महाकाल मंदिर की पार्किंग भूमि ₹3.82 करोड़ में बेची गई, BJP विधायक पर आरोप — कांग्रेस
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के निकट लगभग 45,000 वर्ग फीट सरकारी भूमि को एक निजी कंपनी को बेचे जाने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस के अनुसार, 2 मार्च 2026 को यह जमीन ₹3.82 करोड़ में यूटोपिया होटल एंड रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड को बेची गई, जिसके निदेशकों में आलोट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक चिंतामणि मालवीय का नाम शामिल बताया जा रहा है।
मुख्य आरोप क्या हैं
सिंघार के अनुसार, जो भूमि मूलतः महाकाल लोक प्रोजेक्ट के अंतर्गत पार्किंग के लिए आरक्षित थी, उसे पहले निजी संपत्ति घोषित किया गया और फिर उक्त कंपनी को बेच दिया गया। कांग्रेस का दावा है कि कंपनी के दो निदेशक हैं — विधायक चिंतामणि मालवीय और उनके व्यावसायिक सहयोगी इकबाल सिंह।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि 1950 और 1967-68 के राजस्व अभिलेखों में यह भूमि सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज थी। आरोपों के अनुसार, इसे गलत तरीके से कृषि भूमि के रूप में पंजीकृत कराया गया, जिससे कथित तौर पर लगभग ₹3.40 करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क की चोरी हुई।
सिंघार की राजनीतिक प्रतिक्रिया
मंगलवार को जारी बयान में सिंघार ने सवाल उठाया, 'क्या महाकाल लोक खुद, आपकी सरकार की देखरेख में, अब BJP नेताओं और आपके साथियों से जुड़े प्रॉपर्टी सौदों के लिए महज एक जरिया बनकर रह गया है?' उन्होंने यह भी कहा कि महाकाल लोक प्रोजेक्ट में पहले भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं, और अब भूमि अधिग्रहण व व्यावसायिक सौदों को लेकर नए विवाद उठ रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई और शिकायतें
उज्जैन निवासी शिकायतकर्ता राजेंद्र कुवाल ने इस मामले में मुख्य सचिव, लोकायुक्त और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के समक्ष औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। इसके अतिरिक्त, उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है।
विधायक मालवीय का खंडन
विधायक चिंतामणि मालवीय ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए उन्हें 'झूठे और दुर्भावनापूर्ण' करार दिया है। भाजपा सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
यह मामला अब न्यायिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर जाँच के दायरे में है। उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में दायर PIL की सुनवाई और EOW की जाँच के नतीजे इस विवाद की दिशा तय करेंगे। गौरतलब है कि महाकाल लोक परियोजना धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित की गई थी, और इस पर उठे सवाल राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं।