कुमारस्वामी परिवार पर शिवकुमार का बड़ा हमला: PRR रोड पर ₹7-10 लाख में जमीन खरीद, अब ₹50 करोड़ तक कीमत

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कुमारस्वामी परिवार पर शिवकुमार का बड़ा हमला: PRR रोड पर ₹7-10 लाख में जमीन खरीद, अब ₹50 करोड़ तक कीमत

सारांश

कर्नाटक में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया अध्याय — उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने कुमारस्वामी के परिवार पर PRR क्षेत्र में ₹7-10 लाख में ज़मीनें हड़पकर ₹50 करोड़ तक बेचने का आरोप लगाया, जबकि देवेगौड़ा ने शिवकुमार पर बिदादी में 20,000 एकड़ ज़मीन रखने का दावा किया था।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 16 मई को केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के परिवार पर रियल एस्टेट के ज़रिये संपत्ति जमा करने का आरोप लगाया।
शिवकुमार के अनुसार, कुमारस्वामी के भाई ने डोड्डा गुब्बी और चिक्का गुब्बी में लोगों को धमकाकर ₹7-10 लाख में संपत्तियाँ पंजीकृत करवाईं, जो अब ₹25-50 करोड़ की हो चुकी हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने इससे पहले शिवकुमार पर बिदादी टाउनशिप के ज़रिये व्यावसायिक हित साधने और 20,000 एकड़ ज़मीन रखने का आरोप लगाया था।
शिवकुमार ने खाता परिवर्तन पर 2% शुल्क की आलोचना करने वाले कुमारस्वामी को 'दिवास्वप्न देखने वाला' बताया।
सभी आरोप राजनीतिक हैं और अभी तक न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं।

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार, 16 मई को बेंगलुरु के होरामवु स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। शिवकुमार ने कहा कि कुमारस्वामी के भाई ने परिधीय रिंग रोड (PRR) परियोजना के नाम पर स्थानीय लोगों को डरा-धमकाकर ₹7 लाख, ₹8 लाख और ₹10 लाख में संपत्तियाँ पंजीकृत करवाईं, जिनकी मौजूदा कीमत ₹25 करोड़ से ₹50 करोड़ तक पहुँच चुकी है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह राजनीतिक वाकयुद्ध तब शुरू हुआ जब पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने शिवकुमार पर बिदादी टाउनशिप परियोजना के ज़रिये व्यावसायिक हित साधने का आरोप लगाया। देवेगौड़ा ने दावा किया कि शिवकुमार के पास बेंगलुरु के बाहरी इलाके में बिदादी क्षेत्र में 20,000 एकड़ ज़मीन है।

शिवकुमार ने इन आरोपों को पलटते हुए कुमारस्वामी पर जवाबी हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिदादी टाउनशिप परियोजना की अधिसूचना तो स्वयं कुमारस्वामी ने जारी की थी — और अब वही इसका विरोध कर रहे हैं।

PRR क्षेत्र में संपत्ति सौदों का आरोप

शिवकुमार ने डोड्डा गुब्बी और चिक्का गुब्बी इलाकों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ के निवासी बता सकते हैं कि किस प्रकार उन्हें धमकाकर सस्ते दामों पर संपत्तियाँ पंजीकृत करवाई गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि PRR सड़क परियोजना की आड़ में यह रियल एस्टेट कारोबार किया गया।

गौरतलब है कि ये आरोप अभी तक न्यायालय में साबित नहीं हुए हैं और कुमारस्वामी पक्ष की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं थी।

खाता परिवर्तन शुल्क पर पलटवार

कुमारस्वामी ने हाल ही में लोगों को सलाह दी थी कि वे खाता परिवर्तन पर लगने वाला 2 प्रतिशत शुल्क न दें, क्योंकि उनकी सरकार जल्द सत्ता में आएगी। इस पर शिवकुमार ने तीखे लहजे में कहा, 'यह तो बस उनका कोरा सपना है; उनकी सरकार सत्ता में नहीं आएगी। कांग्रेस सरकार सत्ता में है और जनहितैषी कार्य कर रही है।'

ईंधन और महँगाई पर निशाना

शिवकुमार ने कुमारस्वामी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों पर बोलना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि कुमारस्वामी ने एक समय लोगों को सोना न खरीदने की सलाह दी थी, लेकिन अब वे इन असली मुद्दों पर चुप हैं।

राजनीतिक संदर्भ

यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और जनता दल (सेक्युलर)–भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन के बीच राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों पक्षों के बीच रियल एस्टेट और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को लेकर आरोपों का यह सिलसिला आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दोनों ही पक्ष साक्ष्य की बजाय बयानबाज़ी पर निर्भर हैं। असली सवाल यह है कि PRR क्षेत्र में ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं थी — और इसकी जाँच कोई स्वतंत्र एजेंसी क्यों नहीं कर रही। जब तक दोनों दल एक-दूसरे पर कीचड़ उछालते रहेंगे, डोड्डा गुब्बी और चिक्का गुब्बी के वे किसान न्याय की प्रतीक्षा में रहेंगे जिनकी ज़मीनों का उल्लेख केवल राजनीतिक हथियार के रूप में हो रहा है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीके शिवकुमार ने कुमारस्वामी के परिवार पर क्या आरोप लगाए?
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी के भाई ने परिधीय रिंग रोड (PRR) परियोजना के नाम पर डोड्डा गुब्बी और चिक्का गुब्बी के लोगों को धमकाकर ₹7-10 लाख में संपत्तियाँ पंजीकृत करवाईं, जो अब ₹25 करोड़ से ₹50 करोड़ तक की हो चुकी हैं। ये आरोप अभी तक न्यायालय में साबित नहीं हुए हैं।
बिदादी टाउनशिप विवाद क्या है और इसका इस मामले से क्या संबंध है?
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने आरोप लगाया था कि शिवकुमार बिदादी टाउनशिप परियोजना के ज़रिये व्यावसायिक हित साध रहे हैं और उनके पास इस क्षेत्र में 20,000 एकड़ ज़मीन है। शिवकुमार ने इन आरोपों के जवाब में कुमारस्वामी पर पलटवार किया और याद दिलाया कि बिदादी परियोजना की अधिसूचना स्वयं कुमारस्वामी ने जारी की थी।
खाता परिवर्तन शुल्क पर यह विवाद क्यों छिड़ा?
कुमारस्वामी ने लोगों को सलाह दी थी कि वे खाता परिवर्तन पर 2% शुल्क न दें, क्योंकि उनकी सरकार जल्द सत्ता में आएगी। शिवकुमार ने इसे 'दिवास्वप्न' बताते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार स्थिर है और जनहितैषी कार्य कर रही है।
क्या इन रियल एस्टेट आरोपों की कोई जाँच हो रही है?
अभी तक किसी स्वतंत्र जाँच एजेंसी द्वारा इन आरोपों की आधिकारिक जाँच की कोई घोषणा नहीं हुई है। ये आरोप राजनीतिक बयानबाज़ी के स्तर पर हैं और न्यायालय में अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं।
इस राजनीतिक विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर)–BJP गठबंधन के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को दर्शाता है। रियल एस्टेट और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को लेकर आरोपों का यह सिलसिला आगामी चुनावी माहौल में और तेज़ होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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