सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान के झूठे दावे बेनकाब, भारत ने पश्चिमी नदियों का पानी नहीं रोका: रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान की ओर बहता रहा। यूरेशिया रिव्यू की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इस मुद्दे पर 'गलत दावे' कर रहा है और अपनी जल प्रबंधन विफलताओं का दोष भारत पर मढ़ने की कोशिश कर रहा है।
भारत का रुख और वास्तविक स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, IWT के अस्थायी स्थगन के बाद भी भारत ने पश्चिमी नदियों — जिन पर पाकिस्तान का प्राथमिक अधिकार है — का पानी नहीं रोका। इसके अतिरिक्त, पूर्वी नदियों के पानी का भी लगभग 5 से 6 प्रतिशत हिस्सा तकनीकी और भंडारण सीमाओं के कारण स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान की ओर बहता रहता है।
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ जल संकट का हवाला देकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान की जल प्रबंधन विफलताएँ
रिपोर्ट में पाकिस्तान के पूर्व मौसम विभाग प्रमुख कमर-उज-जमान के हवाले से कहा गया कि पाकिस्तान अपनी कृषि में उपयोग होने वाले पानी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पुराने और अकुशल तरीकों के कारण बर्बाद कर देता है। इसके अलावा, पाकिस्तान अपने कुल वार्षिक जल प्रवाह का मात्र 10 प्रतिशत ही संग्रहित कर पाता है, जबकि वैश्विक औसत लगभग 40 प्रतिशत है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान की इंडस बेसिन सिंचाई प्रणाली में भी लगभग 25 प्रतिशत पानी रिसाव और खराब प्रबंधन के कारण व्यर्थ हो जाता है। देश की जल भंडारण क्षमता केवल लगभग 30 दिन की है, जिसे बढ़ाने में वह अब तक असफल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के दावे
पाकिस्तान ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) तक पहुँचाया और भारत के फैसले को 'शांति और मानवता के लिए खतरा' करार दिया। अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि उसके पास केवल 90 दिनों का पानी बचा है।
हालाँकि, रिपोर्ट ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान दिलाया — यदि संकट इतना गंभीर था, तो यह पत्र पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की बजाय उप प्रधानमंत्री ने क्यों भेजा? आलोचकों का कहना है कि यह कूटनीतिक नाटकबाजी का हिस्सा है।
विशेषज्ञ और सैन्य अधिकारियों की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय जल संसाधन निगरानी संस्थाओं ने पहले ही आगाह किया था कि यदि पाकिस्तान अपनी जल प्रबंधन व्यवस्था में सुधार नहीं करता, तो 2025 तक उसे गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी जमील मुहम्मद ने भी स्वीकार किया कि पानी पूरी तरह खत्म नहीं है, लेकिन गलत प्रबंधन के कारण भविष्य में स्थिति गंभीर हो सकती है।
आगे की राह
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि पाकिस्तान का जल संकट मुख्यतः उसकी अपनी नीतिगत विफलताओं का परिणाम है — न कि भारत की IWT स्थगन नीति का। जब तक पाकिस्तान अपनी भंडारण क्षमता, सिंचाई दक्षता और जल नीति में ठोस सुधार नहीं करता, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को दोष देने की रणनीति उसकी असली समस्या का समाधान नहीं करेगी।