भारत-नॉर्वे के बीच 5 रणनीतिक समझौते: ऑफशोर विंड, ग्रीन टेक और समुद्री ऊर्जा पर बड़ा करार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान 19 मई 2026 को भारत और नॉर्वे ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में पाँच महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। ये करार ग्रीन एनर्जी, ऑफशोर विंड, सर्कुलर इकोनॉमी, समुद्री अनुसंधान और उच्च शिक्षा सहयोग जैसे अग्रणी क्षेत्रों को कवर करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने 2070 के कार्बन न्यूट्रैलिटी लक्ष्य की दिशा में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तेज़ी से बढ़ाने में जुटा है।
मुख्य समझौते और उनकी विषयवस्तु
सबसे महत्वपूर्ण करार डीएसआईआर/सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) और रिसर्च काउंसिल ऑफ नॉर्वे (RCN) के बीच हुआ। इसके तहत संयुक्त कार्यशालाएँ, शोध एवं विकास परियोजनाएँ, वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान कार्यक्रम और जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री अनुसंधान तथा स्वास्थ्य सेवाओं जैसे वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करने की व्यवस्था की गई है।
इसके अतिरिक्त, सीएसआईआर ने नॉर्वे की प्रमुख स्वतंत्र शोध संस्था एसआईएनटीईएफ (SINTEF) के साथ 2026-2029 की अवधि के लिए एक नया सहयोग समझौता किया। यह साझेदारी सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबिलिटी ट्रांजिशन पर केंद्रित होगी, जिसमें बायो-बेस्ड मैटेरियल, ओशन एनर्जी, ऑफशोर विंड, कार्बन कैप्चर एवं स्टोरेज तथा वेस्ट मैनेजमेंट पर संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम शामिल हैं।
ऑफशोर विंड एनर्जी पर विशेष ध्यान
एक अन्य अहम करार के तहत कई सीएसआईआर संस्थानों ने एसआईएनटीईएफ की विभिन्न शाखाओं के साथ समुद्री ऊर्जा और ऑफशोर विंड एनर्जी तकनीकों पर परियोजना-आधारित सहयोग समझौता किया। भारतीय पक्ष से सीएसआईआर-स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग रिसर्च सेंटर, सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेट्रीज, सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी और सीएसआईआर-फोर्थ पैराडाइम इंस्टीट्यूट इस साझेदारी में शामिल हैं।
नॉर्वे की ओर से एसआईएनटीईएफ ओशन, एसआईएनटीईएफ डिजिटल, FME नॉर्थविंड और एसआईएनटीईएफ कम्युनिटी इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। इस संयुक्त पहल का उद्देश्य फ्लोटिंग ऑफशोर विंड टेक्नोलॉजी, ऊर्जा लागत में कमी, सस्टेनेबिलिटी स्टैंडर्ड, ESG फ्रेमवर्क, पायलट प्रोजेक्ट, कौशल विकास और औद्योगिक प्रगति पर काम करना है। इस पहल के लिए सीएसआईआर लगभग ₹3.41 करोड़ की फंडिंग सहायता प्रदान करेगा।
शैक्षणिक और नवाचार सहयोग
'ग्रीन शिफ्ट के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार सहयोग' शीर्षक से एक संयुक्त घोषणा-पत्र पर भी हस्ताक्षर हुए। यह समझौता सीएसआईआर, एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (AcSIR) और नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NTNU) के बीच हुआ। इसके अंतर्गत सस्टेनेबिलिटी, सर्कुलर इकोनॉमी, ओशन साइंस एवं टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग में सहयोग बढ़ाया जाएगा। छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त शोध गतिविधियाँ, अकादमिक सेमिनार और साझा शैक्षणिक कार्यक्रम भी इस ढाँचे का हिस्सा होंगे।
व्यापक रणनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि नॉर्वे वैश्विक ऑफशोर विंड और समुद्री प्रौद्योगिकी में अग्रणी देशों में शुमार है, और भारत के साथ यह साझेदारी दोनों देशों की ऊर्जा-परिवर्तन महत्वाकांक्षाओं को पारस्परिक लाभ देती है। भारत के लिए यह करार देश की विशाल समुद्री तटरेखा के साथ ऑफशोर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को अनलॉक करने की दिशा में एक ठोस संस्थागत कदम है। आने वाले वर्षों में इन समझौतों के तहत शुरू होने वाले पायलट प्रोजेक्ट यह तय करेंगे कि यह सहयोग कागज़ों से ज़मीन पर कितना उतर पाता है।