पर 8 जुलाई की सुबह चमन मंदिर के निकट पहाड़ी से भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा सड़क पर आ गिरा, जिससे मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। लगातार हो रही बारिश के कारण उत्तराखंड में भूस्खलन की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 13 जुलाई तक राज्य के अधिकतर जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार की सुबह चमन मंदिर के पास अचानक विशाल बोल्डर और मलबा सड़क पर आ गिरा, जिससे नंदप्रयाग-नंदानगर मार्ग दोनों दिशाओं से बंद हो गया। देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सुबह का वक्त होने के कारण यह घटना विशेष रूप से परेशानी भरी रही, क्योंकि इस समय स्कूल जाने वाले बच्चे, शिक्षक और दैनिक यात्री बड़ी संख्या में सड़क पर थे।
राहत की कोशिश, लेकिन बड़े पत्थर बने बाधा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई शिक्षक स्वयं सड़क पर उतर आए और बोल्डरों को हटाने का प्रयास किया। हालाँकि, बड़े पत्थरों के कारण मार्ग को हाथों से साफ करना संभव नहीं हो सका और मशीनी सहायता की दरकार पड़ी। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे उत्तराखंड में मानसून की बारिश अपने पूरे उफान पर है।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 8 जुलाई को उत्तराखंड के अधिकांश जनपदों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जबकि कई जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश के साथ गर्जन और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। यह अलर्ट 13 जुलाई तक प्रभावी रहेगा।
आम जनता पर असर
अधिकारियों ने चेताया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में हल्के से मध्यम भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा बना रहेगा। पहाड़ी सड़कों और राजमार्गों पर अवरोध उत्पन्न होने की आशंका है। इसके अलावा, नदियों और बरसाती नालों के जलस्तर में वृद्धि तथा निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी हो सकती है।
सावधानी बरतने की अपील
अधिकारियों ने भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सावधानीपूर्वक यात्रा करने की सलाह दी है। छोटी नदियों और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। गौरतलब है कि हर मानसून सीज़न में उत्तराखंड के पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन की ऐसी घटनाएँ आम यातायात को बुरी तरह प्रभावित करती हैं।