'हिंदी मीडियम' के नौ साल: इरफान खान का वो तंज जो आज भी गूंजता है
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी सिनेमा की मील का पत्थर मानी जाने वाली सामाजिक-व्यंग्य फिल्म 'हिंदी मीडियम' ने 19 मई 2026 को अपनी रिलीज़ के नौ साल पूरे कर लिए। इस अवसर पर फिल्म के निर्माता मैडॉक फिल्म्स ने इंस्टाग्राम पर दिवंगत अभिनेता इरफान खान का एक चर्चित वीडियो क्लिप साझा किया, जिसमें वे प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और दिखावे पर तीखा व्यंग्य करते नज़र आते हैं। पोस्ट के साथ मेकर्स ने लिखा: 'पढ़ाई की भाषा: हिंदी या अंग्रेजी नहीं, सिर्फ एहसास।'
फिल्म की कहानी और सामाजिक संदेश
साल 2017 में प्रदर्शित यह फिल्म उस सामाजिक विडंबना को बेनकाब करती है जहाँ अंग्रेजी बोलने की क्षमता को इंसान की काबिलियत का पैमाना मान लिया जाता है। कहानी दिल्ली के चांदनी चौक में रहने वाले व्यवसायी राज बत्रा (इरफान खान) और उनकी महत्वाकांक्षी पत्नी मीता (सबा कमर) के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो अपनी बेटी 'पिया' को शहर के सबसे प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए हर हथकंडा अपनाते हैं।
जब तमाम कोशिशें नाकाम होती हैं, तो वे 'गरीब कोटे' का फायदा उठाने के लिए झुग्गी-झोपड़ियों में रहने का नाटक करते हैं। इसी प्रक्रिया में उनकी मुलाकात एक वास्तविक ज़रूरतमंद व्यक्ति (दीपक डोबरियाल) से होती है, जो उन्हें जीवन और शिक्षा का असली अर्थ समझाता है।
इरफान खान का अभिनय — एक अमिट छाप
फिल्म में इरफान खान की सहज और बहुआयामी अदाकारी को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने भरपूर सराहा। उनकी डायलॉग डिलीवरी — खासकर स्कूल प्रणाली पर व्यंग्यात्मक दृश्यों में — इतनी प्रभावशाली थी कि नौ साल बाद भी वे क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं। यह ऐसे समय में और भी मार्मिक हो जाता है जब 2020 में इरफान खान के निधन के बाद उनकी फिल्मों की विरासत और गहरी हो गई है।
निर्देशक और मुख्य कलाकार
फिल्म का निर्देशन साकेत चौधरी ने किया था। मुख्य भूमिकाओं में इरफान खान और सबा कमर के साथ दीपक डोबरियाल ने सहायक किरदार में यादगार प्रदर्शन किया। फिल्म को व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ आलोचनात्मक प्रशंसा भी मिली थी।
नौ साल बाद भी प्रासंगिक
गौरतलब है कि भारत में शिक्षा की भाषा और सामाजिक असमानता का सवाल आज भी उतना ही ज़रूरी है जितना 2017 में था। स्कूल एडमिशन की जटिल प्रक्रिया, महँगी फीस और अंग्रेजी माध्यम की अनिवार्यता — ये मुद्दे आज भी लाखों भारतीय परिवारों की रोज़मर्रा की चुनौती हैं। 'हिंदी मीडियम' इन्हीं सवालों को हास्य और संवेदनशीलता के साथ उठाती है, जो इसे एक कालजयी फिल्म बनाती है।
मैडॉक फिल्म्स का यह पोस्ट उन दर्शकों के लिए एक भावनात्मक पल है जो इरफान खान की अदाकारी को आज भी याद करते हैं।