8 जुलाई 2026
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अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया का एसएमआर त्रिपक्षीय समझौता, इंडो-पैसिफिक में परमाणु ऊर्जा विस्तार का लक्ष्य

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अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया का एसएमआर त्रिपक्षीय समझौता, इंडो-पैसिफिक में परमाणु ऊर्जा विस्तार का लक्ष्य

सारांश

अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन में अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने एसएमआर तैनाती के लिए ऐतिहासिक त्रिपक्षीय एमओसी पर हस्ताक्षर किए। इंडो-पैसिफिक में स्वच्छ परमाणु ऊर्जा विस्तार और अमेरिकी फंडिंग के साथ यह समझौता क्षेत्र में चीन की परमाणु कूटनीति के विरुद्ध एक ठोस लोकतांत्रिक विकल्प प्रस्तुत करता है।

मुख्य बातें

अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने 8 जुलाई 2025 को अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान एसएमआर त्रिपक्षीय सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए।
समझौते का प्रारंभिक फोकस इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एसएमआर तैनाती में तेज़ी लाना है।
अमेरिका ने एसएमआर बुनियादी ढाँचा कार्यक्रम के लिए 1 करोड़ डॉलर से अधिक की नई फंडिंग का ऐलान किया।
ढाँचे में फ्लीट डिप्लॉयमेंट मॉडल, लाइसेंसिंग सरलीकरण, निजी निवेश आकर्षण और सप्लाई चेन सुदृढ़ीकरण शामिल है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एसएमआर को 'ऊर्जा उत्पादन का भविष्य' बताया।
परमाणु सुरक्षा और अप्रसार के उच्चतम अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई गई।

अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने 8 जुलाई 2025 को अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान तीसरे देशों में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) की तैनाती में तेज़ी लाने के लिए एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का प्रारंभिक फोकस इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर है और यह ऊर्जा सुरक्षा व सिविल न्यूक्लियर तकनीक में तीनों देशों के गहराते रणनीतिक सहयोग का प्रतीक है।

मुख्य घटनाक्रम

तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के मौके पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री मोटेगी तोशिमित्सु और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने इस एमओसी पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता तीनों देशों के परमाणु उद्योगों के बीच ठोस सहयोग की नींव रखता है।

इस ढाँचे के तहत फ्लीट डिप्लॉयमेंट मॉडल को प्रोत्साहन, परियोजना जोखिम में कमी, निजी निवेश आकर्षित करना, लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाना और सप्लाई चेन को मज़बूत करना शामिल है। साथ ही परमाणु सुरक्षा और अप्रसार के उच्चतम अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी जताई गई है।

विदेश मंत्रियों के बयान

अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने ऊर्जा सुरक्षा को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में गिनाते हुए कहा, "आज दुनिया के सबसे अहम मुद्दों में से एक ऊर्जा सुरक्षा है, जैसा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और दूसरी जगहों पर हो रही घटनाओं से याद दिलाया जाता है।" उन्होंने एसएमआर को "ऊर्जा उत्पादन का भविष्य" बताया और कहा कि इस समझौते से तीनों देशों की अर्थव्यवस्थाएँ मज़बूत होंगी।

रुबियो ने जापान और दक्षिण कोरिया के द्विपक्षीय संबंधों की मज़बूती का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि यह रिश्ता हाल के समय में और अतीत में भी कई परीक्षाओं से गुज़रा है, लेकिन पिछले तीन-चार सालों में यह और मज़बूत हुआ है।"

जापान के विदेश मंत्री मोटेगी ने बताया कि तीनों देशों ने पिछले अक्टूबर से ही "ठोस प्रयास" किए हैं, जिनमें महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुदृढ़ करना और उत्तर कोरिया के साइबर खतरों से निपटना शामिल है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ने कहा, "हम दुनिया की चुनौतियों का सामना करते हुए मिलकर काम कर सकते हैं।"

अमेरिकी फंडिंग और तकनीकी सहायता

समझौते के साथ अमेरिका ने अपने स्टेट डिपार्टमेंट के 'स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए बुनियादी ढाँचा' कार्यक्रम हेतु 1 करोड़ डॉलर से अधिक की नई फंडिंग का भी ऐलान किया। यह राशि इंडो-पैसिफिक देशों को तकनीकी सहायता देने, एसएमआर परियोजनाओं के विकास में तेज़ी लाने और एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने में उपयोग होगी।

एसएमआर क्या है और यह क्यों अहम है

स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) उन्नत परमाणु रिएक्टर होते हैं, जिन्हें पारंपरिक परमाणु संयंत्रों की तुलना में कम भूमि और कम प्रारंभिक लागत पर विश्वसनीय, कम-कार्बन बिजली उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह तकनीक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक स्तर पर भारी निवेश आकर्षित कर रही है।

गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा माँग तेज़ी से बढ़ रही है और चीन की परमाणु ऊर्जा कूटनीति भी सक्रिय है। तीनों लोकतांत्रिक देशों का यह गठबंधन क्षेत्र में एक वैकल्पिक, मानक-आधारित परमाणु ऊर्जा विकल्प प्रस्तुत करता है।

आगे की राह

इस एमओसी के तहत तीनों देशों के परमाणु उद्योगों के बीच संयुक्त परियोजनाओं की पहचान और क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक के विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में यह साझेदारी दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती परमाणु कूटनीति के विरुद्ध एक सुविचारित भू-राजनीतिक चाल है। हालाँकि एमओसी की भाषा महत्वाकांक्षी है, असली परीक्षा यह होगी कि तीनों देशों के परमाणु उद्योग — जो अपने-अपने नियामक और व्यावसायिक हितों से बँधे हैं — वास्तव में किस हद तक मिलकर काम कर पाते हैं। इंडो-पैसिफिक के विकासशील देश स्वच्छ ऊर्जा के लिए वित्तपोषण और तकनीक दोनों चाहते हैं — यह समझौता तकनीकी ढाँचा तो देता है, लेकिन वित्तपोषण की व्यापक संरचना अभी भी अस्पष्ट है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया का एसएमआर समझौता क्या है?
यह 8 जुलाई 2025 को अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय सहयोग ज्ञापन (एमओसी) है, जिसका उद्देश्य तीसरे देशों — विशेषकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र — में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) की तैनाती में तेज़ी लाना है। इसके तहत तीनों देशों के परमाणु उद्योगों के बीच सहयोग, लाइसेंसिंग सरलीकरण और निजी निवेश आकर्षण पर ज़ोर दिया जाएगा।
स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) क्या होते हैं?
एसएमआर उन्नत परमाणु रिएक्टर हैं जो पारंपरिक परमाणु संयंत्रों की तुलना में कम भूमि और कम प्रारंभिक लागत पर विश्वसनीय, कम-कार्बन बिजली उत्पन्न करते हैं। ये ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक स्तर पर तेज़ी से चर्चा में हैं।
इस समझौते में अमेरिका ने कितनी फंडिंग का ऐलान किया?
अमेरिका ने अपने स्टेट डिपार्टमेंट के 'एसएमआर तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए बुनियादी ढाँचा' कार्यक्रम हेतु 1 करोड़ डॉलर से अधिक की नई फंडिंग का ऐलान किया। यह राशि इंडो-पैसिफिक देशों को तकनीकी सहायता, एसएमआर परियोजना विकास और एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने में उपयोग होगी।
इस समझौते का इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर क्या असर होगा?
इस समझौते से इंडो-पैसिफिक के विकासशील देशों को स्वच्छ, कम-कार्बन परमाणु ऊर्जा तक पहुँच आसान होगी। तीनों देशों की कंपनियाँ मिलकर अधिक प्रतिस्पर्धी परमाणु ऊर्जा समाधान प्रस्तुत कर सकेंगी, जो क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगा।
इस समझौते पर किसने हस्ताक्षर किए और कहाँ?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री मोटेगी तोशिमित्सु और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने 8 जुलाई 2025 को तुर्की की राजधानी अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान इस एमओसी पर हस्ताक्षर किए।
राष्ट्र प्रेस
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