अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया का एसएमआर त्रिपक्षीय समझौता, इंडो-पैसिफिक में परमाणु ऊर्जा विस्तार का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने 8 जुलाई 2025 को अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान तीसरे देशों में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) की तैनाती में तेज़ी लाने के लिए एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का प्रारंभिक फोकस इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर है और यह ऊर्जा सुरक्षा व सिविल न्यूक्लियर तकनीक में तीनों देशों के गहराते रणनीतिक सहयोग का प्रतीक है।
मुख्य घटनाक्रम
तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के मौके पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री मोटेगी तोशिमित्सु और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने इस एमओसी पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता तीनों देशों के परमाणु उद्योगों के बीच ठोस सहयोग की नींव रखता है।
इस ढाँचे के तहत फ्लीट डिप्लॉयमेंट मॉडल को प्रोत्साहन, परियोजना जोखिम में कमी, निजी निवेश आकर्षित करना, लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाना और सप्लाई चेन को मज़बूत करना शामिल है। साथ ही परमाणु सुरक्षा और अप्रसार के उच्चतम अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी जताई गई है।
विदेश मंत्रियों के बयान
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने ऊर्जा सुरक्षा को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में गिनाते हुए कहा, "आज दुनिया के सबसे अहम मुद्दों में से एक ऊर्जा सुरक्षा है, जैसा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और दूसरी जगहों पर हो रही घटनाओं से याद दिलाया जाता है।" उन्होंने एसएमआर को "ऊर्जा उत्पादन का भविष्य" बताया और कहा कि इस समझौते से तीनों देशों की अर्थव्यवस्थाएँ मज़बूत होंगी।
रुबियो ने जापान और दक्षिण कोरिया के द्विपक्षीय संबंधों की मज़बूती का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि यह रिश्ता हाल के समय में और अतीत में भी कई परीक्षाओं से गुज़रा है, लेकिन पिछले तीन-चार सालों में यह और मज़बूत हुआ है।"
जापान के विदेश मंत्री मोटेगी ने बताया कि तीनों देशों ने पिछले अक्टूबर से ही "ठोस प्रयास" किए हैं, जिनमें महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुदृढ़ करना और उत्तर कोरिया के साइबर खतरों से निपटना शामिल है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ने कहा, "हम दुनिया की चुनौतियों का सामना करते हुए मिलकर काम कर सकते हैं।"
अमेरिकी फंडिंग और तकनीकी सहायता
समझौते के साथ अमेरिका ने अपने स्टेट डिपार्टमेंट के 'स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए बुनियादी ढाँचा' कार्यक्रम हेतु 1 करोड़ डॉलर से अधिक की नई फंडिंग का भी ऐलान किया। यह राशि इंडो-पैसिफिक देशों को तकनीकी सहायता देने, एसएमआर परियोजनाओं के विकास में तेज़ी लाने और एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने में उपयोग होगी।
एसएमआर क्या है और यह क्यों अहम है
स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) उन्नत परमाणु रिएक्टर होते हैं, जिन्हें पारंपरिक परमाणु संयंत्रों की तुलना में कम भूमि और कम प्रारंभिक लागत पर विश्वसनीय, कम-कार्बन बिजली उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह तकनीक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक स्तर पर भारी निवेश आकर्षित कर रही है।
गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा माँग तेज़ी से बढ़ रही है और चीन की परमाणु ऊर्जा कूटनीति भी सक्रिय है। तीनों लोकतांत्रिक देशों का यह गठबंधन क्षेत्र में एक वैकल्पिक, मानक-आधारित परमाणु ऊर्जा विकल्प प्रस्तुत करता है।
आगे की राह
इस एमओसी के तहत तीनों देशों के परमाणु उद्योगों के बीच संयुक्त परियोजनाओं की पहचान और क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक के विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में यह साझेदारी दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।