विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख: अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी तय, 2,860 मामले लंबित

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विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख: अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी तय, 2,860 मामले लंबित

सारांश

भारत ने एक साथ तीन कड़े संदेश दिए — अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की अनिवार्य वापसी, सिंधु जल संधि का निलंबन जारी, और ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर पाकिस्तान को आतंकवाद छोड़ने की चेतावनी। विदेश मंत्रालय का यह रुख स्पष्ट करता है कि भारत की पड़ोस नीति में अब कोई अस्पष्टता नहीं।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 7 मई 2026 को पुष्टि की कि भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा जाएगा।
बांग्लादेश के पास नागरिकता सत्यापन के 2,860 से अधिक मामले लंबित हैं, कई पाँच साल से भी अधिक समय से।
सिंधु जल संधि (IWT) पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद के जवाब में फिलहाल निलंबित है।
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर सरकार ने पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अपना संकल्प दोहराया।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि आतंकवाद लंबे समय से पाकिस्तान की राज्य नीति का हिस्सा रहा है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने 7 मई 2026 को स्पष्ट किया कि भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी बांग्लादेशी नागरिकों को कानून और द्विपक्षीय समझौतों के तहत वापस भेजा जाएगा। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में यह रुख दोहराते हुए बांग्लादेश से राष्ट्रीय सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग की अपेक्षा जताई। यह बयान ऐसे समय में आया जब बांग्लादेश के दो वरिष्ठ मंत्रियों की टिप्पणियाँ सीमा-पार चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

बांग्लादेशी मंत्रियों की टिप्पणियाँ और भारत का जवाब

बांग्लादेश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने अवैध प्रवासियों को पुशबैक किए जाने की आशंका जताई थी, जबकि विदेश मंत्री खलीलपुर रहमान ने कहा था कि यदि जबरन लोगों को उनकी ओर भेजा गया तो कार्रवाई की जाएगी। इन्हीं टिप्पणियों के संदर्भ में जायसवाल ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

पाकिस्तान और आतंकवाद — पर एक साथ कड़ा संदेश देने की कोशिश है, लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन की है। 2,860 लंबित सत्यापन मामले यह बताते हैं कि यह प्रक्रिया वर्षों से अटकी है और बांग्लादेश का सहयोग बिना राजनयिक दबाव के मिलना मुश्किल है। सिंधु जल संधि का निलंबन पाकिस्तान पर दबाव का एक उपकरण है, परंतु इसके दीर्घकालिक जल-कूटनीतिक परिणामों पर अभी तक पर्याप्त चर्चा नहीं हुई है। ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर दिए गए बयान से स्पष्ट है कि भारत इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर जीवित रखना चाहता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया क्या है?
भारत सरकार की नीति के अनुसार, अवैध रूप से रह रहे सभी बांग्लादेशी नागरिकों को कानून और द्विपक्षीय समझौतों के तहत वापस भेजा जाएगा। इसके लिए बांग्लादेश से नागरिकता सत्यापन में सहयोग की अपेक्षा है, जहाँ 2,860 से अधिक मामले पहले से लंबित हैं।
सिंधु जल संधि को क्यों निलंबित किया गया है?
पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दिए जाने के जवाब में भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) को फिलहाल रोक दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह नहीं छोड़ता, यह रुख बना रहेगा।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था और इसकी वर्षगांठ पर क्या कहा गया?
ऑपरेशन सिंदूर 7 मई की देर रात पाकिस्तान के खिलाफ भारत द्वारा शुरू किया गया था, जो पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में था। इसकी पहली वर्षगांठ पर सरकार ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद का करारा जवाब दिया और यह लड़ाई जारी रहेगी।
बांग्लादेश के मंत्रियों ने क्या टिप्पणियाँ की थीं?
बांग्लादेश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने अवैध प्रवासियों को पुशबैक किए जाने की आशंका जताई थी, जबकि विदेश मंत्री खलीलपुर रहमान ने कहा था कि जबरन लोगों को भेजे जाने पर कार्रवाई की जाएगी। भारत ने इन टिप्पणियों को पृष्ठभूमि के रूप में देखते हुए अपनी नीति स्पष्ट की।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इस मुद्दे का क्या असर पड़ सकता है?
अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर बांग्लादेश का सहयोग न मिलना द्विपक्षीय तनाव को और गहरा कर सकता है। 2,860 से अधिक लंबित सत्यापन मामले यह संकेत देते हैं कि यह प्रक्रिया वर्षों से अटकी है और इसका समाधान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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