सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान के झूठे दावे बेनकाब, भारत ने पश्चिमी नदियों का पानी नहीं रोका: रिपोर्ट

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सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान के झूठे दावे बेनकाब, भारत ने पश्चिमी नदियों का पानी नहीं रोका: रिपोर्ट

सारांश

पहलगाम हमले के बाद भारत ने IWT स्थगित की, पर पश्चिमी नदियों का पानी नहीं रोका। यूरेशिया रिव्यू रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठे दावे कर रहा है, जबकि असली समस्या उसकी खुद की जल प्रबंधन विफलता है — 30 दिन की भंडारण क्षमता और दो-तिहाई पानी की बर्बादी।

मुख्य बातें

भारत ने IWT स्थगित करने के बावजूद पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान की ओर बहने दिया।
पूर्वी नदियों का भी 5 से 6 प्रतिशत पानी तकनीकी सीमाओं के कारण पाकिस्तान पहुँचता रहा।
पाकिस्तान अपने कुल वार्षिक जल प्रवाह का केवल 10 प्रतिशत संग्रहित कर पाता है; वैश्विक औसत 40 प्रतिशत है।
कमर-उज-जमान के अनुसार पाकिस्तान कृषि में उपयोग होने वाले पानी का दो-तिहाई बर्बाद करता है।
पाकिस्तान की जल भंडारण क्षमता मात्र 30 दिन की है, जिसे बढ़ाने में वह अब तक असफल रहा।
पाकिस्तान ने UNSC में भारत के फैसले को 'शांति और मानवता के लिए खतरा' बताया, लेकिन रिपोर्ट ने इस दावे पर सवाल उठाए।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान की ओर बहता रहा। यूरेशिया रिव्यू की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इस मुद्दे पर 'गलत दावे' कर रहा है और अपनी जल प्रबंधन विफलताओं का दोष भारत पर मढ़ने की कोशिश कर रहा है।

भारत का रुख और वास्तविक स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, IWT के अस्थायी स्थगन के बाद भी भारत ने पश्चिमी नदियों — जिन पर पाकिस्तान का प्राथमिक अधिकार है — का पानी नहीं रोका। इसके अतिरिक्त, पूर्वी नदियों के पानी का भी लगभग 5 से 6 प्रतिशत हिस्सा तकनीकी और भंडारण सीमाओं के कारण स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान की ओर बहता रहता है।

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ जल संकट का हवाला देकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान की जल प्रबंधन विफलताएँ

रिपोर्ट में पाकिस्तान के पूर्व मौसम विभाग प्रमुख कमर-उज-जमान के हवाले से कहा गया कि पाकिस्तान अपनी कृषि में उपयोग होने वाले पानी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पुराने और अकुशल तरीकों के कारण बर्बाद कर देता है। इसके अलावा, पाकिस्तान अपने कुल वार्षिक जल प्रवाह का मात्र 10 प्रतिशत ही संग्रहित कर पाता है, जबकि वैश्विक औसत लगभग 40 प्रतिशत है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान की इंडस बेसिन सिंचाई प्रणाली में भी लगभग 25 प्रतिशत पानी रिसाव और खराब प्रबंधन के कारण व्यर्थ हो जाता है। देश की जल भंडारण क्षमता केवल लगभग 30 दिन की है, जिसे बढ़ाने में वह अब तक असफल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के दावे

पाकिस्तान ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) तक पहुँचाया और भारत के फैसले को 'शांति और मानवता के लिए खतरा' करार दिया। अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि उसके पास केवल 90 दिनों का पानी बचा है।

हालाँकि, रिपोर्ट ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान दिलाया — यदि संकट इतना गंभीर था, तो यह पत्र पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की बजाय उप प्रधानमंत्री ने क्यों भेजा? आलोचकों का कहना है कि यह कूटनीतिक नाटकबाजी का हिस्सा है।

विशेषज्ञ और सैन्य अधिकारियों की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय जल संसाधन निगरानी संस्थाओं ने पहले ही आगाह किया था कि यदि पाकिस्तान अपनी जल प्रबंधन व्यवस्था में सुधार नहीं करता, तो 2025 तक उसे गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी जमील मुहम्मद ने भी स्वीकार किया कि पानी पूरी तरह खत्म नहीं है, लेकिन गलत प्रबंधन के कारण भविष्य में स्थिति गंभीर हो सकती है।

आगे की राह

रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि पाकिस्तान का जल संकट मुख्यतः उसकी अपनी नीतिगत विफलताओं का परिणाम है — न कि भारत की IWT स्थगन नीति का। जब तक पाकिस्तान अपनी भंडारण क्षमता, सिंचाई दक्षता और जल नीति में ठोस सुधार नहीं करता, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को दोष देने की रणनीति उसकी असली समस्या का समाधान नहीं करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब खुद पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी और पूर्व मौसम विभाग प्रमुख आंतरिक कुप्रबंधन स्वीकार करते हैं, तो यह आख्यान टिकाऊ नहीं रहता। असली सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान IWT विवाद को घरेलू जल सुधारों की जवाबदेही से बचने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भारत ने IWT स्थगन के बाद पाकिस्तान का पानी रोक दिया?
नहीं। रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने IWT को अस्थायी रूप से स्थगित करने के बावजूद पश्चिमी नदियों का पानी नहीं रोका। इसके अतिरिक्त, पूर्वी नदियों का भी 5 से 6 प्रतिशत पानी तकनीकी और भंडारण सीमाओं के कारण पाकिस्तान की ओर बहता रहा।
पाकिस्तान का जल संकट किस कारण है?
यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का जल संकट मुख्यतः उसकी अपनी जल प्रबंधन विफलताओं के कारण है। वह अपने वार्षिक जल प्रवाह का केवल 10 प्रतिशत संग्रहित कर पाता है, कृषि में दो-तिहाई पानी बर्बाद होता है, और उसकी जल भंडारण क्षमता मात्र 30 दिन की है।
पाकिस्तान ने UNSC में क्या दावा किया?
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के IWT स्थगन को 'शांति और मानवता के लिए खतरा' बताया और दावा किया कि उसके पास केवल 90 दिनों का पानी बचा है। हालाँकि, रिपोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि संकट इतना गंभीर था, तो यह पत्र प्रधानमंत्री की बजाय उप प्रधानमंत्री ने क्यों भेजा।
IWT स्थगन का पाकिस्तान पर वास्तविक असर क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, IWT स्थगन का तात्कालिक प्रभाव सीमित है क्योंकि भारत ने पश्चिमी नदियों का पानी नहीं रोका। पाकिस्तान की असली समस्या उसकी इंडस बेसिन सिंचाई प्रणाली में 25 प्रतिशत पानी का रिसाव और खराब प्रबंधन है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पाकिस्तान को पहले क्या चेतावनी दी थी?
अंतरराष्ट्रीय जल संसाधन निगरानी संस्थाओं ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि पाकिस्तान अपनी जल प्रबंधन व्यवस्था में सुधार नहीं करता, तो 2025 तक उसे गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी जमील मुहम्मद ने भी माना कि गलत प्रबंधन के कारण भविष्य में स्थिति गंभीर हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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