18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'हिंदी मीडियम' के नौ साल: इरफान खान का वो तंज जो आज भी गूंजता है

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'हिंदी मीडियम' के नौ साल: इरफान खान का वो तंज जो आज भी गूंजता है

सारांश

'हिंदी मीडियम' के नौ साल — और इरफान खान का वो व्यंग्य आज भी उतना ही तीखा है। मैडॉक फिल्म्स ने उनका आइकॉनिक क्लिप शेयर कर याद दिलाया कि अंग्रेजी बनाम हिंदी की यह लड़ाई सिर्फ पर्दे पर नहीं, हर भारतीय परिवार के दरवाज़े पर दस्तक देती है।

मुख्य बातें

'हिंदी मीडियम' ने 19 मई 2026 को अपनी रिलीज़ के नौ साल पूरे किए।
मैडॉक फिल्म्स ने इंस्टाग्राम पर इरफान खान का एक चर्चित वीडियो क्लिप साझा किया, जिसमें वे प्राइवेट स्कूलों पर व्यंग्य करते हैं।
फिल्म 2017 में रिलीज़ हुई थी और इसका निर्देशन साकेत चौधरी ने किया था।
मुख्य भूमिकाओं में इरफान खान , सबा कमर और दीपक डोबरियाल थे।
फिल्म की कहानी दिल्ली के चांदनी चौक के एक परिवार की शिक्षा व्यवस्था से जूझने की है।

हिंदी सिनेमा की मील का पत्थर मानी जाने वाली सामाजिक-व्यंग्य फिल्म 'हिंदी मीडियम' ने 19 मई 2026 को अपनी रिलीज़ के नौ साल पूरे कर लिए। इस अवसर पर फिल्म के निर्माता मैडॉक फिल्म्स ने इंस्टाग्राम पर दिवंगत अभिनेता इरफान खान का एक चर्चित वीडियो क्लिप साझा किया, जिसमें वे प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और दिखावे पर तीखा व्यंग्य करते नज़र आते हैं। पोस्ट के साथ मेकर्स ने लिखा: 'पढ़ाई की भाषा: हिंदी या अंग्रेजी नहीं, सिर्फ एहसास।'

फिल्म की कहानी और सामाजिक संदेश

साल 2017 में प्रदर्शित यह फिल्म उस सामाजिक विडंबना को बेनकाब करती है जहाँ अंग्रेजी बोलने की क्षमता को इंसान की काबिलियत का पैमाना मान लिया जाता है। कहानी दिल्ली के चांदनी चौक में रहने वाले व्यवसायी राज बत्रा (इरफान खान) और उनकी महत्वाकांक्षी पत्नी मीता (सबा कमर) के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो अपनी बेटी 'पिया' को शहर के सबसे प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए हर हथकंडा अपनाते हैं।

जब तमाम कोशिशें नाकाम होती हैं, तो वे 'गरीब कोटे' का फायदा उठाने के लिए झुग्गी-झोपड़ियों में रहने का नाटक करते हैं। इसी प्रक्रिया में उनकी मुलाकात एक वास्तविक ज़रूरतमंद व्यक्ति (दीपक डोबरियाल) से होती है, जो उन्हें जीवन और शिक्षा का असली अर्थ समझाता है।

इरफान खान का अभिनय — एक अमिट छाप

फिल्म में इरफान खान की सहज और बहुआयामी अदाकारी को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने भरपूर सराहा। उनकी डायलॉग डिलीवरी — खासकर स्कूल प्रणाली पर व्यंग्यात्मक दृश्यों में — इतनी प्रभावशाली थी कि नौ साल बाद भी वे क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं। यह ऐसे समय में और भी मार्मिक हो जाता है जब 2020 में इरफान खान के निधन के बाद उनकी फिल्मों की विरासत और गहरी हो गई है।

निर्देशक और मुख्य कलाकार

फिल्म का निर्देशन साकेत चौधरी ने किया था। मुख्य भूमिकाओं में इरफान खान और सबा कमर के साथ दीपक डोबरियाल ने सहायक किरदार में यादगार प्रदर्शन किया। फिल्म को व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ आलोचनात्मक प्रशंसा भी मिली थी।

नौ साल बाद भी प्रासंगिक

गौरतलब है कि भारत में शिक्षा की भाषा और सामाजिक असमानता का सवाल आज भी उतना ही ज़रूरी है जितना 2017 में था। स्कूल एडमिशन की जटिल प्रक्रिया, महँगी फीस और अंग्रेजी माध्यम की अनिवार्यता — ये मुद्दे आज भी लाखों भारतीय परिवारों की रोज़मर्रा की चुनौती हैं। 'हिंदी मीडियम' इन्हीं सवालों को हास्य और संवेदनशीलता के साथ उठाती है, जो इसे एक कालजयी फिल्म बनाती है।

मैडॉक फिल्म्स का यह पोस्ट उन दर्शकों के लिए एक भावनात्मक पल है जो इरफान खान की अदाकारी को आज भी याद करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

सामाजिक दस्तावेज़ बन चुकी हैं। मुख्यधारा की कवरेज इसे 'एनिवर्सरी पोस्ट' तक सीमित रखती है, लेकिन असली सवाल यह है कि 2026 में भी 'गरीब कोटे' की आड़ में होने वाली धाँधली और अंग्रेजी माध्यम की अनिवार्यता पर बहस क्यों नहीं बदली।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'हिंदी मीडियम' फिल्म कब रिलीज़ हुई थी और इसकी कहानी क्या है?
'हिंदी मीडियम' साल 2017 में रिलीज़ हुई थी। यह फिल्म दिल्ली के चांदनी चौक के एक व्यवसायी दंपती की कहानी है जो अपनी बेटी को प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं और इस प्रक्रिया में जीवन का असली अर्थ समझते हैं।
मैडॉक फिल्म्स ने 'हिंदी मीडियम' की 9वीं सालगिरह पर क्या शेयर किया?
मैडॉक फिल्म्स ने इंस्टाग्राम पर दिवंगत अभिनेता इरफान खान का एक आइकॉनिक वीडियो क्लिप शेयर किया जिसमें वे प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और दिखावे पर व्यंग्य करते नज़र आते हैं। पोस्ट के साथ लिखा था: 'पढ़ाई की भाषा: हिंदी या अंग्रेजी नहीं, सिर्फ एहसास।'
'हिंदी मीडियम' में कौन-कौन से मुख्य कलाकार थे?
फिल्म में इरफान खान और सबा कमर मुख्य भूमिकाओं में थे, जबकि दीपक डोबरियाल ने एक महत्वपूर्ण सहायक किरदार निभाया था। फिल्म का निर्देशन साकेत चौधरी ने किया था।
इरफान खान की 'हिंदी मीडियम' आज भी क्यों याद की जाती है?
फिल्म का सामाजिक-व्यंग्य संदेश — अंग्रेजी को काबिलियत का पैमाना मानने की प्रवृत्ति पर सवाल — आज भी प्रासंगिक है। इरफान खान के 2020 में निधन के बाद यह फिल्म उनकी अभिनय विरासत का एक अहम हिस्सा बन गई है।
फिल्म में 'गरीब कोटे' का क्या संदर्भ है?
फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे मुख्य पात्र महँगे स्कूल में दाखिले के लिए 'गरीब कोटे' का फायदा उठाने की कोशिश में झुग्गी-झोपड़ी में रहने का नाटक करते हैं। यह प्रसंग भारत की शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण और सामाजिक असमानता पर तीखा व्यंग्य है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले